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इस्लामाबाद 2.0 पर पाकिस्तान उत्साहित, ईरान ने कहा — 'अभी कोई यात्रा योजना नहीं'

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इस्लामाबाद 2.0 पर पाकिस्तान उत्साहित, ईरान ने कहा — 'अभी कोई यात्रा योजना नहीं'

सारांश

पाकिस्तान इस्लामाबाद में दूसरे दौर की अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन ईरान ने साफ कह दिया — अभी कोई यात्रा तय नहीं। पहले दौर की अप्रैल वार्ता विफल रही थी। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने भारत में पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद को खुलकर स्वीकार किया।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में दूसरे दौर की अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की उम्मीद जताई।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा — 'पाकिस्तान यात्रा या तेहरान दौरे की कोई आधिकारिक योजना नहीं।' पहले दौर की वार्ता 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई थी, जिसमें जेडी वेंस और ईरान के अराघची शामिल थे — वार्ता विफल रही।
बाघेई ने माना कि कई मुद्दों पर 'काफी हद तक सहमति' है, लेकिन समझौते पर हस्ताक्षर 'जल्द नहीं' होंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत यात्रा के दौरान पाकिस्तान से संचालित सशस्त्र आतंकवाद को स्वीकार किया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका-ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते की खबरों को सकारात्मक संकेत बताया और रविवार को उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद में जल्द ही दूसरे दौर की शांति वार्ता आयोजित हो सकती है। हालाँकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को स्पष्ट किया कि तेहरान की फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक योजना नहीं है।

ईरान का स्पष्ट इनकार

सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाघेई ने इस्लामाबाद वार्ता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'वर्तमान में ईरान की पाकिस्तान यात्रा या पाकिस्तानी अधिकारियों के तेहरान दौरे की कोई आधिकारिक योजना नहीं है।' यह बयान पाकिस्तान की उस उम्मीद के ठीक विपरीत है जो शहबाज शरीफ ने जताई थी।

बाघेई ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई सप्ताह से चल रही वार्ताओं के तहत कई मुद्दों पर 'काफी हद तक सहमति' बन चुकी है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि 'फिलहाल कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि किसी समझौते पर हस्ताक्षर जल्द होने वाले हैं।'

अमेरिकी रवैये पर ईरान की टिप्पणी

बाघेई ने अमेरिका के राजनीतिक व्यवहार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के समय में वाशिंगटन का रुख 'कुछ हद तक असंगत और अनिश्चित' दिखाई दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से बातचीत में प्रगति के दावे किए जा रहे थे।

इस्लामाबाद टॉक्स का पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इस्लामाबाद टॉक्स के तहत पहले दौर की बातचीत 11-12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी में हुई थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची शामिल थे, जबकि अमेरिकी पक्ष की अगुवाई जेडी वेंस ने की थी। वह बैठक तनाव कम करने और संघर्ष विराम पर केंद्रित थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। तब से दोनों पक्षों के बीच सीधी आमने-सामने की बातचीत नहीं हुई है।

रूबियो का बयान और भारत का संदर्भ

इस बीच भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि पाकिस्तानी क्षेत्र से सशस्त्र आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो भारत को निशाना बनाते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर आपत्ति जताई है, तो रूबियो ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर कोई फिक्र नहीं जाहिर की, लेकिन वह हमेशा पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद का मुद्दा उठाता है। रूबियो ने यह भी कहा कि 'अमेरिका हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहा है और आगे भी रहेगा।'

यह स्थिति ऐसे समय में उभरी है जब मध्य पूर्व में कई हफ्तों से जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयासों की गति और दिशा दोनों अनिश्चित बनी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि इस्लामाबाद 2.0 की वार्ता वास्तव में संभव हो पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे अमेरिका ही आतंकवाद का स्रोत बता रहा है। यह दोहरापन पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक विश्वसनीयता के लिए एक गंभीर प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्लामाबाद टॉक्स क्या है और इसमें कौन शामिल है?
इस्लामाबाद टॉक्स पाकिस्तान की मध्यस्थता में आयोजित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता है। पहला दौर 11-12 अप्रैल को हुआ था जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अराघची और अमेरिका के जेडी वेंस शामिल थे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
ईरान ने इस्लामाबाद में दूसरी वार्ता से क्यों इनकार किया?
ईरानी प्रवक्ता बाघेई ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान यात्रा की कोई आधिकारिक योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का राजनीतिक व्यवहार हाल में 'असंगत और अनिश्चित' रहा है, जो वार्ता की प्रगति को जटिल बनाता है।
क्या अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर सहमति बन रही है?
बाघेई के अनुसार कई मुद्दों पर 'काफी हद तक सहमति' बन चुकी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि समझौते पर हस्ताक्षर जल्द होने वाले हैं।' स्थिति अभी भी अनिश्चित है।
मार्को रूबियो ने भारत यात्रा में पाकिस्तान के बारे में क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत दौरे के दौरान कहा कि पाकिस्तानी क्षेत्र से सशस्त्र आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो भारत को निशाना बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
पाकिस्तान की इस वार्ता में मध्यस्थ भूमिका का क्या महत्व है?
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच तटस्थ मंच प्रदान कर अपनी क्षेत्रीय कूटनीतिक साख बढ़ाना चाहता है। हालाँकि, ईरान की उदासीनता और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद की स्वीकृति इस भूमिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्र प्रेस
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