लखपति दीदी योजना: चंदौली से क्योंझर तक बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, 3 करोड़ का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की लखपति दीदी योजना ने उत्तर प्रदेश के चंदौली से लेकर ओडिशा के क्योंझर तक हजारों ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदल दी है। 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर इन लाभार्थी महिलाओं ने अपनी आत्मनिर्भरता की कहानियाँ साझा करते हुए सरकारी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सरकार का लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है, जो ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
चंदौली में जरी-जरदोजी से आई आर्थिक क्रांति
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत जरी-जरदोजी का काम शुरू किया, जो अब करीब 11 मुस्लिम परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत बन चुका है। कभी रोजगार की तलाश में भटकने वाली ये महिलाएँ आज न केवल खुद व्यवसाय चला रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
NRLM से जुड़ी लाभार्थी रेखा कुमारी ने बताया कि मिशन से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। समूह की अध्यक्ष अफशाना और सदस्यों आशिया तथा परवीन ने भी पुष्टि की कि अब वे स्वयं कमाकर अपने परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं।
क्योंझर की ज्योत्सना रानी — सिलाई मशीन से बनी लखपति
ओडिशा के क्योंझर जिले के गोविंदपुर गाँव की ज्योत्सना रानी महंता लखपति दीदी योजना की एक प्रेरणादायी मिसाल हैं। उन्होंने बताया, 'मुझे लखपति दीदी योजना के तहत ₹1 लाख का लोन मिला। पहले घर चलाना बहुत मुश्किल था। लेकिन अब मैंने सिलाई मशीन खरीद ली है, उस पर काम करती हूँ और अच्छी कमाई करती हूँ, जिससे मेरा घर आसानी से चल रहा है।'
ज्योत्सना ने कहा, 'इसके लिए मैं प्रधानमंत्री का दिल से धन्यवाद करती हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि उन्हें लंबी उम्र दें ताकि वे लंबे समय तक देश की सेवा करते रहें।' यह कहानी उन असंख्य महिलाओं की प्रतिनिधि है जिन्होंने छोटे ऋण को बड़े अवसर में बदला है।
NRLM और लखपति दीदी योजना — क्या है लक्ष्य
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत देशभर में करोड़ों महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लखपति दीदी बनने की राह पर हैं। सरकार का घोषित लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं को इस योजना से जोड़ना है। योजना के तहत महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, माइक्रोफाइनेंस ऋण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा दी जाती है।
यह ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर को बढ़ाना नीतिगत प्राथमिकता बना हुआ है। गौरतलब है कि स्वयं सहायता समूह आंदोलन दो दशक से अधिक पुराना है, परंतु 'लखपति दीदी' ब्रांडिंग ने इसे नई गति और पहचान दी है।
BJP का सेवा संकल्प और सियासी संदर्भ
भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को 'सेवा संकल्प' के रूप में मनाती है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता देशभर में जन-कल्याण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। इस अवसर पर लखपति दीदी लाभार्थियों की सफलता की कहानियाँ सामने आना सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुँच को रेखांकित करता है।
आलोचकों का कहना है कि इन योजनाओं की वास्तविक पहुँच और लाभार्थियों की संख्या के स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि नीतिगत सफलता का सटीक आकलन हो सके। फिर भी, चंदौली और क्योंझर जैसे सुदूर जिलों से आने वाली व्यक्तिगत कहानियाँ दर्शाती हैं कि योजना जमीनी स्तर पर असर छोड़ रही है।
आगे की राह
सरकार के 3 करोड़ लखपति दीदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए NRLM के विस्तार और डिजिटल वित्तीय समावेशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जरी-जरदोजी, सिलाई, और अन्य कुटीर उद्योगों को ODOP से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने की योजना है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक दीर्घकालिक दाँव है।