25 जुलाई 2026
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अमेरिका-चीन एआई दौड़: ट्रंप प्रशासन ने $5 अरब के 'जेनेसिस मिशन' का किया बचाव

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अमेरिका-चीन एआई दौड़: ट्रंप प्रशासन ने $5 अरब के 'जेनेसिस मिशन' का किया बचाव

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने चीन से एआई दौड़ जीतने के लिए $5 अरब के 'जेनेसिस मिशन' का बचाव किया — लेकिन डेमोक्रेट्स का कहना है कि एनएसएफ फंडिंग कटौती और ग्रांट अनिश्चितता उसी साइंटिफिक बुनियाद को खोखला कर रही है जिस पर यह दांव टिका है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने 25 जुलाई को हाउस कमेटी में अमेरिकी वैज्ञानिक अनुसंधान सुधारों का बचाव किया।
ओएसटीपी डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने 'जेनेसिस मिशन' की घोषणा की, जिसमें 15 से अधिक संघीय एजेंसियों ने $5 अरब से अधिक एआई अनुसंधान के लिए देने का वादा किया।
रणनीतिक प्राथमिकताओं में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, फ्यूजन एनर्जी और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
रैंकिंग मेंबर जो लोफ्ग्रेन ने कहा कि प्रशासन के कदम 'चीन को मजबूत और अमेरिकी रिसर्च सिस्टम को बर्बाद कर रहे हैं।' डेमोक्रेट्स ने एनएसएफ फंडिंग कटौती , ग्रांट में राजनीतिक हस्तक्षेप और वैज्ञानिक सलाहकार निकायों को भंग करने पर आपत्ति जताई।
इस नीति का असर भारत समेत अमेरिका के प्रमुख तकनीकी साझेदारों पर भी पड़ने की संभावना है।

ट्रंप प्रशासन ने 25 जुलाई 2026 को अमेरिका के वैज्ञानिक अनुसंधान तंत्र में व्यापक सुधारों का बचाव करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़ना आने वाले दशकों की सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह बहस वॉशिंगटन में साइंस, स्पेस और टेक्नोलॉजी पर बनी हाउस कमेटी की सुनवाई में उस समय तेज हो गई जब सांसद पार्टी के आधार पर दो खेमों में बंट गए।

जेनेसिस मिशन: एआई-संचालित विज्ञान की नई रूपरेखा

व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी (ओएसटीपी) के डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने हाउस कमेटी के सामने 'साइंस के नए सुनहरे दौर' की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्रशासन के 'जेनेसिस मिशन' के तहत 15 से अधिक संघीय एजेंसियों ने एआई-आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए $5 अरब से अधिक की राशि देने का वादा किया है। इन एजेंसियों में ऊर्जा विभाग, कृषि विभाग, स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग, नासा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) शामिल हैं।

क्रैट्सियोस ने कानून निर्माताओं से स्पष्ट शब्दों में कहा, 'तेजी से बदलती दुनिया में हमारी आर्थिक लीडरशिप और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हमारे दबदबे को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अमेरिका अब अकेला औद्योगिक और वैज्ञानिक सुपरपावर नहीं रहा।' उन्होंने एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, फ्यूजन एनर्जी और स्पेस टेक्नोलॉजी को ऐसे रणनीतिक क्षेत्र बताया जिनमें अमेरिका को अपनी बढ़त बनाए रखनी होगी।

रिपब्लिकन की चिंता: चीन की आक्रामक रणनीति

समिति के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने आगाह किया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने एआई को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित कर उसी के अनुरूप भारी निवेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग अत्याधुनिक अनुसंधान हासिल करने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं को लगातार निशाना बना रहा है। रिपब्लिकन सांसदों ने बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में चीनी निर्भरता और ओपन-सोर्स एआई में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर गहरी चिंता जताई।

डेमोक्रेट्स का पलटवार: सुधार नहीं, कमज़ोरी

विपक्षी डेमोक्रेट्स ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह उसी वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को खोखला कर रहा है जिसे मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। रैंकिंग मेंबर जो लोफ्ग्रेन ने तर्क दिया कि ग्रेजुएट प्रवेश में कमी, रिसर्च फंडिंग को लेकर अनिश्चितता और ग्रांट नीति में प्रस्तावित बदलाव अमेरिकी शोध आधार को कमज़ोर कर रहे हैं, जबकि चीन विज्ञान में निवेश बढ़ा रहा है और अमेरिकी शोधकर्ताओं को अपनी ओर खींच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के कदम 'चीन को मजबूत कर रहे हैं और साथ ही अमेरिकी रिसर्च सिस्टम को बर्बाद कर रहे हैं।'

