अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव से कैसे बचते हैं एस्ट्रोनॉट्स, जानिए उनकी एक्सरसाइज तकनीक
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष में रहना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि वहाँ गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहा जाता है। इस स्थिति के कारण एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियाँ और मांसपेशियाँ कमजोर होने लगती हैं। पृथ्वी पर दिन-प्रतिदिन चलने-फिरने से हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव
यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियाँ और मांसपेशियाँ बुजुर्गों की तरह कमजोर हो सकती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए, अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर औसतन दो घंटे रोजाना एक्सरसाइज करते हैं। यह एक्सरसाइज उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हड्डियों और मांसपेशियों के नुकसान को रोकने में मदद करती है। पहले के मिशनों में केवल इलास्टिक बैंड का उपयोग होता था, लेकिन अब उपकरण बहुत विकसित हो चुके हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा मुख्य उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करती है।
एडवांस्ड रेसिस्टिव एक्सरसाइज डिवाइस २००८ में स्थापित किया गया था, जो वजन उठाने जैसा अनुभव देता है। इसमें पिस्टन और फ्लाईव्हील सिस्टम के द्वारा ६०० पाउंड तक का रेजिस्टेंस मिलता है। एस्ट्रोनॉट्स इससे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज करते हैं।
दूसरा उपकरण टी2 ट्रेडमिल है, जिसमें एस्ट्रोनॉट को बेल्ट से बांधा जाता है ताकि वे उड़ न जाएं। यह दौड़ने या तेज चलने के लिए प्रयोग होता है।
साइकल एरगोमीटर विद वाइब्रेशन आइसोलेशन एंड स्टेबलाइजेश २००१ में स्थापित किया गया और २०२३ में अपग्रेड हुआ। यह साइकिल मशीन कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित वर्कलोड प्रदान करती है, जिससे हृदय की दर और गति प्रदर्शित होती है।
ये उपकरण वाइब्रेशन को अलग रखते हैं ताकि स्पेस स्टेशन स्थिर रहे। एस्ट्रोनॉट्स एरोबिक (दौड़ना, साइकिलिंग) और रेजिस्टेंस (वजन उठाना) दोनों प्रकार की एक्सरसाइज करते हैं। पहले कम गति और लंबे समय तक एक्सरसाइज होती थी, लेकिन अब उच्च-तीव्रता, कम समय वाली एक्सरसाइज अधिक प्रभावी साबित हुई है।
एक अध्ययन के अनुसार, उच्च-तीव्रता, कम-वॉल्यूम एक्सरसाइज मांसपेशियों और हड्डियों को बेहतर बनाए रखती है और समय की भी बचत होती है। इससे क्रू मेंबर्स के पास मिशन के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है। एक विशेष जांच वीओ2मैक्स से पता चला कि लंबे स्पेसफ्लाइट में ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए एक्सरसाइज को और बेहतर बनाना आवश्यक है।
अध्ययन से यह भी सामने आया कि प्री-फ्लाइट ट्रेनिंग से स्पेस में प्रदर्शन बेहतर होता है। मसल बायोप्सी से मॉलिक्यूलर स्तर पर परिवर्तन देखे गए, जो दर्शाते हैं कि मौजूदा एक्सरसाइज प्रोग्राम मांसपेशियों को काफी हद तक बचाते हैं। हालाँकि, हर एस्ट्रोनॉट का रिस्पॉन्स अलग होता है। स्पेस में सीमित स्थान, उपकरणों की मरम्मत और गर्मी-नमी जैसी चुनौतियाँ होती हैं।