ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा तो प्रतिबंध जारी रहेंगे: फ्रांस के विदेश मंत्री बारो
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने 13 जुलाई को फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का पूर्णतः त्याग नहीं करता, तब तक उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में किसी भी प्रकार की ढील देने का प्रश्न ही नहीं उठता। पेरिस का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु मसले पर बहुपक्षीय वार्ताएँ एक नाजुक दौर से गुजर रही हैं।
फ्रांस का कड़ा रुख
बारो ने कहा कि ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम का त्याग किए बिना प्रतिबंध हटाना संभव नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने भी उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि फ्रांस ईरान के परमाणु मुद्दे पर होने वाली वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की शर्तों से संतुष्ट हुए बिना पेरिस, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने का समर्थन नहीं करेगा।
उल्लेखनीय है कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो का अधिकार है — यानी प्रतिबंध हटाने की किसी भी प्रक्रिया में उसकी सहमति अनिवार्य है।
तेहरान की प्रतिक्रिया
तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया से कहा कि ईरान ने हर वार्ता में गंभीरता और पूरी जिम्मेदारी के साथ भाग लिया है और हमेशा देश के हितों एवं जनता की चिंताओं को प्राथमिकता दी है। बाघेई ने कहा, 'जब भी कोई समझौता हुआ, ईरान ने सद्भावना के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी भी सबसे पहले अपने वादों का उल्लंघन नहीं किया।'
अमेरिका पर चेतावनी
बाघेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करेगा। उनके शब्दों में, 'जब भी दूसरे पक्ष ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया, हमने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। आगे भी हमारा रुख यही रहेगा।'
खामेनेई प्रकरण और न्याय की माँग
बाघेई ने यह भी कहा कि दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के मामले में न्याय की उम्मीद करना ईरानी सरकार का एक गंभीर और मूलभूत सिद्धांत है। उन्होंने कहा, 'सरकार की इस संबंध में स्पष्ट जिम्मेदारी है और विदेश मंत्रालय भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।'
आगे क्या होगा
फ्रांस और ईरान के बीच यह कूटनीतिक तनाव दर्शाता है कि परमाणु वार्ताओं में अभी भी बड़ी खाई बनी हुई है। यह ऐसे समय में है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्य-पूर्व में स्थिरता की दिशा में प्रयासरत है। आने वाले हफ्तों में बहुपक्षीय वार्ताओं की दिशा यह तय करेगी कि ईरान पर प्रतिबंधों का भविष्य क्या होगा।