सूरत मेट्रो ट्रायल रन शुरू: 40 किमी नेटवर्क पर काम तेज, डायमंड सिटी को मिलेगी नई रफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- सूरत मेट्रो ट्रायल रन अप्रैल 2025 में ड्रीम सिटी से अलथान टेनामेंट के बीच 8.5 किमी रूट पर शुरू हुआ।
- पूरे नेटवर्क की लंबाई 40.35 किलोमीटर है, जिसमें 38 स्टेशन और 6.47 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक शामिल है।
- डायमंड कॉरिडोर (21.6 किमी) और टेक्सटाइल कॉरिडोर (18.7 किमी) — दो प्रमुख रूट पर काम जारी।
- रोजाना 40 से 45 हजार कारीगर और व्यापारी मेट्रो से लाभान्वित होंगे; सूरत डायमंड बोर्स तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
- 500 घंटे के ट्रायल रन के बाद सुरक्षा जांच पूरी होने पर मेट्रो जनता को समर्पित की जाएगी।
- गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह परियोजना गुजरात के शहरी परिवहन क्रांति की अगली कड़ी है।
सूरत, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात की डायमंड सिटी सूरत में मेट्रो रेल का सपना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GMRCL) ने ड्रीम सिटी और अलथान टेनामेंट के बीच 8.5 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है। यह ट्रायल 500 घंटे तक चलेगा, जिसमें ट्रेन की स्पीड, ब्रेकिंग सिस्टम और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
मेट्रो नेटवर्क की पूरी रूपरेखा
सूरत मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 40.35 किलोमीटर है और इसमें 38 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना में दो प्रमुख कॉरिडोर शामिल हैं। कॉरिडोर-1 को 'डायमंड कॉरिडोर' कहा जाता है, जो ड्रीम सिटी से सरथाना तक 21.6 किलोमीटर में फैला है। इसमें 15 किलोमीटर एलिवेटेड और 6.5 किलोमीटर अंडरग्राउंड ट्रैक है, जिसमें 14 एलिवेटेड और 6 अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं।
कॉरिडोर-2 को 'टेक्सटाइल कॉरिडोर' कहा जाता है, जो भेसान से सरोली तक 18.7 किलोमीटर में फैला है। यह कॉरिडोर पूरी तरह एलिवेटेड है और इसमें 18 स्टेशन हैं। नेटवर्क का 6.47 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड है, जबकि ड्रीम सिटी और भेसान में दो डिपो भी विकसित किए जा रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकता और नेतृत्व
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी परिवहन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अहमदाबाद मेट्रो की सफलता के बाद अब सूरत मेट्रो को तेज गति से पूरा करना गुजरात सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। सूरत मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के परियोजना निदेशक आनंद सिंह बिष्ट ने बताया कि ट्रायल रूट पर 7 मेट्रो स्टेशनों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
गौरतलब है कि सूरत जैसे औद्योगिक और व्यापारिक शहर में मेट्रो की मांग वर्षों से उठती रही है। वराछा, कतारगाम और सरथाणा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से रोजाना 40 से 45 हजार कारीगर और व्यापारी आवाजाही करते हैं, जिन्हें अब तेज और आरामदायक परिवहन का विकल्प मिलेगा।
डायमंड उद्योग और आम जनता पर असर
गुजरात जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के रीजनल चेयरमैन जयंती सावलिया ने कहा कि मेट्रो शुरू होने से सूरत डायमंड बोर्स तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे 45,000 से अधिक लोग प्रतिदिन सुगमता से आवाजाही कर सकेंगे और ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक नियंत्रित होगी।
स्थानीय निवासी राज पटेल ने कहा कि जो लोग सुबह से शाम तक सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं, उनके लिए यह मेट्रो जीवन बदलने वाली साबित होगी। वहीं रोशन चिमना ने कहा कि सूरत में इतनी तेजी से मेट्रो का काम पूरा होना शहर के लिए गर्व की बात है।
तुलनात्मक दृष्टिकोण और व्यापक संदर्भ
देश के अन्य मेट्रो प्रोजेक्टों की तुलना में सूरत मेट्रो की निर्माण गति उल्लेखनीय रही है। जहां कई बड़े शहरों में मेट्रो परियोजनाएं वर्षों की देरी से जूझती हैं, वहीं सूरत में काम तेज रफ्तार से आगे बढ़ा है। यह परियोजना न केवल शहरी परिवहन को बेहतर बनाएगी, बल्कि ईको-फ्रेंडली यात्रा को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करने में भी सहायक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूरत डायमंड बोर्स तक मेट्रो कनेक्टिविटी मिलने से शहर की आर्थिक उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हीरा और कपड़ा उद्योग — दोनों क्षेत्रों के लिए यह मेट्रो नेटवर्क एक गेमचेंजर साबित हो सकता है।
सुरक्षा जांच और 500 घंटे के ट्रायल रन के सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद सूरत मेट्रो को जनता को समर्पित किए जाने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में सूरतवासियों को एक आधुनिक, तेज और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था मिलने की संभावना प्रबल है।