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ट्रंप की ग्रीन कार्ड नीति पर सांसद अमी बेरा का हमला, H-1B धारकों और भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा असर

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ट्रंप की ग्रीन कार्ड नीति पर सांसद अमी बेरा का हमला, H-1B धारकों और भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा असर

सारांश

ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड नीति ने लाखों कानूनी प्रवासियों को अमेरिका छोड़ने की कगार पर खड़ा कर दिया है। भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने इसे H-1B धारकों और भारतीय आवेदकों के लिए सीधा खतरा बताते हुए कानूनी चुनौती का समर्थन किया है।

मुख्य बातें

USCIS ने नई नीति के तहत अमेरिका में 'स्थिति समायोजन' को 'असाधारण राहत' घोषित किया — अब अधिकांश आवेदकों को गृह देश लौटकर कांसुलर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सांसद अमी बेरा ने नीति को परिवारों, कामगारों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए 'विघटनकारी और हानिकारक' बताया।
H-1B वीजा धारक और अंतरराष्ट्रीय छात्र इस नीति से सर्वाधिक प्रभावित होंगे।
रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भारतीय नागरिकों का समूह सबसे बड़ा है।
बेरा ने नीति के विरुद्ध कानूनी चुनौती का समर्थन किया और अदालत से रोक लगाने की अपील की।

भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड नीति को परिवारों, कामगारों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए 'विघटनकारी और हानिकारक' करार देते हुए कड़ी आलोचना की है। यह नीति उन लाखों लोगों को प्रभावित करती है जो अमेरिका में कानूनी रूप से रहते हुए स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं — जिनमें H-1B वीजा धारक और अंतरराष्ट्रीय छात्र बड़ी संख्या में शामिल हैं।

नई नीति में क्या बदला

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने एक नीति ज्ञापन जारी किया है, जिसमें अमेरिका के भीतर 'स्थिति समायोजन' (adjustment of status) को एक सामान्य प्रक्रिया के बजाय 'असाधारण राहत' के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत आव्रजन अधिकारियों को 'मामले-दर-मामले आधार पर' आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया गया है। अधिकांश आवेदकों से अब अपेक्षा की जाएगी कि वे अपने गृह देश लौटकर वहाँ स्थित अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास के माध्यम से कांसुलर प्रक्रिया पूरी करें।

USCIS प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने नीति का बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन 'कानून के मूल उद्देश्य पर लौट रहा है।' उनके अनुसार, अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे और ग्रीन कार्ड के इच्छुक किसी भी विदेशी नागरिक को आवेदन के लिए अपने गृह देश लौटना होगा — केवल असाधारण परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है।

सांसद बेरा की आपत्तियाँ

कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद बेरा ने अपने जारी बयान में कहा, 'मैं ट्रंप प्रशासन के उस विघटनकारी फैसले का कड़ा विरोध करता हूँ, जिसके तहत कई छात्रों, अस्थायी वीजा धारकों और ग्रीन कार्ड चाहने वाले अन्य व्यक्तियों को अपने आवेदनों की प्रक्रिया पूरी होने तक संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़कर अपने गृह देशों में वापस जाना होगा। यह नीति उन परिवारों, कामगारों और नियोक्ताओं के लिए अनावश्यक भय और अनिश्चितता पैदा करती है, जो कानून का पालन कर रहे हैं।'

बेरा ने यह भी कहा कि प्रशासन इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर रहा है कि स्थायी निवास चाहने वाले अनेक व्यक्ति पहले से ही लंबित आव्रजन प्रणाली में अपने मामलों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह नीति विशेष रूप से कानूनी वीजा कार्यक्रमों के ज़रिए काम कर रहे उच्च-कुशल प्रवासियों को नुकसान पहुँचा सकती है।

