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क्या रिटेल लोन के कारण वित्त वर्ष 2026 में बैंक क्रेडिट में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई?

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क्या रिटेल लोन के कारण वित्त वर्ष 2026 में बैंक क्रेडिट में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई?

सारांश

भारत में बैंक कर्ज की वृद्धि का मुख्य कारण रिटेल लोन की बढ़ती मांग है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,95,273 अरब रुपए तक पहुंच गई। यह रिपोर्ट विभिन्न बैंकों की कर्ज वितरण में सुधार और एमएसएमई सेक्टर की स्थिति को भी उजागर करती है।

मुख्य बातें

बैंक कर्ज में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिटेल लोन की मांग का बड़ा योगदान है।
सरकारी बैंकों ने एमएसएमई को कर्ज देने में बढ़त दिखाई है।
ग्रामीण इलाकों में कर्ज की मांग बढ़ रही है।
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में बैंक कर्ज की वृद्धि (बैंक क्रेडिट ग्रोथ) काफी मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों में, यानी नवंबर के अंत तक, कुल बैंक कर्ज 7 प्रतिशत बढ़कर 1,95,273 अरब रुपए पहुँच गया है। इस वृद्धि का मुख्य कारण रिटेल लोन की बढ़ती मांग है।

मंगलवार को जारी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित रिटेल लोन, विशेषकर होम लोन और गोल्ड लोन, नए कर्ज का बड़ा हिस्सा बन रहे हैं। कुल बैंक कर्ज में रिटेल लोन की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक के नए नियमों और सख्त जांच प्रक्रिया के बाद, बिना गारंटी वाले लोन की वृद्धि में कुछ कमी आई है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को मिलने वाला नया कर्ज दोगुना हो गया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और कुल कर्ज में उनकी हिस्सेदारी भी बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर को मिलने वाले नए कर्ज (इन्क्रिमेंटल क्रेडिट) में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 32.5 प्रतिशत हो गई है, जो एक साल पहले 17.7 प्रतिशत थी। इसके साथ ही, कुल बकाया कर्ज में एमएसएमई की हिस्सेदारी भी 174 आधार अंक (1.74 प्रतिशत) बढ़ी है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा मजबूत कर्ज वितरण (डिस्बर्समेंट) है।

सरकारी बैंकों ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी कर्ज देने में बढ़त दिखाई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ग्रामीण इलाकों में कर्ज की मांग बढ़ रही है।

रिसर्च फर्म के अनुसार, बड़े औद्योगिक कर्ज (हाई-टिकट इंडस्ट्रियल लोन) में गिरावट आई है, जिससे पूंजीगत खर्च की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है। हालांकि, वर्किंग कैपिटल की मांग स्थिर बनी हुई है और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को दिया जाने वाला कर्ज नियामकीय सख्ती के बाद अब फिर से लाभप्रदता के संकेत दे रहा है।

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी बैंकों की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है। सितंबर 2025 में ग्रॉस एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घटकर 2.5 प्रतिशत रह गया, जो मार्च 2025 में 2.8 प्रतिशत था।

एसबीआई म्यूचुअल फंड की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 13 से 14 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। मई 2025 में यह 9 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 11.4 प्रतिशत हो गई। वहीं, वित्त वर्ष 2026 में कुल कर्ज 10.5 से 11 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।

फंड हाउस का कहना है कि आने वाले समय में घरेलू कर्ज (हाउसहोल्ड क्रेडिट) की रफ्तार कॉरपोरेट कर्ज से तेज रहने की उम्मीद है। साथ ही, जिन सेक्टरों की मांग कर्ज पर आधारित है और जहां प्रीमियम उत्पादों की मांग बढ़ रही है, वे निकट भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार बनाते हैं। हालांकि, हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि कर्ज वितरण में सुधार से ही दीर्घकालिक विकास संभव है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026 में बैंक क्रेडिट में कितनी वृद्धि हुई?
वित्त वर्ष 2026 में बैंक क्रेडिट में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिटेल लोन की मांग का क्या प्रभाव है?
रिटेल लोन की मांग बैंक क्रेडिट की वृद्धि का मुख्य कारण है।
एमएसएमई को कर्ज कैसे मिल रहा है?
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मजबूत कर्ज वितरण के कारण एमएसएमई को कर्ज में वृद्धि हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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