17 अगस्त 2026
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जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामला: सीआईडी ने रांची कार्यालय में छापा मारा, सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ जारी

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जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक मामला: सीआईडी ने रांची कार्यालय में छापा मारा, सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ जारी

सारांश

झारखंड में सीजीएल परीक्षा घोटाले की जांच अब सीधे जेएसएससी कार्यालय तक पहुँच गई है। सीआईडी की छापेमारी, सचिव से पूछताछ और टीडीपीएल के पूर्व कर्मी के विस्फोटक बयान — जिसमें बोकारो में 15 अभ्यर्थियों को पेपर रटवाने का दावा है — ने 2,000 से अधिक नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 17 अगस्त को जेएसएससी के रांची कार्यालय में छापा मारा; सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ जारी।
सीजीएल परीक्षा 2024 के ज़रिए 2,000 से अधिक पदों पर हुई नियुक्तियाँ जांच के दायरे में।
टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने कथित तौर पर माना — परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराए गए; बोकारो में 15 अभ्यर्थियों को पेपर रटवाया गया।
तिवारी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उनका, भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन इसी व्यवस्था से हुआ — दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी।
छात्र रांची में परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की माँग को लेकर आंदोलनरत।
राज्य सरकार ने कहा — सीआईडी जांच जारी, तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के रांची स्थित मुख्यालय में सीआईडी ने सोमवार, 17 अगस्त को छापेमारी की, जब सीजीएल परीक्षा 2024 में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई। जांच दल आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से सघन पूछताछ कर रहा है और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज़ों व रिकॉर्ड खंगाल रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

सूत्रों के अनुसार, सीआईडी का फोकस वर्ष 2024 में आयोजित सीजीएल परीक्षा के ज़रिए चयनित सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ों की बारीक पड़ताल पर है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि परीक्षा प्रक्रिया के किस चरण में गड़बड़ी हुई और किन अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला। इस परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ की जा चुकी हैं।

अभय तिवारी के खुलासे — जांच का केंद्रबिंदु

मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी को दिए बयान में कथित तौर पर स्वीकार किया कि परीक्षा से पूर्व सीजीएल के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। उल्लेखनीय है कि तिवारी स्वयं भी इसी परीक्षा में सफल हुए थे।

तिवारी के बयान के अनुसार, पहले टीडीपीएल को जेएसएससी की परीक्षाओं के संचालन का अनुबंध मिलता था, लेकिन कम दर पर काम करने से इनकार के बाद कंपनी को डी-इंपैनल कर दिया गया। इसके पश्चात परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को सौंपी गई। तिवारी ने वेबल से जुड़े कुछ व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं — उनका दावा है कि इन्हीं लोगों के माध्यम से उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराए गए थे।

तिवारी ने यह भी दावा किया कि बोकारो स्थित एक आवास में करीब 15 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पूर्व प्रश्न-उत्तर रटवाए गए। कथित तौर पर उन्होंने यह भी माना कि उनका, उनके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन इसी व्यवस्था के ज़रिए हुआ। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और सीआईडी दस्तावेज़ी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर इनका सत्यापन कर रही है।

छात्रों का आंदोलन और सीबीआई जांच की माँग

इस बीच, रांची में छात्र लगातार आंदोलनरत हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं — सीजीएल परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए और पूरे भर्ती घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं और राज्य स्तरीय जांच से निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद नहीं है।

सरकार और सीआईडी का रुख

झारखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जा चुकी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और परीक्षा सुधारों की माँग तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

सीआईडी की जांच जारी है और सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ के बाद अन्य अधिकारियों व संदिग्ध अभ्यर्थियों को भी तलब किए जाने की संभावना है। अभय तिवारी के बयान की दस्तावेज़ी पुष्टि होने पर मामले में गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सीबीआई जांच नहीं सौंपी गई तो आंदोलन और तेज़ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

NET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में उजागर हुआ है। अभय तिवारी का बयान — यदि दस्तावेज़ों से सिद्ध होता है — न केवल परीक्षा एजेंसी वेबल, बल्कि जेएसएससी की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। असली चुनौती यह है कि सीआईडी की जांच राज्य सरकार के प्रशासनिक ढाँचे के भीतर ही संचालित हो रही है, जबकि छात्र स्वतंत्र सीबीआई जांच की माँग कर रहे हैं — और यह माँग बेबुनियाद नहीं है। 2,000 से अधिक नियुक्तियाँ दाँव पर हैं; यदि जांच में पारदर्शिता नहीं दिखी तो इस आंदोलन का दायरा और बढ़ेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा घोटाला क्या है?
वर्ष 2024 में आयोजित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला है, जिसमें परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर लीक होने के आरोप हैं। इस परीक्षा के ज़रिए 2,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ की जा चुकी हैं, जो अब जांच के दायरे में हैं।
सीआईडी ने जेएसएससी कार्यालय में छापा क्यों मारा?
सीआईडी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही है और चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ व परीक्षा रिकॉर्ड की पड़ताल के लिए 17 अगस्त को रांची स्थित जेएसएससी कार्यालय में छापेमारी की। सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ जारी है।
अभय तिवारी कौन हैं और उनका बयान क्यों अहम है?
अभय तिवारी परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर हैं, जो स्वयं सीजीएल परीक्षा में सफल हुए थे। उन्होंने सीआईडी को दिए बयान में कथित तौर पर माना कि परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराए गए और बोकारो में 15 अभ्यर्थियों को पेपर रटवाया गया — यह बयान जांच का केंद्रबिंदु बन गया है।
छात्र सीबीआई जांच की माँग क्यों कर रहे हैं?
छात्रों का तर्क है कि राज्य सरकार के अधीन सीआईडी जांच से निष्पक्ष परिणाम की गारंटी नहीं है। वे परीक्षा रद्द करने और केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामला सौंपने की माँग कर रहे हैं, और रांची में आंदोलन जारी है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सीआईडी की जांच जारी है और सचिव सुधीर गुप्ता की पूछताछ के बाद अन्य अधिकारियों व संदिग्ध अभ्यर्थियों को तलब किए जाने की संभावना है। अभय तिवारी के दावों की दस्तावेज़ी पुष्टि होने पर गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं; राज्य सरकार ने कहा है कि तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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