कई डेमोक्रेटिक सदस्यों ने नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) की फंडिंग में प्रस्तावित कटौती, रिसर्च ग्रांट में राजनीतिक हस्तक्षेप और वैज्ञानिक सलाहकार निकायों को भंग करने पर सवाल उठाए। क्रैट्सियोस ने इनकार किया कि व्हाइट हाउस एनएसएफ के व्यक्तिगत ग्रांट निर्णयों में शामिल था, और उन्होंने 'गोल्ड स्टैंडर्ड साइंस' के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई — यह कहते हुए कि संघीय वित्त पोषित अनुसंधान 'पुनरावर्तनीय, पारदर्शी और भरोसेमंद' होना चाहिए।

भारत और सहयोगियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की एआई और सेमीकंडक्टर नीति का असर भारत जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों पर भी पड़ रहा है। घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की अमेरिकी योजना वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है। गौरतलब है कि भारत इस समय अपनी खुद की सेमीकंडक्टर नीति और एआई मिशन को आकार दे रहा है, ऐसे में वॉशिंगटन की दिशा नई दिल्ली की प्राथमिकताओं को प्रभावित करेगी।

आगे क्या होगा

जेनेसिस मिशन के तहत एजेंसी-स्तरीय एआई अनुसंधान कार्यक्रमों का विवरण आने वाले महीनों में सामने आने की उम्मीद है। क्रैट्सियोस ने स्पष्ट किया कि प्रशासन एआई में अमेरिकी नेतृत्व को ओपन और क्लोज्ड-सोर्स दोनों मॉडलों के मिश्रण पर टिकाना चाहता है। हाउस कमेटी में जारी पार्टी-लाइन विभाजन यह संकेत देता है कि फेडरल साइंस फंडिंग की दिशा आने वाले बजट सत्र में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उसी सरकार से आ रही है जो एनएसएफ बजट में कटौती कर रही है और ग्रांट नीति में अनिश्चितता पैदा कर रही है — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा का तर्क देते हुए उसी वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को कमज़ोर करना — जो दशकों से अमेरिकी नवाचार की रीढ़ रही है — एक गहरी रणनीतिक भूल हो सकती है। असली सवाल यह नहीं है कि $5 अरब कहाँ जाएंगे, बल्कि यह है कि क्या फेडरल रिसर्च फंडिंग का समग्र स्तर बढ़ रहा है या सिर्फ प्राथमिकताएं बदली जा रही हैं। भारत जैसे साझेदारों के लिए यह बहस महत्वपूर्ण है — क्योंकि अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व की मजबूती या कमज़ोरी सीधे इंडो-पैसिफिक तकनीकी गठबंधनों की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का 'जेनेसिस मिशन' क्या है?
जेनेसिस मिशन ट्रंप प्रशासन की एआई-केंद्रित वैज्ञानिक अनुसंधान पहल है, जिसके तहत 15 से अधिक संघीय एजेंसियों ने $5 अरब से अधिक की राशि देने का वादा किया है। इसका उद्देश्य एआई को संघीय अनुसंधान के केंद्र में रखकर चीन के मुकाबले अमेरिकी तकनीकी बढ़त बनाए रखना है।
डेमोक्रेट्स ने इस योजना का विरोध क्यों किया?
डेमोक्रेट्स का कहना है कि प्रशासन एनएसएफ की फंडिंग में कटौती कर रहा है, ग्रांट नीति में अनिश्चितता पैदा कर रहा है और वैज्ञानिक सलाहकार निकायों को भंग कर रहा है — जो उसी वैज्ञानिक बुनियाद को कमज़ोर करता है जिसे मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। रैंकिंग मेंबर जो लोफ्ग्रेन के अनुसार, ये कदम चीन को फायदा पहुँचा रहे हैं।
चीन एआई और विज्ञान में अमेरिका के लिए कितना बड़ा खतरा है?
हाउस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने एआई को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर भारी निवेश किया है और अमेरिकी विश्वविद्यालयों व प्रयोगशालाओं से अत्याधुनिक अनुसंधान हासिल करने की कोशिश जारी है। बायोटेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में चीनी निर्भरता को लेकर भी गहरी चिंता जताई गई।
इस अमेरिकी नीति का भारत पर क्या असर होगा?
भारत अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक और तकनीकी साझेदार है, और अमेरिकी एआई व सेमीकंडक्टर नीति की दिशा भारत की खुद की तकनीकी प्राथमिकताओं — जैसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय एआई मिशन — को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन में भारत की भूमिका इस बहस के नतीजे पर निर्भर करेगी।
अमेरिका किन क्षेत्रों में एआई नेतृत्व बनाए रखना चाहता है?
ओएसटीपी डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, फ्यूजन एनर्जी और स्पेस टेक्नोलॉजी को रणनीतिक प्राथमिकता वाले क्षेत्र बताया। साथ ही घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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