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भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री में एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 17% बढ़ा, संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार

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भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री में एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 17% बढ़ा, संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार

सारांश

भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री ने दिसंबर 2025 तक एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि उपभोक्ताओं और व्यवसायों से लोन की मांग बढ़ी है, जिससे संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

मुख्य बातें

भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 17% बढ़ा है।
नए लोन की क्रेडिट सोर्सिंग में 36% की वृद्धि हुई है।
संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
सिक्योर्ड लोन में 42% की वृद्धि हुई है।
गोल्ड लोन और होम लोन प्रमुख उत्पाद बने हुए हैं।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट दिसंबर 2025 तक सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 130 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। यह जानकारी हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में प्रस्तुत की गई।

एक्सपीरियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में नए लोन की क्रेडिट सोर्सिंग में पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जब कि पिछले वर्ष यह 7 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में उपभोक्ताओं और व्यवसायों से लोन की लगातार मांग का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यह वृद्धि इस मांग के कारण हुई है।

लोन देने की गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि का कारण लोन स्रोतों में तेज वृद्धि, सिक्योर्ड लोन में इजाफा और एसेट्स गुणवत्ता में सुधार है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एसेट्स गुणवत्ता में सुधार के संकेत मिले हैं, और 30 दिन या उससे अधिक समय से लंबित भुगतानों की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई है।

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सोने, घर और वाहन लोन सहित सिक्योर्ड लोन में 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष के 20 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है। इसमें गोल्ड लोन, विशेष रूप से 3 लाख रुपए से कम के छोटे लोन श्रेणी में, प्रमुख चालक रहा है।

यह परिवर्तन उधारकर्ताओं की एसेट आधारित लोन के प्रति रुचि और क्रेडिट कंपनियों के सुरक्षित लोन पर जोर देने को दर्शाता है।

स्थिर मांग और बढ़ती सामर्थ्य के कारण होम लोन और वाहन लोन में भी स्थिर वृद्धि देखी गई है।

त्योहारी खरीदारी के चलते पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उत्पादों के लिए लोन की मांग में वृद्धि हुई है। हालांकि, क्रेडिट कार्ड जारी करने की गति धीमी रही, जो इस क्षेत्र में उधार लेने और देने में अधिक सतर्कता को दर्शाती है।

एक्सपीरियन इंडिया के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष जैन ने कहा, “भारत का क्रेडिट इकोसिस्टम स्थिर मांग, सुरक्षित लोन के प्रति बढ़ती प्राथमिकता और बेहतर पुनर्भुगतान व्यवहार के कारण मजबूत गति दिखा रहा है। गोल्ड लोन और होम लोन जैसे उत्पाद उधारकर्ताओं को उनकी वित्तीय जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा करने में तेजी से मदद कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक होम लोन और ऑटो लोन में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहे हैं, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उत्पादों के लिए लोन और दोपहिया वाहन लोन जैसे खुदरा केंद्रित क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट कब बढ़ा?
भारत की क्रेडिट इंडस्ट्री का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट दिसंबर 2025 तक 17 प्रतिशत बढ़ा है।
लोन की मांग में वृद्धि का क्या कारण है?
उपभोक्ताओं और व्यवसायों से लोन की निरंतर मांग के कारण लोन की मांग में वृद्धि हुई है।
संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार के संकेत क्या हैं?
30 दिन या उससे अधिक समय से लंबित भुगतानों की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई है, जो संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।
सिक्योर्ड लोन में कितनी वृद्धि हुई है?
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सिक्योर्ड लोन में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
क्रेडिट इंडस्ट्री में कौन से उत्पाद प्रमुख हैं?
गोल्ड लोन और होम लोन जैसे उत्पाद उधारकर्ताओं को उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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