इस्लामाबाद 2.0 पर पाकिस्तान उत्साहित, ईरान ने कहा — 'अभी कोई यात्रा योजना नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका-ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते की खबरों को सकारात्मक संकेत बताया और रविवार को उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद में जल्द ही दूसरे दौर की शांति वार्ता आयोजित हो सकती है। हालाँकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को स्पष्ट किया कि तेहरान की फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक योजना नहीं है।
ईरान का स्पष्ट इनकार
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाघेई ने इस्लामाबाद वार्ता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'वर्तमान में ईरान की पाकिस्तान यात्रा या पाकिस्तानी अधिकारियों के तेहरान दौरे की कोई आधिकारिक योजना नहीं है।' यह बयान पाकिस्तान की उस उम्मीद के ठीक विपरीत है जो शहबाज शरीफ ने जताई थी।
बाघेई ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई सप्ताह से चल रही वार्ताओं के तहत कई मुद्दों पर 'काफी हद तक सहमति' बन चुकी है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि 'फिलहाल कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि किसी समझौते पर हस्ताक्षर जल्द होने वाले हैं।'
अमेरिकी रवैये पर ईरान की टिप्पणी
बाघेई ने अमेरिका के राजनीतिक व्यवहार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के समय में वाशिंगटन का रुख 'कुछ हद तक असंगत और अनिश्चित' दिखाई दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से बातचीत में प्रगति के दावे किए जा रहे थे।
इस्लामाबाद टॉक्स का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस्लामाबाद टॉक्स के तहत पहले दौर की बातचीत 11-12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी में हुई थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची शामिल थे, जबकि अमेरिकी पक्ष की अगुवाई जेडी वेंस ने की थी। वह बैठक तनाव कम करने और संघर्ष विराम पर केंद्रित थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। तब से दोनों पक्षों के बीच सीधी आमने-सामने की बातचीत नहीं हुई है।
रूबियो का बयान और भारत का संदर्भ
इस बीच भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि पाकिस्तानी क्षेत्र से सशस्त्र आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो भारत को निशाना बनाते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर आपत्ति जताई है, तो रूबियो ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर कोई फिक्र नहीं जाहिर की, लेकिन वह हमेशा पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद का मुद्दा उठाता है। रूबियो ने यह भी कहा कि 'अमेरिका हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहा है और आगे भी रहेगा।'
यह स्थिति ऐसे समय में उभरी है जब मध्य पूर्व में कई हफ्तों से जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयासों की गति और दिशा दोनों अनिश्चित बनी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि इस्लामाबाद 2.0 की वार्ता वास्तव में संभव हो पाती है या नहीं।