यूपी शिक्षक भर्ती: योगी के हाथों नियुक्ति-पत्र पाकर बोले चयनित — 'पहले परीक्षाएं रद्द होती थीं, अब पारदर्शी प्रक्रिया से मिला रोज़गार'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित शिक्षकों को 22 सितंबर 2026 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति-पत्र मिले, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में परीक्षाएं बार-बार रद्द हो जाती थीं या परिणाम लंबित रहते थे। चयनित शिक्षकों ने योगी सरकार की त्वरित और निष्पक्ष चयन-व्यवस्था को युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बताया।
मुख्य घटनाक्रम
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति-पत्र ग्रहण किए। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की इस भर्ती प्रक्रिया में टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) और पीजीटी (स्नातकोत्तर शिक्षक) — दोनों स्तरों पर विभिन्न विषयों में चयन किया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा में सफल होने के साथ ही नियुक्ति-पत्र मिलना उनके लिए अप्रत्याशित रूप से त्वरित अनुभव रहा।
चयनित शिक्षकों की प्रतिक्रियाएँ
वाराणसी के अग्रसेन कन्या इंटर कॉलेज में कला विषय की प्रवक्ता (पीजीटी) के पद पर नियुक्त आंचल शुक्ला ने कहा कि उनका बड़ा सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में महिलाओं को बिना भेदभाव रोज़गार के अवसर मिल रहे हैं और महिला सुरक्षा के बेहतर माहौल के चलते प्रदेश में उनकी भागीदारी भी तेज़ी से बढ़ी है।
टीजीटी संस्कृत पद पर चयनित ममता मौर्या ने बताया कि वह 2005 में एमए करने के बाद से इस पद के लिए प्रयासरत थीं। उन्होंने कहा, 'पहले बार-बार परीक्षाएं रद्द हो जाती थीं या लंबे समय तक परिणाम नहीं आता था। आज योगी सरकार की पारदर्शी व्यवस्था का नतीजा है कि परीक्षा में सफल होने के साथ ही नियुक्ति-पत्र भी मिल गया।'
मऊ के शिवम बरनवाल, जिनका चयन टीजीटी गणित के पद पर हुआ है, ने कहा कि बिना रिश्वतखोरी के पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से युवाओं को रोज़गार के अवसर दिए जा रहे हैं।
आजमगढ़ के श्री वैष्णव हरिहर दास इंटर कॉलेज में पीजीटी रसायन विज्ञान पद पर नियुक्त गोपाल प्रजापति ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व की सरकारों में होने वाली अव्यवस्था को समाप्त कर व्यवस्था को सुदृढ़ किया है।
गोरखपुर के पं. दीनदयाल इंटर कॉलेज में गृह विज्ञान टीजीटी पद पर चयनित कुमारी ऊषा सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति-पत्र पाकर वह और उनका पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अमेठी के शिव प्रसाद मिश्रा, जो टीजीटी संस्कृत पद पर चयनित हुए हैं, ने कहा कि त्वरित चयन प्रक्रिया से हज़ारों अभ्यर्थियों को सीधे लाभ मिला है।
पहले क्या होता था — ऐतिहासिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती का इतिहास विवादों और देरी से भरा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर आरोप लगते रहे हैं — परीक्षाएं रद्द होना, परिणाम वर्षों तक लंबित रहना और चयन प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायतें सामान्य थीं। ममता मौर्या का 2005 से लेकर 2026 तक का इंतज़ार इस समस्या का एक व्यक्तिगत उदाहरण है, जो दर्शाता है कि इस भर्ती प्रक्रिया में देरी कितनी गहरी रही है।
आम जनता पर असर
शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता का सीधा असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है — एक ओर जहाँ योग्य अभ्यर्थियों को समय पर रोज़गार मिलता है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में रिक्त पदों की भरपाई होती है और छात्रों को शिक्षक मिलते हैं। वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, अमेठी और मऊ जैसे विभिन्न जिलों से चयनित शिक्षक यह संकेत देते हैं कि भर्ती का दायरा प्रदेशव्यापी रहा है।
आगे क्या
चयनित शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में पूरी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों से ईमानदारी और समर्पण की अपेक्षा की है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की यह भर्ती आगे और पदों पर चयन के लिए भी एक मानक स्थापित कर सकती है।