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गंगा दशहरा पर वाराणसी में 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से किया मां गंगा का दुग्धाभिषेक

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गंगा दशहरा पर वाराणसी में 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से किया मां गंगा का दुग्धाभिषेक

सारांश

वाराणसी के देवी अहिल्याबाई घाट पर गंगा दशहरा के पर्व पर 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। BJP विधायक नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम आस्था के साथ गंगा संरक्षण की सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश लेकर आया।

मुख्य बातें

वाराणसी के देवी अहिल्याबाई घाट पर 26 मई 2025 को गंगा दशहरा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया।
BJP विधायक नीलकंठ तिवारी ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया; शास्त्रार्क महाविद्यालय के बटुक और पूज्य संत उपस्थित रहे।
तिवारी ने नमामि गंगे परियोजना और वाराणसी में पाँच एसटीपी के संचालन का उल्लेख करते हुए PM मोदी की प्रशंसा की।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ.
पवन शुक्ला ने गंगा रक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी बताया।

वाराणसी के देवी अहिल्याबाई घाट पर गंगा दशहरा के पावन अवसर पर 26 मई 2025 को भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और सामूहिक गंगा आरती के साथ घाट पर गहन आध्यात्मिक वातावरण छाया रहा।

मुख्य आयोजन और अनुष्ठान

शास्त्रार्क महाविद्यालय के 51 बटुकों ने पूज्य संतों की उपस्थिति में वैदिक पद्धति से हवन, मंत्रोच्चार और विशेष आरती का संपादन किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाट पर पहुँचने लगे थे और स्थानीय नागरिकों तथा गंगा भक्तों की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की गई। यह आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।

विधायक नीलकंठ तिवारी का वक्तव्य

विधायक नीलकंठ तिवारी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, 'मां गंगा के अवतरण दिवस पर शास्त्रार्क महाविद्यालय के बटुकों और पूज्य संतों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम रखा गया था। प्रत्येक भारतवासी के मन में मां गंगा के प्रति कृतज्ञता का भाव रहता है। माता के रूप में वे हमें कष्टों से मुक्ति, सुख और जीवन की रक्षा प्रदान करती हैं।'

तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंगा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा, 'पीएम मोदी मां गंगा को मातृत्व भाव से देखते हैं। उन्होंने 'मां गंगा ने बुलाया है' कहकर नमामि गंगे परियोजना शुरू की। 2014 से पहले काशी में गंगा की जो स्थिति थी, सबने देखी है। घाट जुड़े नहीं थे और एसटीपी भी नहीं थे। आज पीएम मोदी के प्रयासों से बनारस में पाँच एसटीपी कार्यरत हैं, गंगा में सीवेज नहीं गिरता, घाट आपस में जुड़ गए हैं और गंदगी-शौच मुक्त हो गए हैं।'

कार्यक्रम समन्वयक का संदेश

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पवन शुक्ला ने बताया, 'विधायक नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया और गंगा आरती सम्पन्न हुई। गंगा दशहरा पर स्नान करने से पापों का नाश होता है, यह पुण्य बेला है। हम इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को संदेश देना चाहते हैं कि गंगा की रक्षा और समाज कल्याण की जिम्मेदारी हम सबकी है।'

गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व

गंगा दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि को गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। काशी में गंगा आरती और स्नान का विशेष आध्यात्मिक महत्व सदियों से चला आ रहा है। यह पर्व गंगा संरक्षण की चेतना को सामाजिक स्तर पर जागृत करने का भी अवसर बनता जा रहा है।

आगे की दिशा

इस आयोजन ने गंगा स्वच्छता और सामुदायिक जागरूकता के संदेश को नई ऊर्जा दी है। गौरतलब है कि काशी में इस तरह के धार्मिक आयोजन अब केवल आस्था तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नदी संरक्षण के व्यापक संदेश के वाहक भी बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गंगा की वास्तविक जल गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर पर स्वतंत्र आकलन की ज़रूरत बनी रहती है। धार्मिक जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी का यह मेल तभी सार्थक होगा जब नदी संरक्षण की निगरानी केवल सरकारी दावों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा दशहरा क्या है और यह कब मनाया जाता है?
गंगा दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि को गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था और इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है।
वाराणसी में गंगा दशहरा 2025 का आयोजन कहाँ हुआ?
यह आयोजन वाराणसी के देवी अहिल्याबाई घाट पर 26 मई 2025 को हुआ। BJP विधायक नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया और सामूहिक गंगा आरती संपन्न हुई।
दुग्धाभिषेक क्या होता है?
दुग्धाभिषेक एक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें देवता या पवित्र नदी को दूध से अभिषेक किया जाता है। इस आयोजन में 51 बटुकों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया।
नमामि गंगे परियोजना से वाराणसी में क्या बदलाव आया?
विधायक नीलकंठ तिवारी के अनुसार, 2014 से पहले वाराणसी में घाट आपस में जुड़े नहीं थे और एसटीपी नहीं थे। अब शहर में पाँच एसटीपी कार्यरत हैं, गंगा में सीवेज नहीं गिरता और घाट जुड़ गए हैं।
इस आयोजन का सामाजिक संदेश क्या था?
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पवन शुक्ला ने कहा कि गंगा की रक्षा और समाज कल्याण की जिम्मेदारी हम सबकी है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गंगा संरक्षण की सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास भी था।
राष्ट्र प्रेस
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