ईरान ने अमेरिका से बातचीत की संभावना को किया नकार: पाकिस्तान की पहल पर प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं की है।
- पाकिस्तान की पहल में ईरान का कोई योगदान नहीं है।
- अमेरिका की शर्तें अतार्किक हैं।
- ईरान की स्थिति अपनी सुरक्षा पर केंद्रित है।
- ट्रंप के दावों पर ईरान ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।
तेहरान, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष बातचीत से मना कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी कि अब तक दोनों देशों के बीच केवल मध्यस्थों के माध्यम से संवाद हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने बातचीत की पहल की है, जिसमें ईरान शामिल नहीं है।
अर्द्ध सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने उनके हवाले से बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन उसकी द्वारा प्रस्तुत शर्तें अतार्किक हैं। बघाई ने कहा कि ईरान की स्थिति प्रारंभ से ही स्पष्ट रही है, जबकि अमेरिका का रवैया समय-समय पर बदलता रहा है।
ईरान ने यह भी कहा कि उसे अच्छी तरह पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत करने की संभावना पर विचार करेगा। प्रवक्ता ने अमेरिकी कूटनीति पर तंज
पाकिस्तान में हुई बैठकों पर ईरान ने स्पष्ट किया कि यह उनकी अपनी पहल है, लेकिन तेहरान इसमें शामिल नहीं है। देश ने मध्य-पूर्व के अन्य देशों से संघर्ष समाप्त करने की कोशिश करने का आग्रह किया, लेकिन यह भी याद रखने को कहा कि इसकी शुरुआत किसने की थी।
ट्रंप के इस दावे पर कि ईरान, यूएस के प्रस्तावों पर सहमत हो गया है, बघाई ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी जो भी कहें, लेकिन ईरान ने अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका से बातचीत के लिए केवल तीसरे देशों के माध्यम से अनुरोध किया गया था।
बघाई ने कहा कि ईरान की स्थिति स्पष्ट है: हमलों के खिलाफ ईरान की कोशिशें अपनी सुरक्षा को बनाए रखने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दावे भरोसे लायक नहीं हैं। पहले भी बातचीत की आड़ में अमेरिका ने हमले करके हमें धोखा दिया है।
इस बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने भी एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने ट्रंप के बयानों को बाजार की चाल से जोड़ा है। उन्होंने निवेशकों से अपील की है कि वे ट्रंप की बातों पर तुरंत भरोसा न करें। उन्होंने एक्स पर कहा कि जब अमेरिकी बयानों से बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो, तो उसी दिशा में चलने के बजाय विपरीत सोचकर कदम उठाना बेहतर हो सकता है।
गलीबाफ का इशारा ट्रंप के हालिया बयानों की ओर है। जब ट्रंप ने 22 मार्च को कहा कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत और उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले टाल दिए गए हैं। इससे बाजार में राहत आई, अमेरिकी शेयर बाजार चढ़े और तेल की कीमतें गिरीं।
कुछ ही दिनों बाद हालात बदल गए। ट्रंप ने फिर कड़ी टिप्पणी की, इजरायल ने तेहरान पर हमले किए, और सऊदी अरब में ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आईं। इसके बाद बाजार पलट गया। शेयर गिरे और तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं।