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गाजा में इजरायली बमबारी से क्षतिग्रस्त 'अल-सादा' इमारत ढही, 11 बच्चों समेत 21 की मौत

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गाजा में इजरायली बमबारी से क्षतिग्रस्त 'अल-सादा' इमारत ढही, 11 बच्चों समेत 21 की मौत

सारांश

पश्चिमी गाजा में इजरायली बमबारी से पहले से जर्जर 'अल-सादा' इमारत बुधवार तड़के ढह गई — 11 बच्चों समेत 21 की मौत, 8,500 से अधिक लोग अब भी मलबे में। युद्धविराम के बावजूद गाजा में इमारतों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

मुख्य बातें

पश्चिमी गाजा में 'अल-सादा' नामक छह मंजिला इमारत बुधवार तड़के ढही; 11 बच्चों और 6 महिलाओं समेत 21 लोगों की मौत।
इमारत में रह रहे करीब 100 विस्थापित लोगों में से 45 को बचाव दल ने 16 घंटे के अभियान में सुरक्षित निकाला; 35 खुद बाहर आए।
54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने परिवार के करीब 10 सदस्यों को खोया।
हमास मीडिया कार्यालय के अनुसार गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लोग मलबे में दबे हैं।
नागरिक सुरक्षा प्रवक्ता महमूद बासल ने चेतावनी दी कि सर्दियों तक 2,000 से अधिक इमारतें और ढह सकती हैं।
अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बावजूद हमास-इजरायल वार्ता में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं।

पश्चिमी गाजा शहर में बुधवार तड़के 'अल-सादा' नामक छह मंजिला रिहायशी इमारत के ढहने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 बच्चे और 6 महिलाएँ शामिल हैं। नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार यह इमारत पहले इजरायली बमबारी में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और उसमें करीब 100 विस्थापित लोग रह रहे थे।

हादसे का ब्यौरा

नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल ने बताया कि यह इमारत निकट पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुख्यालय के समीप स्थित थी। बचाव दलों ने 16 घंटे के लंबे अभियान के दौरान 45 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और 21 शव बरामद किए। इसके अलावा, 35 अन्य लोग खुद ही किसी तरह मलबे से निकलने में कामयाब रहे। हादसे में 25 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।

मलबे में दबे प्रियजनों की तलाश

इमारत के बाहर दर्जनों शोकाकुल परिजन जमा हो गए और कई लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर अपनों को खोजने की कोशिश करते नज़र आए। 54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने इस त्रासदी में परिवार के करीब 10 सदस्यों को खो दिया। यह दृश्य गाजा की उस व्यापक मानवीय पीड़ा का प्रतिबिंब है जो महीनों से जारी है।

बचाव कार्य में अवरोध

फिलिस्तीनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इजरायल की पाबंदियों के चलते भारी मशीनें और बचाव उपकरण समय पर नहीं पहुँच सके, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ। गाजा में हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय ने एक बयान में दावा किया कि पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे में दबे हैं। बयान के अनुसार, भारी मशीनरी की किल्लत के कारण उन्हें निकालना बेहद मुश्किल हो रहा है।

आने वाले खतरों की चेतावनी

महमूद बासल ने आगाह किया कि सर्दियों की आहट के साथ 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतें गिरने के कगार पर हैं। उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' और युद्धविराम की गारंटी देने वाले देशों से अपील की कि बचाव उपकरणों को गाजा में प्रवेश की अनुमति दिलाई जाए। हमास के मीडिया कार्यालय ने हजारों क्षतिग्रस्त इमारतों को 'टाइम बम जैसा खतरा' करार दिया है।

युद्धविराम के बावजूद संकट जारी

गौरतलब है कि यह इमारत ऐसे समय में गिरी जब अक्टूबर 2025 में लागू हुए युद्धविराम समझौते के बाद भी उल्लंघन की घटनाएँ थमी नहीं हैं। हमास और इजरायल के बीच जारी वार्ता में अब तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भारी उपकरणों की आपूर्ति नहीं बढ़ती और युद्धग्रस्त इलाकों में मानवीय राहत का रास्ता नहीं खुलता, ऐसे हादसों का सिलसिला बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 से अधिक लोग मलबे में दबे हों और 2,000 इमारतें गिरने के कगार पर हों, तो यह स्पष्ट है कि 'युद्धविराम' की परिभाषा ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर है। भारी उपकरणों पर पाबंदी का आरोप — यदि सत्यापित हो — अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर सवाल उठाता है। मुख्यधारा की कवरेज मृतकों की गिनती पर रुक जाती है; जो छूट जाता है वह यह है कि आने वाली सर्दियाँ इस संकट को कई गुना बड़ा बना सकती हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजा में 'अल-सादा' इमारत क्यों गिरी?
नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल के अनुसार, छह मंजिला 'अल-सादा' इमारत पहले इजरायली बमबारी में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और बुधवार तड़के ढह गई। इसमें करीब 100 विस्थापित लोग रह रहे थे।
गाजा इमारत हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
इस हादसे में 11 बच्चों और 6 महिलाओं समेत कुल 21 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 25 से अधिक लोग घायल हैं और 45 को बचाव दल ने 16 घंटे के अभियान में सुरक्षित बाहर निकाला।
गाजा में अब भी कितने लोग मलबे में दबे हैं?
हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय के बयान के अनुसार, पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हैं। भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों की कमी के कारण उन्हें निकालना बेहद कठिन बताया जा रहा है।
क्या गाजा में और इमारतें गिरने का खतरा है?
नागरिक सुरक्षा प्रवक्ता महमूद बासल ने चेतावनी दी है कि सर्दियाँ आते-आते 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतें गिरने के कगार पर हैं। उन्होंने क्षतिग्रस्त इमारतों को 'टाइम बम जैसा खतरा' करार दिया है।
गाजा युद्धविराम समझौते की स्थिति क्या है?
अक्टूबर 2025 में गाजा युद्धविराम समझौता लागू हुआ था, लेकिन उल्लंघन की घटनाएँ जारी हैं। हमास और इजरायल के बीच चल रही वार्ता में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।
राष्ट्र प्रेस
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