राहुल गांधी की परशुराम से तुलना पर BJP का पलटवार: 'जो राम के न हुए, वे परशुराम के कैसे होंगे'
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी के गंगा घाट पर 19 जून को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सांसद राहुल गांधी के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर का दूध से अभिषेक किया — जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के रूप में दिखाया गया था। एक हाथ में परशुराम का फरसा और दूसरे में संविधान की प्रति — इस तस्वीर ने राजनीतिक और धार्मिक बहस को हवा दे दी है।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गंगा घाट के निकट एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान राहुल गांधी की एक विशेष तस्वीर का दुग्धाभिषेक किया गया, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम का अवतार दर्शाया गया था। इस गतिविधि के वायरल होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस नेताओं की बुद्धि मारी गई है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के अवतार हैं। राहुल गांधी की तुलना भगवान परशुराम से करना उन्हें भारी पड़ेगा, ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है।' पाठक ने आगे कहा कि जो लोग सनातन धर्म का विरोध करते हैं, वे खुद की तुलना भगवान परशुराम से करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने हमेशा भगवान राम को काल्पनिक माना और सनातन संस्कृति को कभी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान देवउठनी एकादशी के दिन राहुल गांधी द्वारा मछली पकड़ने की घटना का भी उल्लेख किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि हर व्यक्ति को जन्मदिन मनाने का अधिकार है, लेकिन उन्हें देवता के रूप में दिखाकर दूध से अभिषेक करना और एक हाथ में संविधान तथा दूसरे में परशुराम का फरसा — यह मेल उन्हें 'बहुत अजीब' लगा। ठाकुर ने कहा, 'मेरा मानना है कि उनके लिए एक अच्छा इंसान बनना और एक अच्छे व्यक्ति के तौर पर काम करना जरूरी है। भगवान बनने की कोई जरूरत नहीं है।'
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा, 'जो राम के नहीं हो पाए, वे परशुराम के कैसे हो सकते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता और धर्म को लेकर देश की न्यायपालिका भी परीक्षण कर रही है और यह देवी-देवताओं का अपमान है।
BJP प्रवक्ता का आरोप
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे 'हिंदू आस्था और करोड़ों भक्तों का अपमान' करार दिया। उन्होंने कहा, 'देवता पवित्र होते हैं और उनका इस्तेमाल कभी भी राजनीतिक महिमामंडन के लिए नहीं किया जाना चाहिए।' पूनावाला ने हिंदू आतंकवाद की बहस, सनातन धर्म पर टिप्पणियों और भगवान राम के अस्तित्व पर उठे सवालों का हवाला देते हुए इसे 'एक सिलसिले' का हिस्सा बताया और राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस ब्राह्मण और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक पहुँच बनाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि भगवान परशुराम ब्राह्मण समुदाय के आराध्य देव माने जाते हैं और उत्तर प्रदेश में उनकी धार्मिक-राजनीतिक प्रासंगिकता बहुत अधिक है। इस घटना ने धर्म और राजनीति के मेल पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है।