ईरान की मदद करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाएगा अमेरिका — रुबियो की सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 3 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि यदि कोई भी देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में सहायता करता है, तो उस देश पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने उन खबरों को निराधार बताया जिनमें कहा जा रहा था कि भारत और ईरान किसी नए व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रुबियो की चेतावनी: मुख्य घटनाक्रम
'द ब्रायन किल्मीड शो' को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरानी राष्ट्रपति और अन्य अधिकारियों के साथ हुई मुलाकातों तथा भारत-ईरान व्यापार समझौते की खबरों के बारे में पूछा गया। रुबियो ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता हो रहा है।" उन्होंने यह भी माना कि दुनिया के कई देश ईरान के साथ संपर्क बनाए रखते हैं और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत फैसले लेते हैं।
रुबियो ने कहा, "हर देश अपनी विदेश नीति खुद बनाता है और दुनिया के कई देश ईरानी सरकार से बातचीत करते हैं। हमने भी कुछ चर्चाओं के दौरान ईरानी सरकार के प्रतिनिधियों से संपर्क किया है।"
ट्रंप प्रशासन की नीति: परमाणु हथियार पर जीरो टॉलरेंस
रुबियो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बिल्कुल साफ है — कोई भी देश ईरान को प्रतिबंधों से बचने में या उसके लिए राजस्व जुटाने में मदद न करे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर कोई देश ऐसा करने का फैसला करता है तो हमें उस पर भी प्रतिबंध लगाने पड़ सकते हैं।" ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। रुबियो ने कहा, "ईरान को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, कम से कम तब तक तो बिल्कुल नहीं जब तक राष्ट्रपति ट्रंप पद पर हैं।"
आर्थिक दबाव के साथ सैन्य विकल्प भी खुला
रुबियो ने बताया कि ईरान पर दबाव बनाने का अमेरिका का प्राथमिक तरीका आर्थिक है, परंतु आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है। उनके अनुसार, "जब तक ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करता रहेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। जरूरत पड़ने पर हम सैन्य कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखते हैं, ताकि न केवल अपनी सुरक्षा कर सकें बल्कि ईरान को दूसरे देशों के लिए खतरा बनने से भी रोक सकें।"
रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान अपने आर्थिक संसाधनों का उपयोग आम नागरिकों की भलाई के बजाय सशस्त्र समूहों को समर्थन देने और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री सुरक्षा
रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमले जारी रखे हुए है, जबकि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया है। उन्होंने स्पष्ट किया, "होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और उस पर ईरान का नियंत्रण नहीं होगा।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है।
भारत-ईरान संबंध और चाबहार बंदरगाह की भूमिका
गौरतलब है कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से राजनयिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास में सहयोग कर रहा है, जो भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। रुबियो की यह चेतावनी भारत की उस संतुलन नीति के लिए एक नई परीक्षा बन सकती है, जिसके तहत वह अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हुए ईरान से भी जुड़ाव रखता है।