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ग्रीन कार्ड नीति बदलाव पर डेमोक्रेट्स का ट्रंप प्रशासन को चुनौती, USCIS से वापसी की मांग

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ग्रीन कार्ड नीति बदलाव पर डेमोक्रेट्स का ट्रंप प्रशासन को चुनौती, USCIS से वापसी की मांग

सारांश

ट्रंप प्रशासन के USCIS ने 21 मई को एक ज्ञापन जारी कर स्टेटस एडजस्टमेंट को 'असाधारण राहत' बताया और कॉन्सुलर प्रोसेसिंग को तरजीह दी। दर्जनों डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसे 1952 के INA और कांग्रेस की मंशा के विरुद्ध बताते हुए वापसी की मांग की है — कुशल कामगारों और परिवारों पर असर की चेतावनी के साथ।

मुख्य बातें

USCIS ने 21 मई 2025 को नीति ज्ञापन जारी कर स्टेटस एडजस्टमेंट को 'असाधारण राहत' बताया और कॉन्सुलर प्रोसेसिंग को प्राथमिकता दी।
सीनेटर एलेक्स पडिला, डिक डर्बिन, प्रतिनिधि जेमी रास्किन और प्रमिला जयपाल के नेतृत्व में दर्जनों डेमोक्रेटिक सांसदों ने ज्ञापन वापस लेने की मांग की।
सांसदों का कहना है कि नया 'राष्ट्रीय हित और आर्थिक लाभ' परीक्षण INA में कहीं नहीं है और कांग्रेस ने इसे कभी अधिकृत नहीं किया।
स्टेटस एडजस्टमेंट की व्यवस्था 1952 के INA से चली आ रही है; पात्र प्रवासी अमेरिका में रहते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नई नीति से कुशल कामगारों, शोधकर्ताओं, चिकित्सा पेशेवरों और परिवारों पर असर पड़ने की आशंका; दूतावासों में वीजा बैकलॉग बढ़ने का खतरा।
USCIS निदेशक जोसेफ एडलो से पत्र में नौ सवालों के जवाब माँगे गए हैं।

अमेरिकी कांग्रेस के दर्जनों डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से 21 मई 2025 को जारी यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के उस नीति ज्ञापन को तत्काल वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत ग्रीन कार्ड के पात्र आवेदकों को अमेरिका में रहते हुए स्टेटस एडजस्टमेंट की सुविधा देने के बजाय विदेश से कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के लिए बाध्य किया जा सकता है। सीनेटर एलेक्स पडिला, सीनेटर डिक डर्बिन, प्रतिनिधि जेमी रास्किन और प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल के नेतृत्व में लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि यह ज्ञापन दशकों पुरानी कानूनी परंपरा और कांग्रेस की मंशा के विरुद्ध है।

नीति ज्ञापन में क्या बदला गया

USCIS के 21 मई के ज्ञापन में स्टेटस एडजस्टमेंट को 'असाधारण प्रकार की राहत' करार दिया गया है और नए विवेकाधीन मानदंड लागू किए गए हैं। इसके तहत आवेदकों को यह साबित करना होगा कि अमेरिका में उनकी मौजूदगी राष्ट्रीय हित या आर्थिक लाभ से जुड़ी है। डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि ऐसा कोई परीक्षण इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट (INA) में कहीं भी मौजूद नहीं है और यह कांग्रेस की मंजूरी के बिना एक नया मौलिक कानूनी मानदंड थोपने की कोशिश है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि स्टेटस एडजस्टमेंट 'प्रशासनिक विवेक और राहत का विषय है, जिसे कॉन्सुलर प्रक्रिया पर प्राथमिकता देने के लिए नहीं बनाया गया।' सांसदों ने इस दावे को 'पूरी तरह गलत' बताया और कहा कि 'कॉन्सुलर प्रोसेसिंग को कोई कानूनी प्राथमिकता प्राप्त नहीं है।'

कानूनी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्टेटस एडजस्टमेंट की व्यवस्था 1952 के इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के तहत शुरू की गई थी। बाद में इसका विस्तार इसलिए किया गया क्योंकि बड़ी संख्या में पात्र आवेदक पहले से ही अमेरिका में रह रहे थे। कांग्रेस की मंशा थी कि पात्र प्रवासी कुछ विशेष कानूनी अपवादों को छोड़कर देश छोड़े बिना ही अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकें। यह व्यवस्था INA की धारा 245 के अंतर्गत दशकों से पारिवारिक, रोजगार-आधारित और मानवीय इमिग्रेशन श्रेणियों का अभिन्न हिस्सा रही है।

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में कानूनी इमिग्रेशन प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए हैं और तर्क दिया है कि इमिग्रेशन लाभ अधिक सख्ती और समझदारी से दिए जाने चाहिए।

