भाषिणी-नीति आयोग साझेदारी: अब अपनी भाषा में मिलेंगी सरकारी सेवाएं, मल्टीलिंगुअल एआई से बदलेगा शासन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मल्टीलिंगुअल और वॉयस-फर्स्ट एआई तकनीक के ज़रिए सार्वजनिक सेवाओं को आम नागरिक की भाषा तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) और नीति आयोग ने 'भाषिणी फॉर सेवा/संचालन' पहल के तहत एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का लक्ष्य शासन को समावेशी बनाना और नागरिकों को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी व सेवाएं उपलब्ध कराना है।
साझेदारी का उद्देश्य और दायरा
इस सहयोग के तहत भाषिणी के मल्टीलिंगुअल एआई इकोसिस्टम को नीति आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में एकीकृत किया जाएगा। भाषा अनुवाद एपीआई और रेफरेंस एप्लीकेशन के माध्यम से नागरिकों को बहुभाषी पहुँच सुनिश्चित होगी। सरकारी बयान में कहा गया है कि 'यह साझेदारी नागरिकों को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच दिलाएगी। इससे सरकार और नागरिकों के बीच संवाद मजबूत होगा और सार्वजनिक सेवा वितरण में बहुभाषी संचालन को बढ़ावा मिलेगा।' इसके अलावा भाषा तकनीकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और संचार वर्कफ्लो में भी जोड़ा जाएगा।
'स्मृति': स्वचालित बैठक-मिनट्स और बहुभाषी अनुवाद
इस इकोसिस्टम का एक प्रमुख घटक है 'स्मृति' — यानी सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इनफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस। इसे भाषिणी के साथ मिलकर विकसित किया गया है। 'स्मृति' सरकारी बैठकों के मिनट्स स्वतः तैयार करेगा और उनका बहुभाषी अनुवाद भी करेगा। इससे सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ने और अंतिम व्यक्ति तक शासन पहुँचाने की उम्मीद है।
'नीति तारा' और ज़मीनी स्तर पर डेटा-आधारित कार्रवाई
यह सहयोग नीति आयोग के 'नीति तारा' — यानी टूलकिट फॉर एनालिसिस, रिव्यू एंड एक्शन — पर भी आधारित है, जो डेटा को ज़मीनी स्तर की कार्रवाई में बदलने का काम करता है। अब तक देशभर में 200 से अधिक क्षमता निर्माण सत्र आयोजित हो चुके हैं, जिनके ज़रिए जिलों और ब्लॉकों के 4,000 से अधिक अधिकारियों को डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
भाषाई डेटा संग्रह और वॉयस बॉट विकास
साझेदारी के तहत नीति आयोग के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेफरेंस एप्लीकेशन और वॉयस बॉट भी विकसित किए जाएंगे। विशेष शब्दावली और क्षेत्र-विशेष की ज़रूरतों के अनुसार भाषा तकनीक को और सशक्त किया जाएगा। 'भाषिणी सहयोगी' के माध्यम से 'भाषादान' का उपयोग करके भाषाई डेटा का संग्रह, क्यूरेशन और प्रसार किया जाएगा — इसके लिए नीति आयोग के अधिकारियों और आम नागरिकों से टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो सैंपल देने का आग्रह किया जाएगा।
आगे की राह
यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत में डिजिटल सेवाओं तक भाषाई पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और देश की बड़ी आबादी अभी भी अंग्रेज़ी-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म से वंचित है। अनुवाद मॉडल के लगातार विकास और सुधार के साथ, यह साझेदारी डिजिटल समावेश की दिशा में एक दीर्घकालिक ढाँचा तैयार करने का प्रयास है।