भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो ₹170.2 लाख करोड़ पार, गोल्ड लोन में 50.4% की उछाल

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भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो ₹170.2 लाख करोड़ पार, गोल्ड लोन में 50.4% की उछाल

सारांश

भारत का खुदरा ऋण बाज़ार मार्च 2026 में ₹170.2 लाख करोड़ के नए शिखर पर पहुँचा। सबसे बड़ी छलाँग गोल्ड लोन की रही — 50.4% सालाना वृद्धि के साथ। सुरक्षित ऋण और ग्रामीण पहुँच का बढ़ता रुझान भारतीय ऋण बाज़ार की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

मुख्य बातें

भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो मार्च 2026 तक ₹170.2 लाख करोड़ पर पहुँचा, सालाना वृद्धि 16.6% ।
गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹18.6 लाख करोड़ — सालाना आधार पर 50.4% की उछाल, सभी खंडों में सर्वाधिक।
उपभोग ऋण ₹118.6 लाख करोड़ तक पहुँचा, सालाना 15.3% वृद्धि।
गृह ऋण पोर्टफोलियो ₹44.4 लाख करोड़ , सालाना 9.4% की स्थिर वृद्धि।
क्रेडिट कार्ड सेगमेंट सुस्त — तिमाही आधार पर नकारात्मक रुझान।
अधिकांश खंडों में डिफ़ॉल्ट स्तर घटा, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार।

भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो मार्च 2026 तक बढ़कर ₹170.2 लाख करोड़ पर पहुँच गया है, जो सालाना आधार पर 16.6 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 20 मई को जारी सीआरआईएफ हाई मार्क की रिपोर्ट के अनुसार, इस विस्तार की मुख्य चालक शक्ति गोल्ड लोन, पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में दर्ज की गई तीव्र वृद्धि रही है।

गोल्ड लोन में ऐतिहासिक उछाल

रिपोर्ट में सबसे उल्लेखनीय तथ्य गोल्ड लोन सेगमेंट से सामने आया है। कुल बकाया गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹18.6 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जिसमें सालाना आधार पर 50.4 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज हुई। यह ऐसे समय में आया है जब सोने की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं और अर्ध-शहरी व ग्रामीण उधारकर्ता सुरक्षित ऋण विकल्पों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं।

उपभोग ऋण और अन्य खंडों का प्रदर्शन

उपभोग ऋणों का कुल पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 15.3 प्रतिशत बढ़कर ₹118.6 लाख करोड़ हो गया। पर्सनल लोन में सालाना 12.9 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 20.8 प्रतिशत की वृद्धि रही। ऑटो लोन और दो-पहिया वाहन ऋण में क्रमशः 13.9 प्रतिशत और 15.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ, हालाँकि त्योहारी माँग के बाद इन दोनों श्रेणियों में तिमाही आधार पर कुछ नरमी भी देखी गई।

गृह ऋण स्थिर, क्रेडिट कार्ड सुस्त

गृह ऋण खंड में स्थिर गति बनी रही — बकाया पोर्टफोलियो ₹44.4 लाख करोड़ रहा, जिसमें सालाना 9.4 प्रतिशत और तिमाही 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। टिकट आकार में बढ़ोतरी इस स्थिरता का प्रमुख कारण बताई गई है। दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड सेगमेंट का प्रदर्शन सुस्त रहा — बकाया राशि सालाना आधार पर लगभग स्थिर रही और तिमाही आधार पर नकारात्मक रुझान दिखा।

परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, वृद्धि के साथ-साथ पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। अधिकांश खंडों में चूक (डिफ़ॉल्ट) का स्तर घटा है, जो यह संकेत देता है कि विस्तार केवल मात्रात्मक नहीं, बल्कि गुणात्मक भी है। सुरक्षित ऋण खंडों की ओर निरंतर रुझान और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती माँग भी रिपोर्ट में रेखांकित की गई है।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाज़ार में विस्तार

रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि खुदरा ऋण वृद्धि अब तेज़ी से सुरक्षित ऋण की ओर केंद्रित हो रही है और अर्ध-शहरी तथा ग्रामीण बाज़ारों में इसकी पहुँच लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह प्रवृत्ति वित्तीय समावेशन के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है। आगे आने वाली तिमाहियों में ग्रामीण माँग और सोने की कीमतों की दिशा इस पोर्टफोलियो की गति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि परिसंपत्ति-मूल्यांकन से प्रेरित है — यानी सोने की कीमत गिरी तो पोर्टफोलियो जोखिम तेज़ी से बढ़ सकता है। क्रेडिट कार्ड की सुस्ती और उपभोक्ता टिकाऊ ऋण की तेज़ी एक साथ यह संकेत देती है कि शहरी मध्यवर्ग असुरक्षित ऋण से दूरी बना रहा है। नियामकों के लिए असली परीक्षा यह है कि ग्रामीण गोल्ड लोन विस्तार के साथ पर्याप्त उधारकर्ता सुरक्षा तंत्र भी सुनिश्चित हो।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो मार्च 2026 में कितना हो गया?
सीआरआईएफ हाई मार्क की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो ₹170.2 लाख करोड़ पर पहुँच गया। यह सालाना आधार पर 16.6% और तिमाही आधार पर 4.6% की वृद्धि दर्शाता है।
गोल्ड लोन में इतनी तेज़ वृद्धि क्यों हुई?
रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन का बकाया पोर्टफोलियो ₹18.6 लाख करोड़ पर पहुँचा, जो सालाना 50.4% की वृद्धि है। यह उछाल मुख्यतः अर्ध-शहरी और ग्रामीण उधारकर्ताओं की सुरक्षित ऋण के प्रति बढ़ती प्राथमिकता और सोने की ऊँची कीमतों से जुड़ी बताई जा रही है।
गृह ऋण बाज़ार का प्रदर्शन कैसा रहा?
गृह ऋण खंड में स्थिर वृद्धि बनी रही — बकाया पोर्टफोलियो ₹44.4 लाख करोड़ रहा, जिसमें सालाना 9.4% और तिमाही 3.4% की वृद्धि दर्ज हुई। टिकट आकार में बढ़ोतरी इस स्थिरता का प्रमुख कारण रही।
क्रेडिट कार्ड सेगमेंट पर रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड का प्रदर्शन सुस्त रहा — बकाया राशि सालाना आधार पर लगभग स्थिर और तिमाही आधार पर नकारात्मक रही। यह अन्य ऋण खंडों की तुलना में स्पष्ट रूप से कमज़ोर प्रदर्शन है।
खुदरा ऋण वृद्धि से परिसंपत्ति गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक, वृद्धि के साथ-साथ अधिकांश खंडों में डिफ़ॉल्ट का स्तर घटा है, जो मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता का संकेत है। सुरक्षित ऋण खंडों की ओर बढ़ता रुझान इस सुधार में सहायक रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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