भारतीय प्रवासियों पर विशेष असर

रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भारतीय नागरिकों का समूह सबसे बड़ा है। इनमें से अधिकांश आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका में रहने के लिए स्थिति समायोजन प्रावधानों पर निर्भर हैं। बेरा ने चेतावनी दी कि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के दौरान इन व्यक्तियों को अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर करना देश को उनके नवाचार, कर योगदान और आर्थिक भागीदारी से वंचित कर देगा।

गौरतलब है कि भारतीय प्रवासियों के पुत्र बेरा ने व्यक्तिगत संदर्भ देते हुए कहा, 'हमारा राष्ट्र उन लोगों से मजबूत होता है जो यहाँ कानूनी रूप से आते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और हमारे समुदायों में योगदान देते हैं।'

प्रशासन का तर्क

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रहने वालों की संख्या में कमी आएगी और आव्रजन प्रणाली पर समग्र दबाव घटेगा। यह नीति ऐसे समय में आई है जब प्रशासन आव्रजन के मोर्चे पर कई अन्य कदम भी उठा रहा है।

आगे क्या होगा

बेरा ने स्पष्ट किया कि वे इस नीति को कानूनी चुनौती देने का समर्थन करते हैं और अदालतों से इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की उम्मीद रखते हैं। आलोचकों का कहना है कि नीति की वैधता को लेकर न्यायालयों में लड़ाई लंबी खिंच सकती है, जिससे आवेदकों की अनिश्चितता और बढ़ेगी। यह मुद्दा अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह उन हज़ारों उच्च-कुशल भारतीय प्रवासियों को संकट में डालती है जो वर्षों से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड की बैकलॉग में भारतीय आवेदकों की संख्या दशकों की प्रतीक्षा को दर्शाती है — यह नीति उस प्रतीक्षा को और जटिल बनाती है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक बयानबाज़ी पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अमेरिकी अदालतें 'असाधारण राहत' की इस पुनर्परिभाषा को वैध मानेंगी — और इस बीच कितने परिवार टूटेंगे।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड नीति क्या है?
USCIS ने एक नीति ज्ञापन जारी कर अमेरिका के भीतर 'स्थिति समायोजन' को 'असाधारण राहत' घोषित किया है। इसके तहत अधिकांश ग्रीन कार्ड आवेदकों को अब अपने गृह देश लौटकर वहाँ के अमेरिकी दूतावास से कांसुलर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इस नीति से भारतीय प्रवासियों पर क्या असर पड़ेगा?
रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भारतीय नागरिकों का समूह सबसे बड़ा है। इनमें से अधिकांश स्थिति समायोजन प्रावधानों पर निर्भर हैं — नई नीति के तहत उन्हें प्रक्रिया के बीच में ही भारत लौटना पड़ सकता है, जिससे नौकरी और परिवार दोनों प्रभावित होंगे।
सांसद अमी बेरा ने इस नीति का विरोध क्यों किया?
बेरा का कहना है कि यह नीति कानून का पालन करने वाले परिवारों, H-1B वीजा धारकों और उच्च-कुशल प्रवासियों के लिए अनावश्यक भय और अनिश्चितता पैदा करती है। उनके अनुसार, इससे अमेरिका शोधकर्ताओं, डॉक्टरों, इंजीनियरों और उद्यमियों के योगदान से वंचित हो जाएगा।
क्या इस नीति को कानूनी चुनौती मिल सकती है?
सांसद बेरा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस नीति को कानूनी चुनौती देने का समर्थन करते हैं और अदालतों से इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की उम्मीद रखते हैं। आलोचकों का कहना है कि 'असाधारण राहत' की यह पुनर्परिभाषा न्यायिक समीक्षा का सामना कर सकती है।
ट्रंप प्रशासन इस नीति को कैसे उचित ठहरा रहा है?
USCIS प्रवक्ता ज़ैक काहलर के अनुसार, प्रशासन 'कानून के मूल उद्देश्य पर लौट रहा है।' प्रशासन का तर्क है कि इससे वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रहने वालों की संख्या घटेगी और आव्रजन प्रणाली पर दबाव कम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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