भारत के वित्त वर्ष 2026 में क्रेडिट ग्रोथ में 61 प्रतिशत की वृद्धि, रिटेल और एमएसएमई से मिली सहायता: रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- क्रेडिट ग्रोथ में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
- रिटेल और एमएसएमई का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
- डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी हो रही है।
- वाहन लोन सबसे बड़ा ड्राइवर है।
- भविष्य की चुनौतियों के लिए सतर्क रहना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में क्रेडिट ग्रोथ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में कर्ज (लोन) की दर में 61 प्रतिशत का उछाल आया है, जिसमें रिटेल ग्राहकों और एमएसएमई क्षेत्र की मजबूत मांग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
यस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कुल क्रेडिट फ्लो 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए की जमा (डिपॉजिट) के बराबर है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटेल, एमएसएमई और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में मजबूत मांग इस वृद्धि का मुख्य कारण रही है। हालांकि, वित्त वर्ष 2024 से डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी हो रही है, जिससे बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी पर थोड़ा दबाव बना है।
इस कारण क्रेडिट-डिपॉजिट (सी/डी) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जो पिछले 10 वर्षों का सबसे ऊँचा स्तर है।
रिटेल लोन इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान दे रहे हैं। पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है। टैक्स में राहत और जीएसटी से जुड़े लाभों के कारण लोगों की आय में वृद्धि हुई है, जिससे लोन लेने की क्षमता भी बढ़ी है।
इस सेगमेंट में वाहन लोन सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर उभरा है, जिसने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में हाउसिंग लोन को भी पीछे छोड़ दिया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि लोग अब सुरक्षित लोन की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जबकि बिना गारंटी वाले लोन की वृद्धि धीमी हो गई है।
औद्योगिक क्रेडिट में भी सुधार देखने को मिला है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब यह क्षेत्र कुल औद्योगिक कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है।
सरकार की योजनाओं, जैसे क्रेडिट गारंटी स्कीम और एमएसएमई की नई परिभाषा, ने इस वृद्धि को प्रोत्साहित किया है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने इस वर्ष 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया।
हालांकि, रिपोर्ट में भविष्य के लिए कुछ सावधानियाँ भी जताई गई हैं। वित्त वर्ष 2027 में क्रेडिट ग्रोथ धीमी पड़ सकती है, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर एक्सपोर्ट और खाद्य महंगाई आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा, जीएसटी से मिलने वाले लाभों का असर कम होने से भी लोन की मांग पर प्रभाव पड़ सकता है।