PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में 76 बटुकों ने किया दुग्धाभिषेक, विधायक नीलकंठ बोले — सांस्कृतिक धरोहर के शिल्पी हैं मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन (17 सितंबर 2026) के अवसर पर उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी के अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज के तत्वावधान में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसमें 76 बटुक ब्राह्मणों ने 76 लीटर केसर, जल और दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच घाट का वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता विभिन्न तरीकों से प्रधानमंत्री का जन्मदिन मना रहे थे।
अनुष्ठान का विवरण
गुरुवार सुबह सात बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्री अन्नपूर्णा ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम और श्री शास्त्रार्थ महाविद्यालय के बटुक ब्राह्मणों ने आचार्य उदित नारायण मिश्र के नेतृत्व में यह पूजन सम्पन्न कराया। बटुकों ने वैदिक मंत्रों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
इसके साथ ही नमामि गंगे की ओर से सामने घाट पर मां गंगा को 76 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई गई। गंगा आरती के बाद मिठाई वितरण हुआ, 'बार-बार ये दिन आए' गीत गूंजे तथा 'शांताकारं भुजगशयनम' सहित अनेक वैदिक मंत्रों का पाठ हुआ। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय के जयकारों के साथ हुआ।
नीलकंठ तिवारी की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, पूर्व राज्यमंत्री एवं शहर दक्षिणी के भाजपा विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि आज देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की भी जयंती है, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को 'आधुनिक भारत का शिल्पी' कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने मोदी के नेतृत्व को दूरदर्शी बताया और कहा कि इसमें 'सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास' की भावना स्पष्ट दिखती है।
तिवारी ने यह भी कहा, 'आज प्रधानमंत्री की सेवा के 25 साल भी पूरे हो रहे हैं। काशी में हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल सेवाओं और जनसेवा — हर क्षेत्र में विकास हुआ है। यहाँ अभी लगभग ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से ₹50,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं।'
काशी के विकास पर बल
कार्यक्रम संयोजक एवं विप्र समाज के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने काशी को नई दिशा दी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, घाटों का सौंदर्यीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे के विकास से काशी के स्वरूप में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि मोदी का गंगा नदी के प्रति दृष्टिकोण आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और स्वच्छता से गहराई से जुड़ा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब मोदी के जन्मदिन पर वाराणसी में इस पैमाने पर धार्मिक आयोजन हुआ हो — यह परंपरा उनके सांसद बनने के बाद से जारी है। इस बार 76वें जन्मदिन को विशेष रूप से 76 बटुकों और 76 मीटर की चुनरी के प्रतीकात्मक रूप से मनाया गया, जो क्षेत्रीय राजनीतिक सक्रियता और आस्था के संगम को दर्शाता है। प्रदीप श्रीवास्तव, आशुतोष द्विवेदी, नवीन कसेरा, महंत रमेश तिवारी लिंगिया महाराज, संजय उपाध्याय, आकाश पाठक और सुनील यादव सहित बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता और बटुक ब्राह्मण उपस्थित रहे।