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क्या थारू जनजाति की बेटियों का चयन निष्पक्ष प्रक्रिया का उदाहरण है?

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क्या थारू जनजाति की बेटियों का चयन निष्पक्ष प्रक्रिया का उदाहरण है?

सारांश

क्या थारू जनजाति की बेटियों का चयन निष्पक्ष प्रक्रिया का जीवंत उदाहरण है? जानिए कैसे यूपी सरकार ने पारदर्शी भर्ती के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान किए। यह कहानी उन बेटियों की है जिन्होंने सीमाओं को पार किया।

मुख्य बातें

थारू जनजाति की बेटियों का चयन रोजगार के अवसरों का प्रतीक है।
निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से सभी को समान अवसर मिला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास सुदूर क्षेत्रों में आशा जगाता है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।
प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती।

लखनऊ, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोक भवन सभागार में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित 2,425 मुख्य सेविकाओं और 13 फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

उन्होंने कहा कि पहले जहां योजनाएं सुदूर इलाकों तक नहीं पहुंच पाती थीं, आज वही लोग नौकरी पा रहे हैं। विशेष रूप से थारू जनजाति और सुदूर क्षेत्रों की बेटियों का चयन इस निष्पक्ष प्रक्रिया का स्पष्ट उदाहरण है। कार्यक्रम में यूपी के विभिन्न क्षेत्रों से आई लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा कर सीएम योगी को धन्यवाद दिया।

महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान मैंने देखा कि आजमगढ़, अमरोहा, शामली, लखनऊ, कानपुर, आगरा, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे जनपदों के युवाओं को अवसर मिला। वहीं, लखीमपुर खीरी और दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों से थारू जनजाति की बेटियों का चयन हुआ, जो इस प्रक्रिया की पारदर्शिता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सूची में दो थारू बेटियों का चयन हुआ है, जो साबित करता है कि प्रतिभा हर जगह है, बस अवसर चाहिए। थारू जनजाति और सुदूर इलाकों की बेटियों का चयन निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से ही संभव हुआ। अगर आजमगढ़, अमरोहा, बिजनौर, शामली, ललितपुर, जालौन या सोनभद्र की बेटी चयनित होती है, तो यह साफ है कि प्रतिभा वहां भी थी और प्रक्रिया निष्पक्ष रही। यह कदम न केवल युवाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि सुदूर क्षेत्रों के लोगों में उम्मीद जगाने वाला है।

उन्होंने लाभार्थियों से कहा कि यह अवसर उनकी मेहनत का फल है और अब उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी है। आपके चयन से यह साबित होता है कि प्रतिभा की कोई सीमा नहीं। सुदूर इलाकों से आई बेटियों की सफलता यूपी की प्रगति का प्रतीक है। लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने अनुभव साझा किए।

लखीमपुर खीरी से आई थारू समुदाय की नंदू राना मुख्य सेविका के पद पर चयनित हैं। उन्होंने कहा कि मैं दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों से हूं। मैं अति पिछड़े क्षेत्र से हूं, जहां मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं। सीमित संसाधनों में पढ़ाई की और आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से निष्पक्ष प्रक्रिया से मुख्य सेविका के पद पर चयन हुआ।

इसके अलावा विभिन्न पृष्ठभूमि और क्षेत्रों से आई अन्य लाभार्थियों ने भी योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमें हक मिला और हम ईमानदारी से कर्तव्य निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि अवसरों की कोई कमी नहीं है। सीएम योगी का यह प्रयास सुदूर क्षेत्रों में आशा की किरण लाने वाला है। यह कदम युवा पीढ़ी को रोजगार देने के साथ-साथ समाज में समानता का संदेश भी देता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थारू जनजाति की बेटियों का चयन कैसे हुआ?
थारू जनजाति की बेटियों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस प्रक्रिया में क्या योगदान है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रक्रिया को पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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