अशोक गहलोत: जोधपुर से दिल्ली तक, तीन बार राजस्थान के सीएम और सत्ता से बाहर भी अडिग विपक्षी नेता

Click to start listening
अशोक गहलोत: जोधपुर से दिल्ली तक, तीन बार राजस्थान के सीएम और सत्ता से बाहर भी अडिग विपक्षी नेता

सारांश

तीन बार मुख्यमंत्री, केंद्र में कई मंत्री पद और अब सक्रिय विपक्षी रणनीतिकार — अशोक गहलोत की राजनीतिक यात्रा राजस्थान की कहानी का दूसरा नाम है। चिरंजीवी योजना और स्वास्थ्य अधिकार कानून जैसे साहसिक कदमों ने उन्हें अलग पहचान दी, लेकिन पाँच साल की सत्ता-परिवर्तन की परंपरा ने एक बार फिर उनकी राह रोकी।

Key Takeaways

अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को जोधपुर में हुआ; वे सरदारपुरा से वर्तमान विधायक हैं। उन्होंने 1982 में इंदिरा गांधी की कैबिनेट में पहली बार केंद्रीय मंत्री पद संभाला और 1991 तक विभिन्न मंत्रालयों में कार्य किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में तीन कार्यकाल — 1998-2003 , 2008-2013 , 2018-2023 । 1 मई 2021 को शुरू चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में बीमा कवर बढ़ाकर ₹25 लाख और ₹10 लाख दुर्घटना बीमा किया गया। 21 मार्च 2023 को राजस्थान देश का पहला राज्य बना जिसने स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार घोषित किया। दिसंबर 2023 में कांग्रेस की हार के बाद गहलोत AICC कोर ग्रुप कमेटी के रणनीतिकार के रूप में सक्रिय विपक्षी भूमिका में हैं।

अशोक गहलोत का नाम राजस्थान की राजनीति में उसी तरह घुला-मिला है जैसे रेत में पानी। 3 मई 1951 को जोधपुर में जन्मे गहलोत की जमीनी सादगी और संगठनात्मक पकड़ को सबसे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहचाना, और महज 31 वर्ष की आयु में उन्हें केंद्रीय राजनीति की सीढ़ी पर चढ़ने का मौका मिला। सरदारपुरा से मौजूदा विधायक गहलोत आज 75 वर्ष की उम्र में भी राजस्थान की राजनीति के सबसे सक्रिय चेहरों में शुमार हैं।

केंद्रीय राजनीति में शुरुआती पहचान

2 सितंबर 1982 को इंदिरा गांधी ने गहलोत को अपनी कैबिनेट में पर्यटन और नागरिक उड्डयन उप मंत्री का प्रभार सौंपा। फरवरी 1984 में वे खेल उप मंत्री बने। इंदिरा गांधी के बाद राजीव गांधी ने भी इस युवा नेता पर भरोसा जताया और दिसंबर 1984 में उन्हें पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बनाया गया।

गहलोत की कार्यकुशलता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि 1991 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने उन्हें कपड़ा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। यह ऐसे समय में आया जब देश आर्थिक उदारीकरण की दहलीज़ पर खड़ा था।

तीन कार्यकाल: राजस्थान के सबसे कद्दावर मुख्यमंत्री

राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत के तीन कार्यकाल — 1998-2003, 2008-2013, और 2018-2023 — ने उन्हें प्रदेश के सर्वाधिक अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं की पंक्ति में सबसे आगे ला खड़ा किया। गौरतलब है कि राजस्थान में हर पाँच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, फिर भी गहलोत बार-बार वापसी करते रहे।

कल्याणकारी राजनीति का स्वर्णकाल: तीसरा कार्यकाल (2018-2023)

गहलोत के तीसरे कार्यकाल को राजस्थान में कल्याणकारी शासन के एक नए अध्याय के रूप में देखा जाता है। 1 मई 2021 को मजदूर दिवस के अवसर पर उन्होंने 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' की शुरुआत की। शुरुआत में हर परिवार को ₹5 लाख का कैशलेस बीमा मिला, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया और साथ में ₹10 लाख का दुर्घटना बीमा भी जोड़ा गया।

21 मार्च 2023 को गहलोत सरकार 'राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम' लेकर आई, जिसके साथ राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया जिसने स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार का दर्जा दिया। इस कानून के तहत कोई भी अस्पताल आपातकालीन स्थिति में मरीज को इलाज से मना नहीं कर सकता और न ही एडवांस भुगतान की माँग कर सकता है। हालाँकि 'आपातकाल' की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण निजी अस्पतालों और चिकित्सकों ने सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध किया और इसे 'काला कानून' करार दिया।

