स्मॉल बिजनेस क्रेडिट पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 26 में 13.4% बढ़कर ₹49.2 लाख करोड़ पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
भारत का स्मॉल बिजनेस क्रेडिट पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 13.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹49.2 लाख करोड़ पर पहुँच गया है — यह आँकड़ा 31 मार्च 2026 तक का है। क्रेडिट ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की संयुक्त रिपोर्ट 'सीआरआईएफ–सिडबी स्मॉल बिजनेस स्पॉटलाइट' के चौथे संस्करण में यह जानकारी सामने आई है, जिसे 13 जुलाई 2026 को जारी किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक सक्रिय ऋणों की कुल संख्या 7.5 करोड़ तक पहुँच गई। इस विस्तार में एकल-स्वामित्व वाले छोटे व्यापार — अर्थात केवल एक व्यक्ति द्वारा संचालित इकाइयाँ — की भूमिका सबसे अहम रही है। ये इकाइयाँ कुल पोर्टफोलियो में 80 प्रतिशत और सक्रिय ऋणों में 87 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार एमएसएमई क्षेत्र को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ने के लिए लगातार नीतिगत प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ऋण प्लेटफॉर्म और जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी ने छोटे उद्यमियों तक बैंकिंग पहुँच को सुगम बनाया है।
उत्पाद-वार विश्लेषण
समेकित पोर्टफोलियो में लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (LAP) सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है, जिसकी हिस्सेदारी मार्च 2025 के 25.5 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 में 27.1 प्रतिशत हो गई। इसके बाद बिजनेस लोन (24.8 प्रतिशत) और वर्किंग कैपिटल उत्पाद (22.8 प्रतिशत) का स्थान है।
LAP की बढ़ती हिस्सेदारी एमएसएमई क्षेत्र में सुरक्षित (सिक्योर्ड) ऋण की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। आलोचकों का कहना है कि संपत्ति-आधारित ऋण पर अत्यधिक निर्भरता उन सूक्ष्म उद्यमों को बाहर रख सकती है जिनके पास गिरवी रखने योग्य संपत्ति नहीं है।
राज्य-वार प्रदर्शन
राष्ट्रीय स्तर पर, शीर्ष 10 राज्यों की पॉइंट ऑफ सेल (POS) में 72 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो छोटे ऋण के भौगोलिक केंद्रण को दर्शाती है। राज्य-वार ग्रोथ में उत्तर प्रदेश ने 18.5 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश ने 16.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की — दोनों राष्ट्रीय औसत से ऊपर।
तमिलनाडु एक परिपक्व और सुदृढ़ बाज़ार के रूप में उभरा है, जहाँ पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग सालाना 11.6 प्रतिशत बढ़कर ₹4.6 लाख करोड़ पहुँच गया और साथ ही परिसंपत्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) में भी सुधार दर्ज किया गया।
एंटरप्राइज टर्म लोन और मैन्युफैक्चरिंग
एंटरप्राइज टर्म लोन की वृद्धि दर सालाना 4.7 प्रतिशत तक सीमित रही — जो समग्र पोर्टफोलियो वृद्धि से काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, इस श्रेणी में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 31.3 प्रतिशत था, जबकि सर्विस और ट्रेडिंग का संयुक्त योगदान 47.6 प्रतिशत रहा।
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की ग्रोथ मुख्यतः प्रमुख औद्योगिक जिलों — बेंगलुरु, जयपुर, पुणे और राजकोट — तक केंद्रित रही। यह एकाग्रता इस बात का संकेत है कि एमएसएमई तकनीकी उन्नयन, सस्टेनेबिलिटी पहल और क्षमता विस्तार के लिए ऋणदाताओं के सामने अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, छोटे व्यवसायों की ऋण माँग में यह तेज़ी आने वाले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में जहाँ डिजिटल ऋण पहुँच तेज़ी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटरप्राइज टर्म लोन की धीमी वृद्धि दर ऋणदाताओं के लिए एक संकेत है कि दीर्घकालिक पूँजी उत्पादों में नवाचार की आवश्यकता है।