डिजिटल इंडिया भाषिणी और गोवा सरकार ने पणजी में बहुभाषी AI कार्यशाला का आयोजन किया
सारांश
मुख्य बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग और गोवा सरकार ने 21 जुलाई को पणजी में एक राज्य स्तरीय सहभागिता कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भाषा-आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापक रूप से बढ़ावा देना था। इस आयोजन में विशेष रूप से कोंकणी भाषा को डिजिटल शासन के केंद्र में लाने पर ज़ोर दिया गया।
कार्यशाला में किसने भाग लिया
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यशाला में नीति-निर्माता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञ शामिल हुए। यह व्यापक भागीदारी इस बात की संकेत है कि भाषा-आधारित डिजिटल समावेश अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रहा — यह नीतिगत प्राथमिकता बन चुका है।
गौरतलब है कि यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हुई जब केंद्र सरकार देश की 22 अनुसूचित भाषाओं सहित सैकड़ों बोलियों को डिजिटल मंचों पर सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है।
भाषिणी CEO का संदेश
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कार्यशाला में शासन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और नागरिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में भाषिणी के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सरकारों, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञों के बीच मज़बूत सहयोग से कोंकणी सहित क्षेत्रीय भाषाओं के इकोसिस्टम को सुदृढ़ किया जा सकेगा और समावेशी डिजिटल परिवर्तन को गति मिलेगी।
प्रदर्शित तकनीकें और उपकरण
कार्यशाला में भाषिणी ऐप मित्र, भाषिणी मित्र और भाषिणी प्रवक्ता जैसे बहुभाषी AI समाधानों का लाइव प्रदर्शन किया गया। इनमें अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन, टेक्स्ट-टू-स्पीच, ट्रांसलिटरेशन और बहुभाषी API जैसी तकनीकें शामिल थीं, जिन्हें सरकारी और नागरिक सेवाओं के डिजिटल मंचों में एकीकृत किया जा सकता है।
प्रदर्शनों में यह भी दिखाया गया कि भाषिणी किस प्रकार पर्यटन सेवाओं, सार्वजनिक सूचनाओं और डिजिटल मंचों तक निर्बाध बहुभाषी पहुँच सुनिश्चित कर नागरिकों और पर्यटकों दोनों के डिजिटल अनुभव को बेहतर बना सकती है।
कोंकणी इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान
कार्यशाला का एक विशेष सत्र कोंकणी भाषा के डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने पर केंद्रित रहा। इसमें भाषा संबंधी डेटा सेट का विस्तार, AI मॉडल को परिष्कृत करने और गोवा की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नए उपयोग क्षेत्रों की पहचान पर चर्चा हुई। चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि वॉयस-फर्स्ट इकोसिस्टम विकसित होने से भाषा अब सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में बाधा नहीं बनेगी।
आगे की राह
इस कार्यशाला से उभरे सुझाव और सहयोग-ढाँचे गोवा में बहुभाषी AI को तेज़ी से अपनाने की नींव रखेंगे। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है — जो भारत के व्यापक भाषाई डिजिटल समावेश के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।