राहुल गांधी की भगवान परशुराम से तुलना पर NDA का विरोध, गिरिराज सिंह बोले — धार्मिक भावनाएं आहत
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन पर 19 जून 2025 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें भगवान परशुराम के रूप में प्रस्तुत करते हुए विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी। इस आयोजन में राहुल गांधी की तस्वीर का दूध से अभिषेक किया गया, गंगा नदी में पूजा की गई, लड्डू और केक काटे गए और उन्हें संविधान की प्रति हाथ में लिए हुए दर्शाया गया।
आयोजन का स्वरूप
वाराणसी यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विकास सिंह ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने मां गंगा की गोद में राहुल गांधी के दीर्घायु और उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए दूध अर्पित किया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना की और राहुल गांधी को आशीर्वाद दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम को राहुल गांधी के नेतृत्व और संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के सम्मान के रूप में परिभाषित किया। विकास सिंह ने यह भी आशा जताई कि भविष्य में राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनें।
NDA की तीखी प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति की तुलना भगवान परशुराम से करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम हिंदू आस्था के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं और उनकी तुलना किसी राजनेता से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने भी इस आयोजन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई देते हैं, जबकि अन्य समय में वे धर्म से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते हैं। राजभर के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन केवल राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।
राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गंगा में दूध चढ़ाना या पूजा-अर्चना करना आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन किसी जीवित व्यक्ति को भगवान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, नेताओं को ऐसे आयोजनों से बचना चाहिए जो धार्मिक प्रतीकों और राजनीतिक व्यक्तियों के बीच तुलना का विवाद उत्पन्न करें।
JDU की संतुलित राय
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में देश को उनसे काफी उम्मीदें हैं। राजीव रंजन के अनुसार, जन्मदिन केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी समय होता है, और राहुल गांधी को यह तय करना चाहिए कि वे देशहित और जनहित के मुद्दों पर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब धर्म और राजनीति के मेल को लेकर देश में बहस तेज़ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनेता की धार्मिक छवि से तुलना ने विवाद खड़ा किया हो — आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है या नहीं।