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रुबियो ने खारिज की पाकिस्तान-ईरान परमाणु चेतावनी की रिपोर्ट, कहा- ऐसा कोई संदेश नहीं मिला

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रुबियो ने खारिज की पाकिस्तान-ईरान परमाणु चेतावनी की रिपोर्ट, कहा- ऐसा कोई संदेश नहीं मिला

सारांश

वॉशिंगटन में कूटनीतिक भूचाल के बीच विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन रिपोर्टों पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को ईरान के परमाणु प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। हाउस कमेटी की सुनवाई में रुबियो का दो-टूक जवाब- ऐसा कोई संदेश ट्रंप प्रशासन तक नहीं पहुँचा। ईरान वार्ता विफल हुई तो ‘दूसरे विकल्पों’ पर विचार के संकेत।

मुख्य बातें

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान से कथित ईरान परमाणु चेतावनी संदेश मिलने की रिपोर्ट खारिज की।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सुनवाई में प्रतिनिधि स्कॉट पेरी ने यह सवाल उठाया।
रुबियो बोले- ‘अगर ऐसा संदेश आया होता तो मुझे जानकारी जरूर होती।’ अमेरिका ईरान के साथ नए परमाणु समझौते की कोशिश में, जो ईरानी परमाणु गतिविधियों पर सीमा तय करेगा।
कूटनीति विफल होने पर राष्ट्रपति को ‘दूसरे विकल्पों’ पर विचार करना होगा- रुबियो का संकेत।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को संदेश भेजकर आगाह किया था कि यदि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ा, तो ईरान अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन के पास ऐसा कोई संदेश नहीं पहुँचा है।

कांग्रेस की सुनवाई में उठा सवाल

यह मामला बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सुनवाई के दौरान सामने आया। रिपब्लिकन प्रतिनिधि स्कॉट पेरी ने रुबियो से पूछा कि क्या पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह संदेश दिया था कि तनाव बढ़ने की स्थिति में ईरान परमाणु हथियार होने का प्रदर्शन करने को तैयार है।

रुबियो ने जवाब देते हुए कहा, ‘मैंने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी है और मुझे ऐसे किसी संदेश की जानकारी भी नहीं है।’ जब पेरी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दोबारा सवाल किया, तब भी विदेश मंत्री अपने रुख पर अडिग रहे।

‘अगर ऐसा होता तो जानकारी जरूर होती’

रुबियो ने आगे कहा, ‘अगर ऐसा कोई संदेश भेजा गया होता, तो मुझे हैरानी होती। अगर ऐसा हुआ होता, तो मुझे इसकी जानकारी जरूर होती।’ उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कथित तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर वॉशिंगटन में कूटनीतिक हलचल तेज है।

ईरान वार्ता पर भी उठे सवाल

यह बातचीत उस वक्त हुई जब कांग्रेस में ईरान के साथ चल रही वार्ता को लेकर भी प्रशासन से जवाब-तलब किया जा रहा था। कई महीनों के सैन्य तनाव के बाद अमेरिका एक नए समझौते की कोशिश कर रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर सीमाएँ तय करना है। गौरतलब है कि 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।

‘राष्ट्रपति को दूसरे विकल्पों पर बढ़ना होगा’

पेरी ने यह भी पूछा कि अगर कूटनीतिक बातचीत विफल हो जाती है और ईरान परमाणु क्षमता का प्रदर्शन या परीक्षण करने की धमकी देता है, तो प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या होगी। रुबियो ने कहा कि ऐसा कोई कदम ईरान की मंशा को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को सही साबित करेगा।

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इससे वही साबित होगा जो हम पहले से उनके बारे में मानते रहे हैं।’ विदेश मंत्री ने जोड़ा, ‘मुझे लगता है कि तब राष्ट्रपति को इस परिस्थिति में उपलब्ध दूसरे विकल्पों पर आगे बढ़ना होगा या कम से कम उन पर गंभीरता से विचार करना होगा।’

क्या होगा आगे

आने वाले हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का अगला दौर निर्णायक माना जा रहा है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो क्षेत्रीय समीकरण और तनावपूर्ण हो सकते हैं, जिसका असर पाकिस्तान सहित पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर राजनीतिक रूप से सुविधाजनक भी। इस तरह के ‘बैक-चैनल’ संदेश आमतौर पर विदेश मंत्री तक पहुँचने से पहले NSC या व्हाइट हाउस में रुकते हैं- इसलिए ‘मुझे जानकारी नहीं’ का मतलब ‘ऐसा हुआ ही नहीं’ नहीं होता। असली सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन ईरान वार्ता विफल होने की स्थिति में किन ‘दूसरे विकल्पों’ का संकेत दे रहा है- और क्या पाकिस्तान वाकई इस त्रिकोणीय कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका में आ रहा है। मुख्यधारा की कवरेज खंडन पर रुकी, पर असली कहानी रुबियो के अंतिम वाक्य में छुपी है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने किस रिपोर्ट को खारिज किया है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को संदेश भेजकर चेताया था कि संघर्ष बढ़ने पर ईरान अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है। रुबियो ने कहा कि ऐसा कोई संदेश ट्रंप प्रशासन तक नहीं पहुँचा।
यह सवाल कहाँ और किसने पूछा?
यह सवाल बुधवार को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन प्रतिनिधि स्कॉट पेरी ने उठाया। पेरी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दो बार सवाल किया, लेकिन रुबियो अपने जवाब पर कायम रहे।
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा वार्ता का उद्देश्य क्या है?
अमेरिका ईरान के साथ एक नए समझौते की कोशिश कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर सीमाएँ तय करना है। यह वार्ता कई महीनों के सैन्य तनाव के बाद शुरू हुई है।
अगर वार्ता विफल हुई तो अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?
रुबियो ने संकेत दिया कि वार्ता विफल होने और ईरान द्वारा परमाणु प्रदर्शन की धमकी की स्थिति में राष्ट्रपति को ‘दूसरे विकल्पों’ पर गंभीरता से विचार करना होगा। हालाँकि उन्होंने इन विकल्पों का स्पष्ट ब्यौरा नहीं दिया।
क्या पाकिस्तान ने ईरान को लेकर अमेरिका को कोई आधिकारिक चेतावनी दी है?
रुबियो के बयान के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग को ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस तरह के संदेश का दावा किया गया था, जिसकी पुष्टि अमेरिकी प्रशासन ने नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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