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ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणियों पर भारतीय-अमेरिकी नेताओं का कड़ा प्रहार, बताया 'शर्मनाक और अज्ञानतापूर्ण'

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ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणियों पर भारतीय-अमेरिकी नेताओं का कड़ा प्रहार, बताया 'शर्मनाक और अज्ञानतापूर्ण'

सारांश

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और भारतीय प्रवासियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने एकजुट होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति और अजय भूटोरिया ने इसे नस्लवादी, आर्थिक और भू-राजनीतिक भूल बताते हुए माफी की मांग की है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर भारत को 'नरक' और भारतीय पेशेवरों को 'लैपटॉप वाले गैंगस्टर' कहा, जिससे भारतीय-अमेरिकी समुदाय में तीव्र आक्रोश फैल गया।
अमी बेरा — अमेरिकी कांग्रेस के सबसे लंबे समय से सेवारत भारतीय-अमेरिकी सदस्य — ने इन टिप्पणियों को 'आपत्तिजनक और अज्ञानतापूर्ण' बताया।
कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप पर 'नस्लवादी बयानबाजी' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और माफी की मांग की।
अजय भूटोरिया ने बताया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय मात्र 1.5% आबादी होते हुए भी 6% अमेरिकी आयकर में योगदान देता है और 10% से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की स्थापना की है।
अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक है और दोनों देश Quad, रक्षा व प्रौद्योगिकी में प्रमुख साझेदार हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की यह बयानबाजी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को कमजोर कर सकती है।

वॉशिंगटन, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में भारतीय मूल के विधायकों और सामुदायिक नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और भारतीय प्रवासियों के खिलाफ की गई विवादास्पद टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। इन नेताओं ने इन बयानों को नस्लवादी, आपत्तिजनक और अमेरिकी-भारत द्विपक्षीय संबंधों के लिए घातक करार दिया है। यह विरोध तब सामने आया जब ट्रंप ने कथित तौर पर भारत को 'नरक' और भारतीय पेशेवरों को 'लैपटॉप वाले गैंगस्टर' जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया।

अमी बेरा का जवाब — 'यह अमेरिकी सपने का अपमान है'

अमेरिकी कांग्रेस में सबसे लंबे समय से सेवारत भारतीय-अमेरिकी सदस्य अमी बेरा ने ट्रंप की टिप्पणियों को "आपत्तिजनक, अज्ञानतापूर्ण और राष्ट्रपति पद की गरिमा के विरुद्ध" बताया। उन्होंने कहा, "भारत से आए प्रवासियों के बेटे के रूप में, मुझे अपनी विरासत पर गर्व है और उस देश पर भी जिसने मेरे परिवार को बेहतर जीवन बनाने का अवसर दिया।"

बेरा ने बताया कि उनकी माँ ने 35 वर्षों तक एक पब्लिक स्कूल शिक्षिका के रूप में सेवा दी और उनके पिता एक इंजीनियर थे। उन्होंने कैलिफ़ोर्निया के सरकारी स्कूलों में किंडरगार्टन से लेकर मेडिकल स्कूल तक पढ़ाई की और आज अमेरिकी कांग्रेस में देश की सेवा कर रहे हैं। उनके अनुसार, "प्रवासी अमेरिका को कमजोर नहीं करते, बल्कि उसे और मजबूत बनाते हैं।"

राजा कृष्णमूर्ति — 'नस्लवादी बयानबाजी शर्मनाक'

कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप पर सीधा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने "नस्लवादी बयानबाजी को बढ़ावा दिया" जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। कृष्णमूर्ति ने कहा, "उनकी भाषा न केवल लाखों भारतीय-अमेरिकियों का अपमान करती है, बल्कि उन मूल्यों को भी कमजोर करती है जिन्होंने अमेरिका को अवसर और नवाचार का देश बनाया।"

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी को मजबूत करना जरूरी है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए विभाजन पैदा करना। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।

अजय भूटोरिया — 'आर्थिक और भू-राजनीतिक भूल'

एशियाई अमेरिकियों पर राष्ट्रपति की सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अजय भूटोरिया ने ट्रंप की टिप्पणियों को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, "ओवल ऑफिस से भारत को 'नरक' और भारतीय पेशेवरों को 'लैपटॉप वाले गैंगस्टर' कहना वास्तविकता का खतरनाक और आपत्तिजनक विकृतिकरण है।"

