वैश्विक वीजा कार्यक्रमों में भारत शीर्ष पर, H-1B में नंबर-1 और UK-EU में दूसरा स्थान: डील रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत वैश्विक कुशल प्रतिभा निर्यात में अपनी बादशाहत मज़बूत करता जा रहा है। 11 जून 2026 को जारी वर्कफोर्स मैनेजमेंट फर्म डील की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम में सबसे बड़ा स्रोत देश है, जबकि ब्रिटेन के स्किल्ड वर्कर वीजा और यूरोपीय संघ के ब्लू कार्ड कार्यक्रम में दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि वैश्विक भर्ती का मूल कारण प्रतिभा की कमी है, न कि सस्ते श्रम की तलाश।
रिपोर्ट की पृष्ठभूमि और कार्यप्रणाली
यह रिपोर्ट 150 से अधिक देशों में 40,000 से ज़्यादा कंपनियों के भर्ती आँकड़ों पर आधारित है। आँकड़ों के अनुसार, वीजा धारक कर्मचारियों को समान पदों पर कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है — जो इस बात का प्रमाण है कि नियोक्ता दुर्लभ और उच्च-कौशल प्रतिभाओं के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को तैयार हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कई देश अपनी घरेलू श्रम कमी को पूरा करने के लिए वीजा नीतियाँ उदार बना रहे हैं, और भारत इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है।
प्रमुख देशों में वेतन तुलना
अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों का औसत वेतन $1.40 लाख (डॉलर) है, जबकि समान पदों पर अमेरिकी नागरिकों का औसत वेतन $1.30 लाख है। ब्रिटेन में स्किल्ड वर्कर वीजा धारकों की औसत आय 96,000 पाउंड है, जबकि स्थानीय नागरिकों की 87,000 पाउंड। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में गोल्डन वीजा धारकों की औसत आय 6.05 लाख दिरहम और सामान्य रोजगार वीजा धारकों की 4.59 लाख दिरहम है।
भारतीय पेशेवरों के शीर्ष गंतव्य और वृद्धि दर
रिपोर्ट के अनुसार, UAE भारतीय पेशेवरों का सबसे बड़ा वैश्विक गंतव्य बना हुआ है — वर्तमान में UAE की कुल आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। इसके बाद सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा का स्थान है।
भर्ती वृद्धि दर के मामले में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे रहा, जहाँ साल-दर-साल आधार पर 724 प्रतिशत की असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बाद ब्रिटेन में 142 प्रतिशत और अमेरिका में 139 प्रतिशत की वृद्धि रही।
यूरोप में भी भारतीय उपस्थिति बढ़ रही है। जर्मनी की 'अवसर कार्ड' योजना — जो EU से बाहर के कुशल पेशेवरों को बिना नौकरी के प्रस्ताव के देश में प्रवेश की अनुमति देती है — के तहत जारी कुल परमिटों में लगभग एक-तिहाई भारतीयों को मिले हैं।
किन क्षेत्रों में है सबसे ज़्यादा माँग
रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं में भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं की अंतरराष्ट्रीय माँग लगातार बढ़ रही है। डील की अर्थशास्त्री लॉरेन थॉमस ने कहा कि अब प्रतिभाएँ केवल कुछ पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के कई नए बाज़ारों की ओर जा रही हैं।
रिवर्स माइग्रेशन की संभावना
रिपोर्ट में एक उल्लेखनीय संभावना यह भी जताई गई है कि भारत अब एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है, जहाँ विदेशों में प्रशिक्षित और अनुभव प्राप्त पेशेवर घरेलू अवसरों के बढ़ने के कारण वापस लौटने लगें। यदि यह प्रवृत्ति मज़बूत होती है, तो इससे देश की प्रतिभा-पूँजी और आर्थिक क्षमता को और बल मिल सकता है।