आम जनता और कुशल कामगारों पर असर

डेमोक्रेटिक सांसदों ने चेतावनी दी है कि इस नीति से विदेशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में इमिग्रेंट वीजा आवेदनों का दबाव काफी बढ़ सकता है। मौजूदा वीजा अपॉइंटमेंट बैकलॉग को देखते हुए आवेदकों को लंबे समय तक अपने जीवनसाथी, बच्चों और नियोक्ता से अलग रहना पड़ सकता है।

सांसदों के अनुसार, इस बदलाव का सबसे अधिक असर कुशल कामगारों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सा पेशेवरों और विदेशी प्रतिभा पर निर्भर व्यवसायों पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि नीति की प्रभावी तिथि, संक्रमण अवधि और लंबित आवेदनों पर इसके प्रभाव को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।

USCIS से माँगे गए नौ सवालों के जवाब

पत्र में USCIS निदेशक जोसेफ एडलो से नौ सवालों के जवाब माँगे गए हैं। इनमें शामिल हैं — नीति कब से लागू होगी, कौन-से आवेदक इसके दायरे में आएंगे, 'राष्ट्रीय हित' और 'आर्थिक लाभ' को कैसे परिभाषित किया जाएगा, क्या निर्णायकों (एडज्यूडिकेटर्स) को क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश मिले हैं और क्या एजेंसी ने नीति अपनाने से पहले विदेश विभाग (State Department) से परामर्श किया था।

सांसदों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि 'आंतरिक एजेंसी नीति के जरिए उस कानूनी ढाँचे को खत्म करने की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं है जिसे कांग्रेस ने पारिवारिक एकता, प्रशासनिक दक्षता और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए बनाया था।' इस पत्र पर दर्जनों डेमोक्रेटिक सीनेटरों और हाउस सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें USCIS की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि प्रशासन ज्ञापन वापस नहीं लेता, तो कानूनी चुनौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इमिग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति लागू हुई तो लाखों लंबित आवेदनों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है और अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इस बड़े सवाल का है कि क्या कार्यपालिका एजेंसी कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानूनी ढाँचे को आंतरिक दिशा-निर्देशों से बदल सकती है। ट्रंप प्रशासन ने 'विवेकाधिकार' की आड़ में INA की धारा 245 की व्याख्या को पलटने की कोशिश की है — जो न्यायिक समीक्षा को आमंत्रण देती है। भारतीय मूल के लाखों H-1B और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है, जो पहले से ही वर्षों की प्रतीक्षा सूची में हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नजरअंदाज करती है कि कॉन्सुलर बैकलॉग का मतलब है — परिवार से वर्षों की जुदाई, न कि महज प्रशासनिक असुविधा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

USCIS का नया ग्रीन कार्ड नीति ज्ञापन क्या है?
USCIS ने 21 मई 2025 को एक नीति ज्ञापन जारी किया जिसमें स्टेटस एडजस्टमेंट को 'असाधारण राहत' बताया गया और कॉन्सुलर प्रोसेसिंग को प्राथमिकता दी गई। इसके तहत ग्रीन कार्ड के पात्र आवेदकों को अमेरिका में रहते हुए आवेदन करने के बजाय विदेश स्थित दूतावासों से प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
स्टेटस एडजस्टमेंट क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
स्टेटस एडजस्टमेंट वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत अमेरिका में पहले से मौजूद पात्र प्रवासी देश छोड़े बिना ग्रीन कार्ड यानी कानूनी स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह व्यवस्था 1952 के INA की धारा 245 के तहत दशकों से लागू है और पारिवारिक, रोजगार-आधारित तथा मानवीय इमिग्रेशन श्रेणियों में व्यापक रूप से उपयोग होती है।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस नीति का विरोध क्यों किया?
डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि नया 'राष्ट्रीय हित और आर्थिक लाभ' परीक्षण INA में कहीं नहीं है और इसे कांग्रेस ने कभी अधिकृत नहीं किया। उनके अनुसार यह ज्ञापन दशकों पुरानी कानूनी परंपरा को आंतरिक एजेंसी नीति के जरिए खत्म करने की अस्वीकार्य कोशिश है।
इस नीति से किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
सांसदों के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर कुशल कामगारों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, चिकित्सा पेशेवरों और विदेशी प्रतिभा पर निर्भर व्यवसायों पर पड़ेगा। मौजूदा वीजा बैकलॉग के कारण आवेदकों को अपने परिवार और नियोक्ता से लंबे समय तक अलग रहना पड़ सकता है।
आगे क्या होने की संभावना है?
USCIS निदेशक जोसेफ एडलो से पत्र में नौ सवालों के जवाब माँगे गए हैं। यदि प्रशासन ज्ञापन वापस नहीं लेता, तो कानूनी चुनौती की संभावना है। इमिग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति लागू हुई तो लाखों लंबित आवेदनों पर सीधा असर पड़ सकता है।
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