IMF वर्किंग पेपर: भारत के डिजिटल प्रशासन सुधारों से सूक्ष्म उद्यमों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक नए वर्किंग पेपर के अनुसार, भारत में सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण ने सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो एंटरप्राइजेज) की उत्पादकता बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। वाशिंगटन से जारी इस अध्ययन में 2010-11 और 2015-16 के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के फर्म-स्तरीय आँकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिन राज्यों ने डिजिटल सुधारों को अधिक तेज़ी से अपनाया, वहाँ उत्पादकता वृद्धि भी अधिक रही।
अध्ययन का दायरा और पद्धति
IMF का यह वर्किंग पेपर 2010 से 2015 के बीच भारत के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए डिजिटल प्रशासन सुधारों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में सुधारों को छह प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है — टैक्स सिस्टम, निर्माण परमिट, पर्यावरण व श्रम अनुपालन, निरीक्षण, वाणिज्यिक विवाद और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस। फर्म-स्तरीय आँकड़ों के आधार पर कुल कारक उत्पादकता (Total Factor Productivity — TFP) में बदलाव को मापा गया।
मुख्य निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, जिन राज्यों ने कर प्रणाली, परमिट, निरीक्षण और विवाद निपटान जैसे क्षेत्रों में अधिक डिजिटल सुधार किए, वहाँ उत्पादकता वृद्धि ज़्यादा देखी गई और कंपनियों के बीच प्रदर्शन का अंतर कम हुआ। अध्ययन में उद्धृत किया गया,