इस्लामाबाद वार्ता पर संकट के बादल! क्या पाकिस्तान की राजधानी होगी शांति का गवाह?
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका 'इस्लामाबाद टॉक्स' के दूसरे चरण के लिए तैयार है।
- ईरान ने सीजफायर उल्लंघन के कारण भाग लेने से इंकार किया।
- पाकिस्तान की राजधानी सुरक्षा कारणों से छावनी में बदल गई है।
- अमेरिका की एडवांस टीम सुरक्षा व्यवस्था देखने के लिए पहुंच चुकी है।
- वार्ता की सफलता अब भी संदेह में है।
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अप्रैल की सुबह (अमेरिकी समय के अनुसार) ट्रुथ सोशल के माध्यम से घोषणा की कि 'इस्लामाबाद टॉक्स' के दूसरे चरण के लिए अमेरिका पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने उनके साथ समझौता नहीं किया, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके तुरंत बाद, ईरान ने भी एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया कि सीजफायर उल्लंघन के कारण वे पाकिस्तान में होने वाली वार्ता के दूसरे चरण में भाग लेने के इच्छुक नहीं हैं। इस स्थिति में, पाकिस्तान की राजधानी अब पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो चुकी है। अमेरिका की एक एडवांस टीम सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए वहां पहुंच चुकी है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ये शांति वार्ता सफल हो पाएगी?
इस हां-न के बीच पेच कहां फंसा है, यह देखना आवश्यक है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि तेहरान ने अभी यह तय नहीं किया है कि वे अमेरिका के साथ बातचीत के अगले चरण में भाग लेंगे या नहीं।
उनकी यह टिप्पणी ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के बयान के बाद आई है। उन्होंने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे हुए है, लेकिन फिर से तनाव बढ़ने का खतरा उन्हें परेशान कर रहा है, और इसीलिए वे आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, तेहरान ने इस्लामाबाद टॉक्स के पहले चरण से पहले भी कुछ ऐसा ही कहा था। ईरान ने बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अपनी पूर्व-निर्धारित शर्तें पूरी करने की मांग की थी।
ईरानी नेता ने उस स्थिति को तब भी दोहराया, जब उनका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया था। मामला लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर अटका पड़ा था।
इस बीच, प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने ट्रंप के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि मंगलवार को एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के राजधानी पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि वार्ता होगी या नहीं।
ईरानी मालवाहक जहाज पर कब्जे की घटना ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। ट्रंप ने स्वयं इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी से बचने के प्रयास में एक ईरानी जहाज को निशाना बनाया।
जब तक सब कुछ सामान्य चल रहा था, अमेरिकी नाकेबंदी की घोषणा और फिर ईरान का स्ट्रेट को बंद करने का निर्णय पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया। शुक्रवार को कुछ समय के लिए स्ट्रेट खोला गया, लेकिन फिर स्थिति को बदलते हुए यह कहा गया कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी समाप्त नहीं करता, तब तक समुद्री व्यापार का मार्ग फिर से नहीं खोला जाएगा।
सोमवार को जब अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचने की तैयारी में है, तो तेहरान में एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बघाई ने कहा, “अभी तक, जब तक मैं आपकी सेवा में हूं, हमारे पास बातचीत के अगले दौर की कोई योजना नहीं है, और इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है।” उन्होंने सीजफायर उल्लंघन का भी जिक्र किया।
उन्होंने उन शर्तों का भी उल्लेख किया जो यूरेनियम संवर्धन, होर्मुज और लेबनान पर हमलों से संबंधित थीं। उन्होंने कहा कि यूरेनियम सौंपने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई, वहीं लेबनान में जो किया गया वह स्वीकार्य नहीं था।
गालिबाफ, जो 11-12 अप्रैल को हुई इस्लामाबाद वार्ता का हिस्सा थे, ने फिर से कहा कि तेहरान को वाशिंगटन पर भरोसा नहीं है।
ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, गालिबाफ ने टीवी पर कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। वह किसी भी समय तनाव बढ़ा सकता है।" उन्होंने कहा, "हम वार्ता कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही अपनी आवश्यक तैयारियों में भी जुटे हुए हैं।"
इस बीच, इस्लामाबाद तैयार है, डॉन के अनुसार दूसरे दौर के लिए माहौल तैयार है।
राजधानी में सुरक्षा प्रबंध बहुत सख्त हैं, और खबरें हैं कि सुरक्षा प्रबंध के लिए अमेरिका से एडवांस टीमें रविवार को इस्लामाबाद पहुंच चुकी हैं।
यूएस-ईरान-पाकिस्तान के अपने-अपने दावे हैं और दुनिया भर की नजरें इस पर टिकी हैं। क्या स्थायी सीजफायर का ऐलान होगा या एक और खौफनाक संघर्ष तबाही का सबब बनेगा।