23 जुलाई 2026
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जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के रांची आवास पर छापा

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जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के रांची आवास पर छापा

सारांश

झारखंड में जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच तेज़ हो गई है। सीआईडी ने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के रांची आवास पर छापा मारा, जबकि पहले से 5 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज़ जब्त हो चुके हैं — जांच का दायरा बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 23 जुलाई 2026 को जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल.
ख्यांग्ते के कांके रोड, रांची स्थित आवास पर छापेमारी की।
मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज; जांच 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है।
21 जुलाई को जेपीएससी मुख्यालय और टीडीपीएल कार्यालय पर छापे में हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव व डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।
22 जुलाई को 5 आरोपी गिरफ्तार — जिनमें उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह शामिल — सभी न्यायिक हिरासत में।
ख्यांग्ते ने 21 जुलाई की रात देर से अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच में 23 जुलाई 2026 को सीआईडी ने एक अहम कदम उठाते हुए आयोग के निवर्तमान अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी की। सीआईडी की टीम पुलिस बल के साथ उनके घर पहुँची और जेपीएससी से जुड़े दस्तावेज़ों तथा अन्य अभिलेखों की गहन जांच की।

छापेमारी का संदर्भ और कांड संख्या

सीआईडी ने इस मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की है। यह कार्रवाई 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद के बाद दर्ज प्राथमिकी के क्रम में की गई है। छापेमारी के दौरान बरामद सामग्री के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई उसी दिन हुई जब जांच एजेंसी परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, डिजिटल डेटा प्रबंधन और परीक्षा से जुड़े निर्णयों में विभिन्न अधिकारियों एवं एजेंसी की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

21 जुलाई की संयुक्त छापेमारी और डिजिटल साक्ष्य

इससे पहले 21 जुलाई 2026 को राज्य सरकार के निर्देश पर सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने जेपीएससी मुख्यालय और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कार्यालय समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। जांच टीम ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज़, कंप्यूटर रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे।

उसी दिन देर रात एल. ख्यांग्ते ने आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। यह ऐसे समय में आया जब परीक्षा परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर था।

पाँच गिरफ्तारियाँ और न्यायिक हिरासत

प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने 22 जुलाई 2026 को प्राथमिकी दर्ज करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, तथा कंपनी से जुड़े मो. उस्मान, मो. एबाद और अभय कुमार तिवारी शामिल हैं। सभी को बुधवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

विवाद की जड़: अभ्यर्थियों के आरोप

14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद झारखंड राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, जिसने तत्परता से कार्रवाई शुरू की।

यह मामला झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में और नाम आ सकते हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

गिरफ्तारियाँ और अब पूर्व अध्यक्ष के घर पर दस्तक। लेकिन असली सवाल यह है कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद इतने समय तक अनियमितताएँ नज़रअंदाज़ क्यों रहीं। झारखंड में यह पहला सरकारी भर्ती विवाद नहीं है, और बार-बार की इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि संस्थागत निगरानी तंत्र में गहरी खामियाँ हैं। डिजिटल साक्ष्यों की जब्ती जांच को मज़बूत आधार दे सकती है — बशर्ते अभियोजन पक्ष उन्हें अदालत में प्रभावी ढंग से पेश कर सके।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी 14वीं परीक्षा विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच सीआईडी को सौंप दी।
सीआईडी ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
सीआईडी ने 21 जुलाई को जेपीएससी मुख्यालय और टीडीपीएल कार्यालय पर छापे मारे, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। 22 जुलाई को 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 23 जुलाई को पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवास पर छापेमारी की गई।
एल. ख्यांग्ते कौन हैं और उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया?
एल. ख्यांग्ते झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के निवर्तमान अध्यक्ष हैं। 21 जुलाई की रात जेपीएससी मुख्यालय पर सीआईडी की छापेमारी के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस मामले में कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं?
22 जुलाई 2026 को सीआईडी ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया — जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, और कंपनी से जुड़े मो. उस्मान, मो. एबाद तथा अभय कुमार तिवारी। सभी न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे जांच में क्या होने की संभावना है?
सूत्रों के अनुसार सीआईडी परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और डिजिटल डेटा प्रबंधन में विभिन्न अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का दायरा बढ़ने और और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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