यूपी पुलिस भर्ती 2023: योगी के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर बोले अभ्यर्थी — बिना सिफारिश मिली नौकरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों को 20 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लखनऊ में नियुक्ति पत्र सौंपे गए। चयनित युवाओं ने एकमत होकर कहा कि मेहनत और योग्यता के दम पर मिली यह नौकरी उनके वर्षों के संघर्ष का पुरस्कार है।
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
लखनऊ निवासी संजीव वर्मा का चयन उपनिरीक्षक (गोपनीय) पद पर हुआ है। उन्होंने बताया कि परीक्षा 2 नवंबर 2025 को आयोजित हुई थी और परिणाम मार्च 2026 में घोषित किया गया। संजीव ने कहा, 'पूरी नियुक्ति निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से हुई है — मेहनत करने वालों को सफलता मिली है।'
लखीमपुर खीरी निवासी रजत गुप्ता के लिए यह यूपी पुलिस में दूसरा चयन है। वर्ष 2020 में वह आरक्षी पद पर चयनित हो चुके हैं और अब उपनिरीक्षक (गोपनीय) के पद पर उनकी नियुक्ति हुई है। रजत ने कहा कि लिखित परीक्षा, टाइपिंग और मेडिकल — हर चरण में पारदर्शिता बनाए रखी गई।
महिला अभ्यर्थियों की आवाज़
पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) पद पर चयनित अंजू भारती ने बताया कि उनका चयन बिना किसी पक्षपात, लेनदेन और सिफारिश के हुआ है। उन्होंने कहा, 'मुझे केवल आवेदन शुल्क खर्च करना पड़ा — बाकी सब योग्यता ने तय किया।' इसी पद पर चयनित आदर्श कुमार जैन ने भी भर्ती को निष्पक्ष बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।
पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) पद पर चयनित दर्शना बाजपेयी ने तीन वर्षों की तैयारी के बाद मिली सफलता को परिवार के लिए 'बड़ी उपलब्धि' बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलने की उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी।
दीर्घकालिक तैयारी का फल
धीरेंद्र सिंह, जिन्होंने 5 वर्षों से तैयारी की थी, ने कहा कि आज उनके संघर्ष को मंज़िल मिली। सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि वह 2021 से लगातार तैयारी कर रहे थे और अब सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) के पद पर उनकी नियुक्ति होने से उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
भर्ती प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा वर्षों से चर्चा में रहा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर पुलिस भर्तियाँ संपन्न कराई हैं और परीक्षा प्रक्रिया को डिजिटल निगरानी से जोड़ा है। चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव बताते हैं कि कम से कम इस भर्ती चक्र में प्रक्रियागत पारदर्शिता को लेकर उम्मीदवारों में सकारात्मक धारणा बनी है।
आगे का रास्ता
नव-नियुक्त अभ्यर्थी अपने-अपने पदों पर शीघ्र योगदान देंगे। युवाओं की यह खुशी राज्य सरकार की भर्ती नीति के लिए एक सकारात्मक संदेश है, हालाँकि विशेषज्ञ कहते हैं कि दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए हर भर्ती चक्र में इसी स्तर की पारदर्शिता बनाए रखना ज़रूरी होगा।