भारत में गोल्ड लोन का नया मुकाम: रिटेल क्रेडिट में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी
सारांश
Key Takeaways
- गोल्ड लोन अब रिटेल क्रेडिट में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।
- सोने की कीमतों में वृद्धि इसका मुख्य कारण है।
- नॉन-मेट्रो क्षेत्रों में भी गोल्ड लोन की मांग बढ़ रही है।
- गोल्ड लोन अब मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बन रहा है।
- ऑटो लोन सेगमेंट में भी स्थिरता बनी हुई है।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के रिटेल क्रेडिट क्षेत्र में गोल्ड लोन अब सबसे बड़ा सेगमेंट बन चुका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस लोन की कुल मात्रा में हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इसके पीछे की प्रमुख वजह सोने की कीमतों में वृद्धि और सुरक्षित लोन की ओर लोगों का बढ़ता झुकाव है।
ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की औसत राशि में काफी वृद्धि हुई है। दिसंबर 2025 की तिमाही में औसत गोल्ड लोन करीब 1.9 लाख रुपए तक पहुँच गया है, जो इस क्षेत्र में तेजी का संकेत है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर (सीएमआई) जो क्रेडिट बाजार की स्थिति को दर्शाता है, दिसंबर 2025 की तिमाही में बढ़कर 102 हो गया है। यह पिछले साल 97 और सितंबर की तिमाही में 100 था। इससे यह स्पष्ट होता है कि लगातार तीसरी तिमाही में इसमें सुधार देखने को मिला है।
सोने की ऊंची कीमतों ने लोगों को अपने पास मौजूद सोने का उपयोग करके लोन लेने के लिए प्रेरित किया है, जिससे गोल्ड लोन की मांग और वितरण दोनों में तीव्र वृद्धि हुई है।
पहले गोल्ड लोन का प्रमुखता दक्षिण भारत में ज्यादा थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे उत्तर और पश्चिमी राज्यों में भी इसकी तेजी से वृद्धि हो रही है।
इस सेगमेंट में अब विभिन्न प्रकार के ग्राहक भी शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा लोन प्राइम और उससे ऊपर की श्रेणी के ग्राहकों द्वारा लिए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि गोल्ड लोन अब एक मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बन रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारों के बाद और जीएसटी से जुड़े प्रभाव के बाद क्रेडिट की आपूर्ति में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह मौसमी कारणों से है, न कि किसी स्थायी गिरावट का संकेत।
क्रेडिट की मांग खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई है। नॉन-मेट्रो क्षेत्रों का कुल उधारकर्ताओं में हिस्सा बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। वहीं, पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है।
इस बीच, ऑटो लोन सेगमेंट में भी स्थिरता बनी हुई है। खासकर मिड-सेगमेंट वाहनों की बढ़ती मांग के चलते इसमें संतुलित विकास देखा जा रहा है और पिछले साल की तुलना में आपूर्ति में भी वृद्धि हुई है।