अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी से ईरान को ₹45,600 करोड़ का नुकसान, पेंटागन का आकलन: रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के आकलन के अनुसार, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (करीब ₹45,600 करोड़) का नुकसान उठाना पड़ा है। समाचार वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है, जो ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर इस नाकेबंदी के गहरे असर को रेखांकित करती है।
नाकेबंदी का विस्तार और टैंकरों की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, नाकेबंदी के दौरान दो टैंकर जब्त किए गए। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि लगभग 53 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे 31 टैंकर इस समय खाड़ी में फंसे हुए हैं। इस स्थिति से ईरान के तेल निर्यात में आई भारी गिरावट का सीधा अंदाज़ा लगाया जा सकता है। कथित तौर पर इसी वजह से ईरान को यह अरबों डॉलर का राजस्व नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जहाज़ों के रास्ते में बदलाव
इन्हीं अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ जहाज़ अब अमेरिकी नाकेबंदी के डर से चीन को तेल पहुँचाने के लिए एक महंगा और लंबा वैकल्पिक रास्ता चुन रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि अमेरिकी सेना की सख्त कार्रवाई के भय से समुद्री व्यापार के मार्गों पर व्यापक असर पड़ा है।
नाकेबंदी की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
यह नाकेबंदी अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर एक अस्थायी संघर्षविराम के दौरान लागू की थी। इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना था ताकि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए उस युद्धविराम को स्वीकार करे, जिससे इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष स्थायी रूप से समाप्त हो सके। गौरतलब है कि ईरान ने पिछले महीने कहा था कि इजरायल और लेबनान में सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह के बीच 10 दिन के संघर्षविराम की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाज़ों के लिए पूरी तरह फिर से खोल दिया गया है।
होर्मुज पर फिर लगी पाबंदी
हालाँकि, बाद में इस अहम जलमार्ग पर पुनः पाबंदी लगा दी गई, जब अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया। अमेरिका का स्पष्ट कहना था कि जब तक ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए कोई पक्का और बाध्यकारी समझौता नहीं हो जाता, तब तक ये पाबंदियाँ जारी रहेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है और वैश्विक तेल बाज़ार अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहा है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, यदि नाकेबंदी इसी तरह जारी रही तो ईरान के तेल राजस्व पर दबाव और बढ़ सकता है, जिसका असर उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोगियों को दी जाने वाली फंडिंग पर भी पड़ेगा। पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही वार्ता की सफलता ही इस गतिरोध का एकमात्र निकट-अवधि समाधान नज़र आती है।