8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एच-1बी और ग्रीन कार्ड पर सीनेटर एरिक श्मिट का प्रहार, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है सबसे बड़ा असर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एच-1बी और ग्रीन कार्ड पर सीनेटर एरिक श्मिट का प्रहार, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है सबसे बड़ा असर

सारांश

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने पीईआरएम प्रक्रिया में 20 साल बाद बड़े बदलाव की माँग उठाई है — नियोक्ताओं पर सख्त दस्तावेज़ीकरण और डेटा सार्वजनिक करने का दबाव। USCIS के अनुसार एच-1बी याचिकाओं में 70% हिस्सा भारतीयों का है, इसलिए यह प्रस्ताव सीधे लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स की ग्रीन कार्ड राह को प्रभावित कर सकता है।

मुख्य बातें

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने 8 अगस्त 2026 को कार्यवाहक श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग को पत्र लिखकर पीईआरएम प्रक्रिया में व्यापक सुधार की माँग की।
USCIS के आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत एच-1बी याचिकाओं में 70% भारतीय नागरिकों की थीं।
पीईआरएम के नियम 20 वर्षों से अधिक समय से नहीं बदले — श्मिट ने इन्हें अप्रासंगिक बताया।
प्रस्ताव में नियोक्ताओं पर हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखने, अस्वीकृति की लिखित वजह देने और ऑडिट डेटा सार्वजनिक करने की माँग है।
पत्र में किसी मौजूदा वीजा या आव्रजन स्थिति को तत्काल रद्द करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने 8 अगस्त 2026 को कार्यवाहक श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग को पत्र लिखकर पीईआरएम (प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट) प्रक्रिया में व्यापक सुधार की माँग की है — वही प्रक्रिया जो एच-1बी वीजाधारकों के लिए ग्रीन कार्ड का प्रवेशद्वार मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रस्ताव का सबसे तीखा असर उन भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में स्थायी निवास की राह पर हैं।

क्या है पीईआरएम और क्यों है यह अहम

पीईआरएम वह पहला कानूनी पड़ाव है जिससे कोई अमेरिकी नियोक्ता किसी विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करता है। नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत सभी एच-1बी याचिकाओं में 70 प्रतिशत भारतीय नागरिकों की थीं।

गौरतलब है कि पीईआरएम के मौजूदा नियम 20 वर्षों से अधिक समय से नहीं बदले हैं। गैर-पेशेवर पदों के लिए दो अखबारों में विज्ञापन और राज्य रोज़गार एजेंसी में पंजीकरण अनिवार्य है, जबकि पेशेवर पदों के लिए ऑनलाइन विज्ञापन की कोई अनिवार्यता नहीं है।

सीनेटर के पत्र में क्या माँगें हैं

श्मिट ने अपने पत्र में श्रम विभाग से कई ठोस कदम उठाने को कहा है। उन्होंने लिखा, 'पीईआरएम और एच-1बी प्रोग्राम के दुरुपयोग से कंपनियाँ अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को रख लेती हैं। विभाग को इस दुरुपयोग को रोकना चाहिए और नियमों का असली मकसद बहाल करना चाहिए।'

प्रस्ताव के तहत नियोक्ताओं को हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखना होगा, प्रत्येक अस्वीकृति की लिखित वजह देनी होगी और यह प्रमाणित करना होगा कि पद विदेशी कर्मचारी के लिए पहले से तय नहीं था। इसके अलावा हाल ही में नौकरी गँवा चुके योग्य अमेरिकियों को सूचित करना और उनका साक्षात्कार लेना भी अनिवार्य किया जाए।

श्मिट ने यह भी माँग की कि ऑडिट, संदिग्ध धोखाधड़ी के मामलों और पीईआरएम आवेदकों के ओपीटी (OPT) तथा एच-1बी वीजा के पिछले उपयोग का डेटा सार्वजनिक किया जाए।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर संभावित असर

