उम्मीद स्कीम से बनीं 'लखपति दीदियाँ': जम्मू बॉर्डर की महिलाओं ने PM मोदी को दी जन्मदिन बधाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट जम्मू में रहने वाली महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की 'उम्मीद स्कीम' के तहत मैक्रैम हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार कर आर्थिक स्वावलंबन की नई राह पकड़ी है। 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर इन महिलाओं ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि इस योजना ने बॉर्डर क्षेत्र की महिलाओं को न सिर्फ़ रोज़गार, बल्कि एक सम्मानजनक पहचान भी दी है। इनमें से कई महिलाएं अब 'लखपति दीदी' के रूप में जानी जाती हैं।
उम्मीद स्कीम से जुड़ाव और बदलाव
क्लस्टर कोऑर्डिनेटर प्रीति देवी ने बताया कि वे वर्ष 2018 में इस योजना से जुड़ी थीं, जब उनकी कोई अलग पहचान नहीं थी। उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए अच्छा मौका है। मैं खुशनसीब हूं कि इस स्कीम के साथ जुड़ी हुई हूं। आज हमको लखपति दीदी के नाम से जाना जाता है।' प्रीति देवी ने यह भी माँग की कि ग्रामीण महिलाओं को घर से बाहर आकर अपना हुनर दिखाने के लिए और अधिक योजनाएं आनी चाहिए।
घर बैठे बन रहे हैंडीक्राफ्ट उत्पाद
सदस्य पूनम जम्वाल ने कहा कि उम्मीद स्कीम ने उन्हें घर पर रहकर ही काम करने का एक सशक्त मंच दिया है। उनके शब्दों में, 'मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मैंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। घर पर जब मैं फ्री रहती हूं तो हैंडमेड प्रोडक्ट्स ही बनाती हूं।' उन्होंने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए महिलाओं के लिए और अधिक आय-सृजन योजनाओं की अपील की।
बॉर्डर क्षेत्र में बदला माहौल
सदस्य रिंकू देवी ने बताया कि इस योजना ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा, 'उम्मीद स्कीम आने की वजह से हम लोगों को लग रहा है कि हम लोग भी पढ़े-लिखे हैं और हमारा भी कुछ टैलेंट है, जिसे हम बाहर दिखा सकते हैं।' रिंकू ने यह भी उल्लेख किया कि सीमावर्ती क्षेत्र में अब पहले की तुलना में शांति का माहौल है, जिससे घर बनाने और स्थिर जीवन जीने का अवसर मिला है। उन्होंने जोड़ा, 'पहले हमारे पास कुछ भी नहीं था, अब पैसा आता है तो लगता है कि और ज़्यादा काम करूं।'
योजना का व्यापक असर
गौरतलब है कि NRLM की उम्मीद स्कीम जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के ज़रिए संचालित होती है, जिससे पिछले कई वर्षों में हज़ारों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। यह ऐसे समय में और अधिक महत्त्वपूर्ण है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास और स्थिरता दोनों राष्ट्रीय प्राथमिकताएं बन चुकी हैं। इन महिलाओं के मैक्रैम उत्पादों की बिक्री से होने वाली आमदनी ने परिवारों की आर्थिक स्थिति में ठोस सुधार किया है। इन महिलाओं की उम्मीद है कि आने वाले समय में युवा पीढ़ी के लिए भी ऐसी कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी।