ईरानी दूतावास ने रूबियो की 'बंधक' टिप्पणी को खारिज किया, अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया अवैध
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने 24 मई 2025 को एक औपचारिक प्रेस बयान जारी कर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की उस टिप्पणी को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को 'बंधक' बना रहा है। दूतावास ने इस बयान को क्षेत्रीय वास्तविकताओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास करार दिया।
विवाद की जड़: रूबियो का बयान
23 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगट ने एक वक्तव्य जारी किया। उसमें कहा गया कि विदेश मंत्री रूबियो ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को 'बंधक' बनाने की इजाज़त नहीं देगा, और यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद भारत की ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की क्षमता रखते हैं। रूबियो 4 दिवसीय भारत दौरे पर हैं और 23 मई को कोलकाता से यात्रा शुरू कर दिल्ली पहुँचे।
ईरान का पलटवार: प्रतिबंधों को बताया असली 'बंधक'
ईरानी दूतावास ने अपने बयान में तर्क दिया कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को वास्तव में जिस चीज़ ने बंधक बनाया है, वह ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 'अवैध और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध' हैं। दूतावास के अनुसार ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए केवल ईरानी जनता पर आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं। बयान में यह भी कहा गया कि विश्व के प्रमुख तेल एवं ऊर्जा निर्यातकों में से एक होने के नाते ईरान हमेशा भारत सहित सभी देशों को अपने ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहा है।
मानवीय पीड़ा का हवाला
दूतावास ने बयान में पिछले 47 वर्षों में अमेरिकी सरकार द्वारा ईरानी जनता पर लगाए गए प्रतिबंधों का विस्तृत उल्लेख किया। इनमें दवाओं पर पाबंदी और ईरानी मरीजों की जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरणों तक पहुँच को सीमित करना भी शामिल बताया गया। दूतावास के अनुसार इन कदमों के कारण कई निर्दोष मरीजों की जान खतरे में पड़ी और व्यापक मानवीय पीड़ा उत्पन्न हुई।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का स्पष्टीकरण
बयान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ईरान ने अपनी स्थिति दोहराई। दूतावास ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का प्रतिबद्ध सदस्य है और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में संचालित होता है। दूतावास ने यह भी रेखांकित किया कि अब तक IAEA ने ईरान की परमाणु गतिविधियों में किसी भी प्रकार का बदलाव न तो देखा है और न ही उसकी कोई रिपोर्ट दी है।
आगे क्या
रूबियो की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व की स्थिति और ऊर्जा सहयोग पर गंभीर चर्चा हुई है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता की संभावनाएँ फिर से चर्चा में हैं। भारत की ऊर्जा नीति और ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों को देखते हुए, नई दिल्ली के लिए यह कूटनीतिक संतुलन साधना आगे भी चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।