भूटोरिया ने तथ्यों के साथ पलटवार किया। उन्होंने बताया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जो कुल अमेरिकी आबादी का मात्र 1.5 प्रतिशत है, लगभग 6 प्रतिशत अमेरिकी आयकर में योगदान देता है। इस समुदाय के लोग Alphabet, Microsoft और Adobe जैसी दिग्गज कंपनियों के सीईओ हैं और अमेरिका के 10 प्रतिशत से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की नींव इन्हीं उद्यमियों ने रखी है।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की ताकत और रणनीतिक महत्व

भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका के सबसे समृद्ध और उच्च शिक्षित समूहों में शामिल है। अमेरिका में हर दस में से लगभग एक डॉक्टर भारतीय मूल का है। तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा — तीनों क्षेत्रों में इस समुदाय की भूमिका अपरिहार्य है।

भूटोरिया ने रणनीतिक पहलू को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है और इस प्रवासी समुदाय पर हमला करना केवल सामाजिक गलती नहीं, बल्कि आर्थिक और भू-राजनीतिक भूल भी है।" पिछले दो दशकों में रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्रों में अमेरिका-भारत संबंध गहरे हुए हैं।

व्यापक संदर्भ — ट्रंप की प्रवासी विरोधी नीतियों का पैटर्न

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन के बयानों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को आहत किया हो। H-1B वीजा नीतियों को लेकर भी इस समुदाय में लंबे समय से असंतोष है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की प्रवासी विरोधी बयानबाजी एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जो घरेलू राजनीति में तो काम आती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को नुकसान पहुंचाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बयान भारत-अमेरिका के बीच Quad गठबंधन, रक्षा सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि व्हाइट हाउस इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण देता है या नहीं, और भारत सरकार इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अमेरिका के सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदार भारत के साथ संबंधों को खतरे में डालती है। विडंबना यह है कि जिस समुदाय को ट्रंप निशाना बना रहे हैं, वही समुदाय सिलिकॉन वैली से लेकर अमेरिकी अस्पतालों तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। Quad गठबंधन, रक्षा सौदे और 200 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार — ये सब तब टिकते हैं जब दोनों देशों के बीच विश्वास हो। मुख्यधारा की मीडिया इस कूटनीतिक नुकसान को नजरअंदाज कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन अपनी घरेलू राजनीति के लिए अमेरिका की वैश्विक साझेदारियों को दांव पर लगाने को तैयार है?
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने भारत और भारतीय प्रवासियों के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने कथित तौर पर भारत को 'नरक' और भारतीय पेशेवरों को 'लैपटॉप वाले गैंगस्टर' कहा। इन टिप्पणियों को भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने नस्लवादी और आपत्तिजनक बताया है।
अमी बेरा ने ट्रंप की टिप्पणियों पर क्या कहा?
अमी बेरा ने ट्रंप की टिप्पणियों को 'आपत्तिजनक, अज्ञानतापूर्ण और राष्ट्रपति पद की गरिमा के विरुद्ध' बताया। उन्होंने कहा कि प्रवासी अमेरिका को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाते हैं।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कितना योगदान देता है?
भारतीय-अमेरिकी समुदाय कुल अमेरिकी आबादी का मात्र 1.5 प्रतिशत है, लेकिन लगभग 6 प्रतिशत अमेरिकी आयकर में योगदान देता है। यह समुदाय Alphabet, Microsoft और Adobe जैसी कंपनियों का नेतृत्व करता है और अमेरिका के 10% से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की स्थापना इन्हीं उद्यमियों ने की है।
राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाया?
कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप पर 'नस्लवादी बयानबाजी को बढ़ावा देने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह भाषा लाखों भारतीय-अमेरिकियों का अपमान करती है और अमेरिकी मूल्यों को कमजोर करती है।
क्या ट्रंप की इन टिप्पणियों से भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान Quad गठबंधन, रक्षा सहयोग और 200 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अजय भूटोरिया ने इसे 'आर्थिक और भू-राजनीतिक भूल' करार दिया है।
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