ईरान से बातचीत जारी रहेगी, सैन्य कार्रवाई का फैसला ट्रंप के हाथ: रुबियो
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 31 अक्टूबर को अटलांटा में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद कभी बाधित नहीं हुआ और दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष व मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत विभिन्न स्तरों पर जारी है। हालाँकि, उन्होंने यह बताने से साफ इनकार कर दिया कि कूटनीतिक प्रयासों को कितना समय दिया जाएगा या किसी संभावित समझौते की दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है।
जी20 बैठक के बाद रुबियो का बयान
जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका किसी भी ऐसे कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का पर्याप्त समाधान करे। उन्होंने कहा, 'बातचीत कई स्तरों पर चल रही है। यह कभी रुकी नहीं है। कुछ मामलों में सीधे और कई मामलों में मध्यस्थों के ज़रिए संवाद जारी है।'
रुबियो ने यह भी कहा, 'यदि कोई कूटनीतिक समाधान संभव है तो हम उसके लिए तैयार हैं, लेकिन वह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएँ गहरी हो रही हैं।
सैन्य कार्रवाई का निर्णय ट्रंप के पास
जब रुबियो से पूछा गया कि कूटनीति विफल होने की स्थिति में अमेरिका कब सैन्य विकल्प अपना सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देते हैं, किंतु अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है और ज़रूरत पड़ने पर अपने सैन्य उद्देश्य हासिल करने में सक्षम है। उन्होंने बातचीत की समयसीमा या प्रगति पर कोई विशेष टिप्पणी करने से परहेज़ किया।
ईरान पर आरोप: परमाणु कार्यक्रम और समुद्री खतरे
रुबियो ने ईरान पर मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने वाले सशस्त्र समूहों को समर्थन देने और तेल, गैस व अन्य सामान ले जाने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, अमेरिकी बल लगभग हर रात ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री मार्गों की रक्षा कर रहे हैं।
रुबियो ने चेतावनी दी कि समुद्री व्यापार में बाधा आने से ऊर्जा, उर्वरक और कृषि उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर संघर्ष क्षेत्र से कोसों दूर स्थित देशों पर भी पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान समर्थित समूहों पर इस तरह के आरोप लगाए हों — यह एक लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक और सुरक्षा तनातनी का हिस्सा है।
सऊदी अरब और क्षेत्रीय सुरक्षा
सऊदी अरब के संदर्भ में रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपनी रक्षा प्रतिबद्धताओं का पालन जारी रखेगा और सऊदी नेतृत्व के साथ नियमित संपर्क बना हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब की सुरक्षा में अन्य देशों की भागीदारी का अमेरिका स्वागत करता है।
आगे क्या होगा
रुबियो के इस बयान के बाद अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। कूटनीतिक वार्ता की कोई समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है, और अमेरिका ने जानबूझकर अपने विकल्प खुले रखे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता की दिशा और गति ही यह तय करेगी कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है या घटता है।