प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में जानलेवा हमला: नाक काटने की कोशिश
सारांश
Key Takeaways
- आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ।
- हमलावरों ने उनकी नाक काटने की कोशिश की।
- यह हमला अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ चल रहे विवाद से संबंधित है।
- आशुतोष ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
- प्रशासन ने सुरक्षा के लिए जांच आदेश दिया है।
प्रयागराज, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ है। उन्होंने राष्ट्र प्रेस को बताया कि शाकुंभरी पीठ से प्रयागराज जाने के लिए हम लोग गाड़ियों से गाजियाबाद आए, क्योंकि हमारा टिकट गाजियाबाद से था। रीवा एक्सप्रेस ट्रेन से प्रयागराज जाते समय रविवार सुबह पांच बजे धारदार हथियारों से हमारे ऊपर हमला किया गया। हमलावरों ने हमारी नाक काटने की कोशिश की। हमने बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाई।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो के तहत छोटे-छोटे बटुकों के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया था, उसी के बाद यह घोषणा की गई थी कि जो भी उनकी नाक काटकर लाएगा, उसे 21 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसी साजिश के तहत मेरी हत्या की कोशिश की गई है। उन्होंने बताया कि मैंने अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद, अरविंद, प्रकाश और दिनेश शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
गौरतलब है कि 21 फरवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी के द्वारा दायर याचिका पर विशेष पोक्सो जज विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। ब्रह्मचारी ने यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अधिनियम की धारा 173(4) के तहत दायर किया था, जिसके अंतर्गत यदि पुलिस अधिकारी शिकायत दर्ज करने से इंकार करता है, तो व्यक्ति मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकता है। उन्होंने दो नाबालिग बच्चों को पॉक्सो कोर्ट में पेश किया और अदालत ने 13 फरवरी को आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा था।
विशेष अदालत ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एफआईआर दर्ज करने और आगे की जांच का निर्देश दिया था।
प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान महोत्सव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पारंपरिक पालकी यात्रा के माध्यम से संगम जाने का प्रयास कर रहे थे। प्रशासन ने भारी भीड़ और 'नो-व्हीकल जोन' नीति का हवाला देते हुए उनकी यात्रा को रोक दिया। इसके बाद उनके शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कथित तौर पर भोजन और जल का त्याग कर प्रशासन से माफी की मांग की थी।