एच-1बी ग्रेस पीरियड खत्म करने के प्रस्ताव की व्हाइट हाउस समीक्षा पूरी, हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स पर मंडराया संकट
सारांश
मुख्य बातें
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और अन्य विदेशी प्रोफेशनल वीजाधारकों को नौकरी जाने के बाद मिलने वाले 60 दिन के ग्रेस पीरियड को समाप्त करने के प्रस्ताव की व्हाइट हाउस स्तरीय समीक्षा 27 अगस्त 2026 को पूरी कर ली है। आधिकारिक नियामक रिकॉर्ड के अनुसार, इसे 'बदलाव के साथ सहमत' के रूप में दर्ज किया गया है, जिसका अर्थ है कि प्रस्ताव में कुछ संशोधनों के साथ समीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। यह कदम हजारों भारतीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए गहरी अनिश्चितता का कारण बन सकता है।
प्रस्ताव का विवरण और मौजूदा स्थिति
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) का यह प्रस्ताव — जिसका नियामक सूचना नंबर 1615-AD22 है — 6 अगस्त को व्हाइट हाउस के सूचना और नियामक मामलों के कार्यालय (OIRA) को सौंपा गया था। इसे अमेरिकी नागरिकता एवं आप्रवासन सेवाएँ (USCIS) तैयार कर रही है। नियामक रिकॉर्ड में इसे 'आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं' और बिना किसी कानूनी समय-सीमा वाला प्रस्तावित नियम बताया गया है।
गौरतलब है कि यह प्रस्ताव अभी तक फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नहीं हुआ है और इसकी पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए फिलहाल 60 दिन की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, अगला चरण प्रस्तावित नियम को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित करना होगा, जिसके बाद जनता की राय (पब्लिक कमेंट्स) के लिए एक निर्धारित समय-सीमा दी जाएगी। DHS को जनता की टिप्पणियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम जारी करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।
मौजूदा नियम और प्रभावित वर्ग
मौजूदा व्यवस्था के तहत एच-1बी, एल-1, ओ-1 और अन्य अस्थायी रोजगार वीजाधारकों को नौकरी जाने के बाद लगातार 60 दिनों तक या उनकी अधिकृत प्रवास अवधि समाप्त होने तक अमेरिका में रहने की अनुमति होती है। यह नियम जनवरी 2017 में अधिक कुशल अप्रवासी और गैर-अप्रवासी कर्मचारियों से जुड़े व्यापक नियामक ढाँचे के तहत लागू हुआ था। इस अवधि में प्रभावित कर्मचारी नया स्पॉन्सर नियोक्ता खोज सकते हैं, वीजा श्रेणी बदल सकते हैं या स्वदेश वापसी की तैयारी कर सकते हैं।
भारतीय नागरिक एच-1बी वीजा पाने वालों में सबसे बड़ा समूह हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो उन्हें विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है — खासकर वे परिवार जिनके बच्चे अमेरिकी स्कूलों में पढ़ रहे हैं या जिन्होंने दीर्घकालिक आवास की व्यवस्था कर रखी है।
विशेषज्ञ और समुदाय की प्रतिक्रिया
एशियाई अमेरिकियों, मूल हवाईवासियों और प्रशांत द्वीपवासियों पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के पूर्व सदस्य अजय जैन भुटोरिया ने इस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, 'मैं DHS की इस प्रस्तावित नीति की कड़ी निंदा करता हूँ और इसे गलत बताता हूँ। 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करना अमानवीय और अव्यावहारिक है। जब किसी उच्च-कुशल कर्मचारी की नौकरी अचानक चली जाती है, तो 60 दिन का समय पहले से ही बहुत कम होता है। इस सुरक्षा को पूरी तरह से खत्म करने से कानून का पालन करने वाले हजारों लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं बचेगा।'
भुटोरिया ने यह भी बताया कि मार्च 2023 में उन्होंने व्हाइट हाउस के AANHPI सलाहकार आयोग के समक्ष इस समय-सीमा को 60 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने की सिफारिश रखी थी, जिसे सर्वसम्मति से समर्थन मिला था। उन्होंने तर्क दिया कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भर्ती प्रक्रिया में अक्सर कई दौर के साक्षात्कार और वीजा ट्रांसफर के जटिल कागजी कार्य शामिल होते हैं, जिनमें महीनों लग जाते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि 'इस समय-सीमा को पूरी तरह खत्म करने से कुशल भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों को रातों-रात देश छोड़ना पड़ सकता है।' उन्होंने समुदाय संगठनों और व्यापारिक नेताओं से अपील की कि जैसे ही यह नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित हो, वे इसके विरुद्ध अपनी राय दर्ज कराएँ।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव अभी नियम बनने से कई चरण दूर है। फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन, जनता की टिप्पणियों का संग्रह और DHS की अंतिम समीक्षा — ये सभी प्रक्रियाएँ पूरी होनी हैं। इस बीच, प्रभावित वीजाधारकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आप्रवासन वकील से परामर्श लें और नियामक अपडेट पर नज़र रखें। यह मामला आने वाले हफ्तों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और तकनीकी उद्योग के लिए एक प्रमुख नीतिगत मुद्दा बना रहेगा।