भारतीयों के लिए EB-1 ग्रीन कार्ड जल्द हो सकते हैं बंद, अमेरिकी विदेश विभाग की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर 2026 वीज़ा बुलेटिन में चेतावनी दी है कि भारतीय आवेदकों के लिए रोज़गार-आधारित प्रथम प्राथमिकता (EB-1) ग्रीन कार्ड श्रेणी आने वाले कुछ सप्ताहों में अस्थायी रूप से बंद हो सकती है। इस श्रेणी में आवेदनों की असाधारण रूप से बढ़ी हुई संख्या के कारण 30 सितंबर को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष से पहले ही निर्धारित वीज़ा कोटा पूरी तरह खर्च होने की आशंका जताई गई है।
क्या कहा अमेरिकी विदेश विभाग ने
विदेश विभाग ने अपने बुलेटिन में स्पष्ट किया, 'EB-1 श्रेणी में भारत के लिए उपलब्ध वीज़ा संख्या वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले हफ्तों में इस श्रेणी को अस्थायी रूप से 'अनुपलब्ध' घोषित करना पड़ सकता है।' विभाग ने यह भी कहा कि स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर उचित बदलाव किए जाएंगे।
सितंबर के लिए EB-1 इंडिया की फ़ाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि केवल वे भारतीय आवेदक ही अंतिम कार्रवाई के पात्र हैं जिनकी प्राथमिकता तिथि 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है।
EB-1 श्रेणी में कौन आते हैं
EB-1 रोज़गार-आधारित पहली प्राथमिकता वाली श्रेणी है। इसमें मुख्यतः तीन वर्ग शामिल हैं — असाधारण क्षमता वाले व्यक्ति, उत्कृष्ट प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता, तथा कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एग्ज़ीक्यूटिव और मैनेजर। यह श्रेणी परंपरागत रूप से EB-2 और EB-3 की तुलना में तेज़ मानी जाती रही है, जिससे भारतीय पेशेवरों में इसकी माँग अधिक है।
अन्य श्रेणियों की स्थिति
EB-2 इंडिया — जिसमें उच्च डिग्री वाले पेशेवर और विशेष योग्यता वाले लोग शामिल होते हैं — सितंबर बुलेटिन में 'U' (अनुपलब्ध) दर्शाई गई है। यह श्रेणी अगस्त में भी उपलब्ध नहीं थी।
EB-3 इंडिया की फ़ाइनल एक्शन डेट 1 जनवरी 2014 है — यानी प्रतीक्षा सूची 12 वर्षों से अधिक पुरानी है। तुलनात्मक रूप से, अधिकांश अन्य देशों के लिए यह तारीख 1 सितंबर 2024 है, चीन के लिए 1 जनवरी 2022 और फ़िलीपींस के लिए 1 अगस्त 2023 है।
EB-5 इन्वेस्टर श्रेणी (सामान्य) भी भारत के लिए सितंबर में फ़ाइनल एक्शन हेतु उपलब्ध नहीं है। हालांकि, ग्रामीण परियोजनाओं, अधिक बेरोज़गारी वाले क्षेत्रों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए आरक्षित EB-5 उपश्रेणियाँ सभी देशों के लिए 'करंट' (खुली) बनी हुई हैं।
भारतीय आवेदकों पर असर
यह चेतावनी भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि EB-2 और EB-3 में पहले से ही भारी बैकलॉग है। ऐसे में EB-1 एकमात्र अपेक्षाकृत सुलभ रोज़गार-आधारित मार्ग था। यदि यह श्रेणी भी 'अनुपलब्ध' हो जाती है, तो असाधारण प्रतिभाओं और वरिष्ठ कॉर्पोरेट पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया और लंबी हो जाएगी।
गौरतलब है कि यह स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब अमेरिका में भारतीय तकनीकी पेशेवरों की संख्या और H-1B से EB मार्ग पर निर्भरता दोनों बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वार्षिक देश-वार वीज़ा सीमा की मौजूदा नीति भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देशों के लिए असंगत परिणाम उत्पन्न करती है।
आगे क्या होगा
अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि वित्तीय वर्ष के शेष सप्ताहों में स्थिति की समीक्षा जारी रहेगी। नया वित्तीय वर्ष 1 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसके बाद नए वीज़ा कोटे उपलब्ध होंगे और EB-1 श्रेणी फिर से खुल सकती है। तब तक, भारतीय आवेदकों को अपनी प्राथमिकता तिथि और फ़ाइनल एक्शन डेट की नियमित निगरानी करने की सलाह दी जाती है।