भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो ₹170.2 लाख करोड़ पार, गोल्ड लोन में 50.4% की उछाल
सारांश
मुख्य बातें
भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो मार्च 2026 तक बढ़कर ₹170.2 लाख करोड़ पर पहुँच गया है, जो सालाना आधार पर 16.6 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 20 मई को जारी सीआरआईएफ हाई मार्क की रिपोर्ट के अनुसार, इस विस्तार की मुख्य चालक शक्ति गोल्ड लोन, पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में दर्ज की गई तीव्र वृद्धि रही है।
गोल्ड लोन में ऐतिहासिक उछाल
रिपोर्ट में सबसे उल्लेखनीय तथ्य गोल्ड लोन सेगमेंट से सामने आया है। कुल बकाया गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹18.6 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जिसमें सालाना आधार पर 50.4 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज हुई। यह ऐसे समय में आया है जब सोने की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं और अर्ध-शहरी व ग्रामीण उधारकर्ता सुरक्षित ऋण विकल्पों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं।
उपभोग ऋण और अन्य खंडों का प्रदर्शन
उपभोग ऋणों का कुल पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 15.3 प्रतिशत बढ़कर ₹118.6 लाख करोड़ हो गया। पर्सनल लोन में सालाना 12.9 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 20.8 प्रतिशत की वृद्धि रही। ऑटो लोन और दो-पहिया वाहन ऋण में क्रमशः 13.9 प्रतिशत और 15.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ, हालाँकि त्योहारी माँग के बाद इन दोनों श्रेणियों में तिमाही आधार पर कुछ नरमी भी देखी गई।
गृह ऋण स्थिर, क्रेडिट कार्ड सुस्त
गृह ऋण खंड में स्थिर गति बनी रही — बकाया पोर्टफोलियो ₹44.4 लाख करोड़ रहा, जिसमें सालाना 9.4 प्रतिशत और तिमाही 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। टिकट आकार में बढ़ोतरी इस स्थिरता का प्रमुख कारण बताई गई है। दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड सेगमेंट का प्रदर्शन सुस्त रहा — बकाया राशि सालाना आधार पर लगभग स्थिर रही और तिमाही आधार पर नकारात्मक रुझान दिखा।
परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, वृद्धि के साथ-साथ पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। अधिकांश खंडों में चूक (डिफ़ॉल्ट) का स्तर घटा है, जो यह संकेत देता है कि विस्तार केवल मात्रात्मक नहीं, बल्कि गुणात्मक भी है। सुरक्षित ऋण खंडों की ओर निरंतर रुझान और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती माँग भी रिपोर्ट में रेखांकित की गई है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाज़ार में विस्तार
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि खुदरा ऋण वृद्धि अब तेज़ी से सुरक्षित ऋण की ओर केंद्रित हो रही है और अर्ध-शहरी तथा ग्रामीण बाज़ारों में इसकी पहुँच लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह प्रवृत्ति वित्तीय समावेशन के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है। आगे आने वाली तिमाहियों में ग्रामीण माँग और सोने की कीमतों की दिशा इस पोर्टफोलियो की गति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।