वैश्विक चुनौतियों के बीच एमएसएमई क्षेत्र में विश्वास में वृद्धि: सिडबी का सर्वेक्षण

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वैश्विक चुनौतियों के बीच एमएसएमई क्षेत्र में विश्वास में वृद्धि: सिडबी का सर्वेक्षण

सारांश

सिडबी के हालिया सर्वेक्षण में एमएसएमई क्षेत्र में बढ़ते विश्वास को दर्शाया गया है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के लिए एम-बीसीआई में सुधार हुआ है, जो घरेलू आर्थिक माहौल की मजबूती को इंगित करता है। जानिए कैसे ये आंकड़े एमएसएमई के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

एमएसएमई क्षेत्र में विश्वास में वृद्धि कार्यशील पूंजी और वित्तीय उपलब्धता में सुधार नए श्रम संहिता का औपचारिकता पर प्रभाव एम-बीसीआई का सकारात्मक अनुमान नीतिगत सहायता योजनाओं में बढ़ती रुचि

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सिडबी (एसआईडीबीआई) द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आउटलुक सर्वे में बताया गया है कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए एमएसएमई बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (एम-बीसीआई) में साल-दर-साल सुधार हुआ है। वैश्विक जोखिमों के बावजूद, घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल ने मजबूती से समर्थन प्रदान किया है।

सर्वेक्षण के अनुसार, कार्यशील पूंजी और कुल वित्तीय उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बिक्री और समग्र व्यापारिक माहौल में भी सुधार हुआ है, जो मजबूत मांग और स्थिर परिचालन स्थिति को दर्शाता है। सालाना आधार पर सकारात्मक भावनाओं का मुख्य कारण अनुकूल घरेलू आर्थिक माहौल रहा, भले ही बाहरी चुनौतियाँ बनी रहीं।

सर्वेक्षण से यह भी स्पष्ट हुआ है कि एमएसएमई निर्यातकों ने आरबीआई के ट्रेड रिलीफ उपायों और क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसई) जैसी नीतियों में रुचि दिखाई है। 43 प्रतिशत उत्तरदाता आरबीआई की ट्रेड रिलीफ योजना का लाभ लेने की योजना बना रहे हैं, 46 प्रतिशत सीजीएसई अपनाने का इरादा रखते हैं, जबकि लगभग 37 प्रतिशत दोनों विकल्पों का उपयोग करना चाहेंगे।

स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने अपने "एमएसएमई आउटलुक सर्वे" का पांचवां संस्करण जारी किया है। यह एक तिमाही प्रकाशन है, जो भारत के एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा व्यापारिक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी प्रदान करता है।

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि नए श्रम संहिता (लेबर कोड) एमएसएमई को अपने संचालन ढांचे को मजबूत करने और औपचारिकता को बढ़ावा देने का अवसर देते हैं। सर्वेक्षण में शामिल 34-36 प्रतिशत कंपनियों को अल्पकाल में अनुपालन लागत बढ़ने की आशंका है, वहीं कई कंपनियों ने सुझाव दिया है कि स्पष्ट दिशानिर्देश (16-21 प्रतिशत) और बेहतर प्रशिक्षण तथा जागरूकता पहल (17-19 प्रतिशत) इस बदलाव को आसान बना सकती हैं। साथ ही, सफल और सहज क्रियान्वयन के लिए क्षमता निर्माण आवश्यक होगा।

एमएसएमई का भरोसा तिमाही आधार पर भी स्थिर बना हुआ है, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आने से विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक दृष्टिकोण देखा गया है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए समग्र एम-बीसीआई 60.8 आंका गया है। सेक्टर के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग में सुधार हुआ है और इसका एम-बीसीआई 62.9 से बढ़कर 64.1 हो गया, जबकि ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर में थोड़ी नरमी देखी गई।

समग्र एम-बीईआई (बिजनेस एक्सपेक्टेशन इंडेक्स) भी सकारात्मक संकेत दे रहा है। अगले तिमाही में यह 63.7 और एक साल बाद (अक्टूबर-दिसंबर 2026) 65.0 तक पहुँचने का अनुमान है, जो निकट भविष्य में आशावादी कारोबारी माहौल को दर्शाता है।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बिक्री को लेकर भरोसा मजबूत रहा है और भविष्य में बिक्री बढ़ने की उम्मीद भी ज्यादा है। हालांकि, सर्विस और ट्रेडिंग सेक्टर में मौजूदा तिमाही में बिक्री भावनाओं में खास सुधार नहीं दिखा, लेकिन आने वाले समय के लिए उत्तरदाता आशावादी बने हुए हैं।

मौजूदा तिमाही में कार्यशील पूंजी की उपलब्धता को लेकर आशावाद काफी बढ़ा है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सकारात्मक रुख दिखाया है, जो पिछली तिमाही के 35 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह, कुल वित्तीय उपलब्धता को लेकर सकारात्मक भावना 47 प्रतिशत तक पहुँच गई है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि सर्विस सेक्टर में वित्त से जुड़े संकेतकों पर भावनाओं में मामूली सुधार हुआ है। वहीं, ट्रेडिंग सेक्टर में कार्यशील पूंजी को लेकर भावनाएं कुछ कमजोर पड़ीं, लेकिन कुल वित्तीय उपलब्धता को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

घरेलू माहौल ने छोटे व्यवसायों के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे नीतिगत समर्थन और बाजार की मांग एमएसएमई के विकास को प्रभावित कर सकती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वेक्षण में क्या प्रमुख निष्कर्ष मिले हैं?
सर्वेक्षण में कार्यशील पूंजी और वित्तीय उपलब्धता में सुधार, साथ ही निर्यातकों की नीतिगत सहायता योजनाओं में रुचि देखी गई है।
सर्वेक्षण का महत्व क्या है?
यह सर्वेक्षण एमएसएमई क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को समझने में मदद करता है, जिससे नीति निर्माण में सहायता मिलती है।
क्या एमएसएमई को नए श्रम संहिताओं से कोई लाभ होगा?
हाँ, नए श्रम संहिताएँ एमएसएमई को अपने संचालन को औपचारिक बनाने और बेहतर कार्यशीलता में सहायता करेंगी।
अगले तिमाही के लिए एम-बीसीआई का क्या अनुमान है?
अगले तिमाही के लिए एम-बीसीआई 63.7 होने का अनुमान है, जो सकारात्मक व्यापारिक माहौल को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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