लाहौर में तीन मंजिला इमारत ढही: 11 की मौत, मलबे में अभी भी फंसी बच्ची
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के लाहौर शहर के हरबंसपुरा इलाके में बुधवार रात एक तीन मंजिला इमारत अचानक ढह जाने से कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हो गए। 30 जुलाई को स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बचावकर्मी अभी भी मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटे हैं और आशंका है कि एक छोटी बच्ची अभी भी मलबे के नीचे दबी हुई है।
हादसे का घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, इस इमारत में तीन भाई अपने-अपने परिवारों के साथ रहते थे। घटना की रात उनकी बहन और उसके बच्चे भी जन्मदिन समारोह में शामिल होने के लिए वहाँ आए हुए थे। इसी उत्सव के दौरान इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे परिवार के कई सदस्य मलबे में दब गए।
लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के प्रवक्ता हैरिस अली ने बताया कि राहत और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं और मलबे से शव निकाले जा रहे हैं। उन्होंने पुष्टि की कि बचावकर्मी अभी भी मौके पर डटे हुए हैं।
जाँच के आदेश
लाहौर के डिप्टी कमिश्नर, रिटायर्ड कैप्टन मुहम्मद अली एजाज ने इस दुर्घटना की तत्काल जाँच के आदेश दिए हैं। इमारत गिरने का सटीक कारण अभी तक सामने नहीं आया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
पाकिस्तान में इमारत हादसों का बढ़ता सिलसिला
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में इमारतों के ढहने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले 30 जून को लाहौर के काहना इलाके में एक निजी ट्यूशन अकादमी की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। पंजाब प्रांत के स्वास्थ्य मंत्री ख्वाजा इमरान नजीर ने उस हादसे में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए बताया था कि मलबे के नीचे करीब 20 लोग फंसे हुए थे।
उस घटना के बाद रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता फारूक अहमद ने बताया था कि एक महिला शिक्षिका और आठ बच्चों को गंभीर चोटों के साथ लाहौर जनरल अस्पताल (LGH) में भर्ती कराया गया था।
मानवाधिकार परिषद की चिंता
1 जुलाई को पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRC) ने काहना हादसे पर गहरी चिंता जताई थी और कहा था कि ट्यूशन सेंटरों तथा रिहायशी इमारतों की निर्माण गुणवत्ता की समुचित जाँच न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है। परिषद ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल और पारदर्शी जाँच की माँग की थी।
HRC ने अपने बयान में कहा था, 'मासूम बच्चों की सुरक्षा और उनके लिए सुरक्षित शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराना राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए तुरंत सख्त और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।'
आगे क्या
हरबंसपुरा में बचाव अभियान अभी जारी है और मलबे में दबी बच्ची को निकालने की कोशिशें प्राथमिकता पर हैं। डिप्टी कमिश्नर की जाँच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमारत की संरचनात्मक कमज़ोरी, निर्माण में लापरवाही या कोई अन्य कारण इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार था।