क्या भारतीय भाषाओं में काम करेंगे आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स?
सारांश
Key Takeaways
- 22 भारतीय भाषाओं पर एआई का विकास हो रहा है।
- भारत की भाषाई विविधता को वैश्विक एआई में शामिल किया जाएगा।
- यह पहल शिक्षा और डिजिटल सेवाओं में सुधार लाएगी।
- स्थानीय डेटा संग्रह और मशीन अनुवाद पर कार्य किया जा रहा है।
- यह बैठक 2026 समिट की तैयारी का एक महत्वपूर्ण चरण है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय भाषाओं से संबंधित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इस पहल के तहत 22 भाषाओं के लिए एआई पर कार्य किया जा रहा है। ये 22 भारतीय भाषाएं देश की लगभग 99 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसका अर्थ यह है कि सिर्फ अंग्रेजी प्रधान वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र ही नहीं होगा, बल्कि भारत की भाषाएं भी इस वैश्विक परिप्रेक्ष्य में शामिल होंगी।
भारतीय भाषाओं से जुड़े गंभीर विषयों पर मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंडिया एआई, असम सरकार और आईआईटी गुवाहाटी द्वारा ह्यूमन कैपिटल वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। यहां दिनभर चली चर्चाओं का मुख्य फोकस क्षेत्रीय भाषाओं की एआई अवसंरचना, राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (एनएलटीएम), एआई-सक्षम शिक्षा और भाषिनी प्लेटफॉर्म के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर रहा।
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर मितेश खापरे ने मिशन की चार वर्षों की यात्रा और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन का लक्ष्य भारत की भाषाई विविधता के लिए मूलभूत एआई और भाषा तकनीकों का विकास करना है।
उन्होंने अंग्रेजी-प्रधान वैश्विक एआई पारिस्थितिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की भाषाओं को इस वैश्विक दौड़ में पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। वहीं आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर रोहित सिन्हा ने पूर्वोत्तर भारत की भाषाई विविधता और उससे जुड़े तकनीकी विकास पर जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि देश की केवल 3 से 4 प्रतिशत आबादी वाला यह क्षेत्र लगभग 200 भाषाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा स्थानीय डेटा संग्रह, मूल वक्ताओं द्वारा एनोटेशन, मशीन अनुवाद, वाणी पहचान और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीकों पर कार्य किया जा रहा है।
डिजिटल इंडिया के भाषिनी डिवीजन की ज्योतिस्मिता देवी ने भाषिनी पहल का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आवाज आधारित, सर्वसमावेशी भाषा तकनीक विकसित करना है।
अंतिम सत्र में आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर अमित अवेकर ने एआई शिक्षा में रिवर्स इंजीनियरिंग दृष्टिकोण पर चर्चा की।
उन्होंने रिवर्स इंजीनियरिंग को ऐसी शिक्षण पद्धति बताया जो छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देती है।
फरवरी में नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 होने वाली है। यह बैठक एक महत्वपूर्ण पूर्व-चरण साबित हुई है।