PM मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में किया अभिषेक-आरती, बच्चों ने तोड़े बैरिकेड्स; 'हर हर महादेव' से गूंजा परिसर
सारांश
Key Takeaways
- PM नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अभिषेक और आरती की।
- मंदिर प्रशासन ने प्रधानमंत्री को त्रिशूल और डमरू भेंट किए।
- उत्साहित बच्चों ने बैरिकेड्स पार कर PM का अभिवादन किया; परिसर में 'हर हर महादेव' के जयकारे गूंजे।
- PM मोदी ने परिसर में स्थित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का भी अवलोकन किया।
- ₹36,230 करोड़ की लागत से बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हरदोई में किया गया।
- एक्सप्रेसवे से मेरठ-प्रयागराज यात्रा समय 10-12 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 29 अप्रैल को वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। डमरू और शंखनाद की गूंज के बीच मंदिर परिसर में पहुँचते ही प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत हुआ और 'ॐ नमः शिवाय' तथा 'हर हर महादेव' के जयकारों से पूरा परिसर गुँजायमान हो उठा। यह दौरा उनके उत्तर प्रदेश प्रवास के पहले चरण का हिस्सा था।
मंदिर में पूजा-अर्चना और परंपरागत अनुष्ठान
प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक और आरती की तथा परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ भाग लिया। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री को त्रिशूल और डमरू भेंट किए गए। इसके पश्चात उन्होंने भगवान शिव का आशीर्वाद ग्रहण किया।
बच्चों का उत्साह और जनता की प्रतिक्रिया
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं और आम जनता का अभिवादन किया, भीड़ ने 'जय श्री राम', 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव' के नारे लगाए। उत्साह से भरे बच्चों ने बैरिकेड्स पार करते हुए मुस्कुराते चेहरों के साथ प्रधानमंत्री का अभिवादन किया, जिससे माहौल और भी भावपूर्ण हो गया।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन
पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का भी अवलोकन किया। यह घड़ी भारतीय पंचांग एवं वैदिक समय-गणना पद्धति पर आधारित है और काशी की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग बन चुकी है।
गंगा एक्सप्रेसवे उद्घाटन: ₹36,230 करोड़ की परियोजना
काशी विश्वनाथ दर्शन के बाद प्रधानमंत्री मोदी हरदोई के लिए रवाना हुए, जहाँ उन्होंने ₹36,230 करोड़ की लागत से निर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया और एक जनसभा को भी संबोधित किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा, 6-लेन वाला एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है।
यह मार्ग उत्तर प्रदेश के 12 जिलों — मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — से होकर गुज़रता है और प्रदेश के पश्चिमी, मध्य तथा पूर्वी क्षेत्रों को एक निर्बाध हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ता है। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय 10-12 घंटों से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा, जिससे आवागमन में सुगमता और परिवहन दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा।
गौरतलब है कि यह एक्सप्रेसवे देश में विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में दीर्घकालिक भूमिका निभाने की उम्मीद है।