कई भारतीय छात्र ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के ज़रिये एच-1बी नौकरी तक पहुँचते हैं और फिर नियोक्ता-प्रायोजित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भर्ती दस्तावेज़ीकरण की शर्तें सख्त हुईं, तो नियोक्ताओं पर अनुपालन का बोझ बढ़ेगा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में जाँच और कड़ी होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब पहले से ही जटिल मानी जाने वाली स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया में भारतीय आवेदकों की प्रतीक्षा सूची वर्षों लंबी है। आलोचकों का कहना है कि अखबारों का प्रचलन घटने और ऑनलाइन आवेदन आम होने के बावजूद पुराने नियम नियोक्ताओं को नौकरियाँ अमेरिकियों से छिपाने का मौका देते हैं।

क्या होगा आगे

यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि श्मिट के पत्र में किसी वीजा, आवेदन या मौजूदा आव्रजन स्थिति को तत्काल रद्द करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पीईआरएम और एच-1बी अलग-अलग कार्यक्रम हैं — एच-1बी विशेष पेशों में अस्थायी नौकरी की अनुमति देता है, जबकि पीईआरएम स्थायी निवास की राह है। अंतिम असर इस पर निर्भर करेगा कि श्रम विभाग इन प्रस्तावों को किस हद तक अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कोई तत्काल नियम परिवर्तन नहीं — फिर भी यह उस राजनीतिक माहौल की नब्ज़ पकड़ता है जिसमें एच-1बी कार्यक्रम पर द्विदलीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। असली सवाल यह है कि क्या श्रम विभाग इन प्रस्तावों को नियामक अधिसूचना में बदलेगा — और यदि हाँ, तो उस प्रक्रिया में भारतीय आवेदकों की पहले से ही दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची और कितनी लंबी हो जाएगी। मुख्यधारा की कवरेज इस पत्र को महज एक राजनीतिक बयान की तरह पेश कर रही है, लेकिन पीईआरएम दस्तावेज़ीकरण में कोई भी कड़ाई नियोक्ताओं की स्पॉन्सरशिप की इच्छाशक्ति को सीधे प्रभावित करती है — और यही वह बिंदु है जहाँ लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स का भविष्य टिका है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीईआरएम प्रक्रिया क्या है और यह एच-1बी से कैसे जुड़ी है?
पीईआरएम (प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट) वह पहला कानूनी चरण है जिसके ज़रिये कोई अमेरिकी नियोक्ता किसी विदेशी कर्मचारी के लिए रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करता है। एच-1बी अस्थायी कार्य वीजा है, जबकि पीईआरएम स्थायी निवास की राह का पहला पड़ाव है।
सीनेटर एरिक श्मिट ने पीईआरएम में क्या बदलाव माँगे हैं?
श्मिट ने श्रम विभाग से माँग की है कि नियोक्ता हर अमेरिकी आवेदक का रिकॉर्ड रखें, प्रत्येक अस्वीकृति की लिखित वजह दें, ऑडिट और संदिग्ध धोखाधड़ी का डेटा सार्वजनिक करें और यह प्रमाणित करें कि पद विदेशी कर्मचारी के लिए पहले से तय नहीं था। पेशेवर पदों के लिए ऑनलाइन विज्ञापन अनिवार्य करने की भी माँग है।
इस प्रस्ताव का भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ सकता है?
USCIS के आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत एच-1बी याचिकाओं में 70% भारतीय नागरिकों की थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त दस्तावेज़ीकरण से नियोक्ताओं का अनुपालन बोझ बढ़ेगा, जिससे ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप की प्रक्रिया और लंबी तथा जटिल हो सकती है।
क्या इस पत्र से किसी मौजूदा वीजा या ग्रीन कार्ड आवेदन पर तत्काल असर पड़ेगा?
नहीं। श्मिट के पत्र में किसी भी मौजूदा वीजा, आवेदन या आव्रजन स्थिति को तत्काल रद्द करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि श्रम विभाग इन सिफारिशों को किस हद तक नीति में बदलता है।
पीईआरएम के नियम आखिरी बार कब बदले थे?
सीनेटर श्मिट के अनुसार पीईआरएम के नियम 20 वर्षों से अधिक समय से नहीं बदले हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अखबारों का प्रचलन घटने और ऑनलाइन आवेदन आम होने के बावजूद पुराने नियम नियोक्ताओं को खानापूर्ति करने की छूट देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले