अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते का EU और ब्रिटेन ने किया स्वागत, होर्मुज खोलने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 24 मई को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में प्रगति के संकेतों का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर पूर्ण रोक और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पुनः खोला जाना अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।
वॉन डेर लेयेन का रुख
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'मैं अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में हो रही प्रगति का स्वागत करती हूँ। हमें ऐसा समझौता चाहिए जो वास्तव में तनाव कम करे, होर्मुज को फिर से खोले और बिना किसी शुल्क के पूर्ण नौवहन स्वतंत्रता की गारंटी दे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उसे — चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या अपने सहयोगी समूहों के माध्यम से — क्षेत्र को अस्थिर करने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए।
वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि यूरोप इस संघर्ष के प्रभाव को सीमित करने और एक स्थायी कूटनीतिक समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
ब्रिटिश पीएम स्टार्मर की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अमेरिका-ईरान वार्ता में हो रही प्रगति को 'स्वागत योग्य' बताया। उन्होंने कहा, 'हमें ऐसा समझौता चाहिए जो संघर्ष को समाप्त करे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोले, साथ ही बिना किसी शर्त और बिना किसी प्रतिबंध के नौवहन की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित करे। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।'
स्टार्मर ने यह भी कहा कि उनकी सरकार 'ब्रिटिश जनता को इस संघर्ष से पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक दीर्घकालिक कूटनीतिक समाधान हासिल करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
रूबियो का दावा और ट्रंप के संकेत
यह प्रतिक्रियाएँ ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत दौरे के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है और बहुत जल्द कोई ऐलान किया जा सकता है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी समझौते की संभावना को लेकर इसी तरह के संकेत दिए थे।
होर्मुज की अहमियत
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे होकर दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। इस जलडमरूमध्य पर किसी भी तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और शिपिंग लागत पर पड़ता है, जिससे भारत सहित तमाम आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित होती हैं।
आगे क्या
यूरोप और ब्रिटेन दोनों ने साफ़ कर दिया है कि वे किसी भी समझौते में सक्रिय कूटनीतिक भागीदार बनने को तैयार हैं, बशर्ते समझौता ठोस और सत्यापन-योग्य हो। अब सभी की निगाहें वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं।