13 जुलाई 2026
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ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा तो प्रतिबंध जारी रहेंगे: फ्रांस के विदेश मंत्री बारो

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ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा तो प्रतिबंध जारी रहेंगे: फ्रांस के विदेश मंत्री बारो

सारांश

फ्रांस ने साफ कर दिया है — ईरान का परमाणु कार्यक्रम जारी रहा तो प्रतिबंध नहीं हटेंगे। वहीं तेहरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर वह अपनी प्रतिबद्धताएँ नहीं निभाता तो ईरान भी एमओयू से पीछे हट सकता है। दोनों पक्षों के बीच यह तनाव परमाणु वार्ताओं को और जटिल बना रहा है।

मुख्य बातें

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने 13 जुलाई को कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का त्याग किए बिना प्रतिबंध हटाना संभव नहीं।
फ्रांस , संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य और वीटो शक्ति संपन्न देश है — यानी उसकी सहमति के बिना प्रतिबंध नहीं हट सकते।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान ने हर वार्ता में सद्भावना के साथ भाग लिया और कभी पहले अपने वादे नहीं तोड़े।
बाघेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्धविराम प्रतिबद्धताएँ नहीं निभाता, तो ईरान एमओयू का पालन नहीं करेगा।
दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के मामले में न्याय की माँग को ईरान ने 'मूलभूत सिद्धांत' बताया।

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने 13 जुलाई को फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का पूर्णतः त्याग नहीं करता, तब तक उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में किसी भी प्रकार की ढील देने का प्रश्न ही नहीं उठता। पेरिस का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु मसले पर बहुपक्षीय वार्ताएँ एक नाजुक दौर से गुजर रही हैं।

फ्रांस का कड़ा रुख

बारो ने कहा कि ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम का त्याग किए बिना प्रतिबंध हटाना संभव नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने भी उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि फ्रांस ईरान के परमाणु मुद्दे पर होने वाली वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की शर्तों से संतुष्ट हुए बिना पेरिस, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने का समर्थन नहीं करेगा।

उल्लेखनीय है कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो का अधिकार है — यानी प्रतिबंध हटाने की किसी भी प्रक्रिया में उसकी सहमति अनिवार्य है।

तेहरान की प्रतिक्रिया

तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मीडिया से कहा कि ईरान ने हर वार्ता में गंभीरता और पूरी जिम्मेदारी के साथ भाग लिया है और हमेशा देश के हितों एवं जनता की चिंताओं को प्राथमिकता दी है। बाघेई ने कहा, 'जब भी कोई समझौता हुआ, ईरान ने सद्भावना के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी भी सबसे पहले अपने वादों का उल्लंघन नहीं किया।'

अमेरिका पर चेतावनी

बाघेई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करेगा। उनके शब्दों में, 'जब भी दूसरे पक्ष ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया, हमने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया। आगे भी हमारा रुख यही रहेगा।'

खामेनेई प्रकरण और न्याय की माँग

बाघेई ने यह भी कहा कि दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के मामले में न्याय की उम्मीद करना ईरानी सरकार का एक गंभीर और मूलभूत सिद्धांत है। उन्होंने कहा, 'सरकार की इस संबंध में स्पष्ट जिम्मेदारी है और विदेश मंत्रालय भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।'

आगे क्या होगा

फ्रांस और ईरान के बीच यह कूटनीतिक तनाव दर्शाता है कि परमाणु वार्ताओं में अभी भी बड़ी खाई बनी हुई है। यह ऐसे समय में है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्य-पूर्व में स्थिरता की दिशा में प्रयासरत है। आने वाले हफ्तों में बहुपक्षीय वार्ताओं की दिशा यह तय करेगी कि ईरान पर प्रतिबंधों का भविष्य क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वीटो शक्ति की याद दिलाना भी है — बिना पेरिस की सहमति के संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध नहीं हट सकते। दूसरी तरफ, तेहरान का एमओयू पर प्रतिशर्त रुख यह संकेत देता है कि ईरान अब केवल परमाणु मुद्दे को अलग-थलग नहीं देखता — वह इसे व्यापक क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया से जोड़ रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि खामेनेई प्रकरण में न्याय की माँग को ईरान ने 'मूलभूत सिद्धांत' बताया है — यह वार्ताओं में एक नई शर्त के रूप में उभर सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रांस ने ईरान पर प्रतिबंध जारी रखने की बात क्यों कही?
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने 13 जुलाई को कहा कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का पूरी तरह त्याग नहीं करता, तब तक प्रतिबंधों में राहत नहीं दी जाएगी। फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति रखता है, इसलिए उसकी सहमति के बिना प्रतिबंध हटाना संभव नहीं।
ईरान ने अमेरिका को किस बात की चेतावनी दी?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि यदि अमेरिका युद्ध समाप्त करने संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तो ईरान भी अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ईरान का पुराना और स्थायी रुख रहा है।
ईरान परमाणु वार्ताओं में फ्रांस की भूमिका क्या है?
फ्रांस ईरान के परमाणु मुद्दे पर होने वाली बहुपक्षीय वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में उसके पास वीटो का अधिकार है, जो उसे प्रतिबंध हटाने या बनाए रखने की प्रक्रिया में निर्णायक स्थिति में रखता है।
अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के मामले में ईरान का क्या रुख है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बाघेई ने कहा कि दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के मामले में न्याय की माँग ईरानी सरकार का एक गंभीर और मूलभूत सिद्धांत है। विदेश मंत्रालय को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और इसका महत्व क्यों है?
कथित तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में युद्धविराम और क्षेत्रीय शांति से संबंधित प्रतिबद्धताएँ शामिल बताई जाती हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका इन प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है, तो वह भी इस समझौते का पालन नहीं करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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