एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज की मांग स्थिर, लेकिन वित्तीय अंतर मौजूद: रिपोर्ट

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एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज की मांग स्थिर, लेकिन वित्तीय अंतर मौजूद: रिपोर्ट

सारांश

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में कर्ज की मांग में वृद्धि की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत में कर्ज वृद्धि 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

Key Takeaways

  • कर्ज की मांग में वृद्धि की उम्मीद।
  • वित्त वर्ष 2026 में 26 लाख करोड़ रुपये तक कर्ज वृद्धि।
  • एमएसएमई क्षेत्र में वित्त तक पहुँच की समस्या।
  • सरकारी नीतियों का कर्ज पर सकारात्मक प्रभाव।
  • संरचनात्मक कर्ज अंतर का समाधान आवश्यक।

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में कर्ज की मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत की कुल कर्ज वृद्धि लगभग 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है, जो वर्ष दर वर्ष आधार पर करीब 14.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

आईसीआरए लिमिटेड और एसोचैम द्वारा प्रस्तुत एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में कर्ज वृद्धि में थोड़ी कमी के साथ 11.3 से 12 प्रतिशत या लगभग 23.5 से 25 लाख करोड़ रुपये तक का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस कमी का कारण मांग में कमजोरी नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष के ऊंचे आधार के कारण सामान्य स्थिति में वापसी है।

हालांकि, एमएसएमई क्षेत्र में वित्त तक पहुंच की समस्या अभी भी बनी हुई है, जो इस क्षेत्र की विकास को सीमित कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल बैंक कर्ज में वृद्धि स्थिर रहने की उम्मीद है, जबकि एमएसएमई और रिटेल क्षेत्र इस वृद्धि के मुख्य प्रेरक होंगे।

एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि एमएसएमई को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिले और आर्थिक विकास का लाभ सभी क्षेत्रों तक पहुँचे।

आईसीआरए लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक के. रविचंद्रन ने कहा कि भारत की वित्तीय प्रणाली पहले से ज्यादा मजबूत और स्थिर हुई है, लेकिन बदलती परिस्थितियों में पारंपरिक कर्ज देने की दृष्टि से बदलाव की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार, कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति और औपचारिकता बढ़ने के कारण कर्ज की मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है।

एमएसएमई क्षेत्र सप्लाई चेन के विस्तार और छोटे कारोबारों के औपचारिक प्रणाली में जुड़ने के कारण अर्थव्यवस्था की वृद्धि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

रिपोर्ट के अनुसार, औपचारिकता से जुड़ी पहलों, बेहतर वर्गीकरण और सरकारी नीतियों के कारण कर्ज देने वाली संस्थाओं को उधार लेने वालों का आकलन करना आसान हुआ है, जिससे कर्ज की पहुँच में वृद्धि हुई है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एमएसएमई क्षेत्र में अभी भी एक बड़ा संरचनात्मक कर्ज अंतर बना हुआ है। विभिन्न जोखिम प्रोफाइल, पर्याप्त गारंटी की कमी और जानकारी की पारदर्शिता की कमी के कारण छोटे कारोबारों को समय पर और पर्याप्त कर्ज मिलना कठिन हो रहा है, विशेषकर उन उद्यमों के लिए जो पूरी तरह से औपचारिक प्रणाली में शामिल नहीं हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि एमएसएमई क्षेत्र की विकास संभावनाएँ उज्ज्वल हैं, लेकिन इसके समक्ष मौजूद वित्तीय अंतर को संबोधित करना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल आर्थिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि समावेशी विकास के लिए भी आवश्यक है।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज की मांग क्यों बढ़ रही है?
आर्थिक गतिविधियों में सुधार, कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति और औपचारिकता बढ़ने के कारण एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज की मांग बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कर्ज वृद्धि का अनुमान क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कर्ज वृद्धि लगभग 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है।
एमएसएमई क्षेत्र में वित्त तक पहुँच की समस्या क्यों है?
एमएसएमई क्षेत्र में विभिन्न जोखिम प्रोफाइल और जानकारी की पारदर्शिता की कमी के कारण वित्त तक पहुँच में कठिनाई होती है।
सरकारी नीतियों का प्रभाव क्या है?
सरकारी नीतियाँ औपचारिकता बढ़ाने और कर्ज देने वाली संस्थाओं के लिए उधार लेने वालों का आकलन आसान बनाने में मदद कर रही हैं।
कर्ज अंतर को कैसे हल किया जा सकता है?
कर्ज अंतर को हल करने के लिए बेहतर गारंटी और पारदर्शिता की आवश्यकता है, विशेषकर उन छोटे उद्यमों के लिए जो पूरी तरह से औपचारिक प्रणाली में शामिल नहीं हैं।
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