महंगाई राहत और चुनाव-पूर्व योजनाएँ

2023 के विधानसभा चुनावों से पहले गहलोत ने पूरे राज्य में 'महंगाई राहत शिविर' आयोजित किए। बाज़ार में ₹1,150 में मिलने वाला गैस सिलेंडर गरीब परिवारों को ₹500 में उपलब्ध कराया गया। हर घर को 100 यूनिट और किसानों को 2,000 यूनिट मुफ्त बिजली देने की व्यवस्था की गई। शहरी बेरोजगारों के लिए 'इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना' भी शुरू की गई।

चुनाव-पूर्व सर्वेक्षणों में गहलोत की व्यक्तिगत लोकप्रियता उच्चतम स्तर पर थी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई भी स्थानीय नेता उनके कद से मेल नहीं खाता था। बावजूद इसके, राजस्थान की पाँच-साल-में-सत्ता-बदलने की परंपरा एक बार फिर सच साबित हुई और ओल्ड पेंशन स्कीम सहित तमाम लोकलुभावन योजनाओं के बावजूद दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) को हार का सामना करना पड़ा।

विपक्ष में भी प्रासंगिक: 2026 की भूमिका

सत्ता से बाहर होने के बाद भी 75 वर्षीय गहलोत एक आक्रामक और रणनीतिक विपक्षी नेता की भूमिका में हैं। वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की शक्तिशाली 'कोर ग्रुप कमेटी' के अहम रणनीतिकार हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के सामने वे सबसे बड़ी विपक्षी चुनौती बने हुए हैं। उनका सोशल मीडिया मंच 'एक्स' सरकार की नीतियों पर लगातार प्रहार करता रहता है।

सत्ता में हों या विपक्ष में — गहलोत ने बार-बार साबित किया है कि राजस्थान की राजनीति में उनकी प्रासंगिकता किसी एक कार्यकाल तक सीमित नहीं है।

Point of View

लेकिन दिसंबर 2023 की हार यह सवाल उठाती है कि क्या कल्याणकारी योजनाएँ अकेले सत्ता-विरोधी लहर को पलट सकती हैं। राजस्थान की पाँच-साल-में-बदलाव की परंपरा किसी एक नेता की विफलता नहीं, बल्कि मतदाताओं की संरचनात्मक अपेक्षाओं का प्रतिबिंब है। असली प्रश्न यह है कि क्या गहलोत की योजनाओं को उनके उत्तराधिकारी सरकार ने जारी रखा या खामोशी से दफना दिया — और इसका जवाब राजस्थान की अगली चुनावी कहानी लिखेगा।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

अशोक गहलोत कितनी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे हैं?
अशोक गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे हैं — 1998-2003, 2008-2013 और 2018-2023। यह उन्हें राजस्थान के सबसे अनुभवी मुख्यमंत्रियों में से एक बनाता है।
चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना 1 मई 2021 को गहलोत सरकार ने शुरू की, जिसमें हर परिवार को ₹5 लाख का कैशलेस बीमा मिला, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹25 लाख और ₹10 लाख का दुर्घटना बीमा किया गया। यह योजना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य खर्च का बड़ा सहारा बनी।
राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम 2023 क्यों विवादास्पद रहा?
21 मार्च 2023 को लागू इस कानून ने राजस्थान को देश का पहला राज्य बनाया जिसने स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार घोषित किया, लेकिन 'आपातकाल' की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण निजी अस्पतालों और डॉक्टरों ने इसे 'काला कानून' बताते हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। गहलोत अपने इरादों पर अडिग रहे।
2023 के चुनाव में इतनी लोकप्रियता के बावजूद कांग्रेस क्यों हारी?
चुनाव-पूर्व सर्वेक्षणों में गहलोत की व्यक्तिगत लोकप्रियता उच्च थी, लेकिन राजस्थान में हर पाँच साल में सत्ता बदलने की ऐतिहासिक परंपरा और सत्ता-विरोधी लहर के सामने ओल्ड पेंशन स्कीम सहित तमाम कल्याणकारी योजनाएँ पर्याप्त नहीं रहीं। दिसंबर 2023 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
सत्ता से बाहर होने के बाद अशोक गहलोत की राजनीतिक भूमिका क्या है?
2026 में 75 वर्षीय गहलोत AICC की कोर ग्रुप कमेटी के प्रमुख रणनीतिकार हैं और सरदारपुरा से विधायक के रूप में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के सामने सबसे मुखर विपक्षी चेहरा बने हुए हैं। उनका सोशल मीडिया मंच 'एक्स' सरकारी नीतियों पर लगातार सक्रिय रहता है।
Nation Press