क्या 'गांधी कांग्रेस' में चापलूसी और चमचागिरी का चलन है?
सारांश
Key Takeaways
- गांधी कांग्रेस में चापलूसी का चलन बढ़ा है।
- राहुल गांधी की भगवान श्रीराम से तुलना की गई है।
- भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
- वोट चोरी के आरोप राजनीति का हिस्सा हैं।
- कांग्रेस में आंतरिक मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता है।
पटना, 1 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने जब लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से की, तो भारतीय जनता पार्टी ने तीव्र प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने इस पर नाना पटोले पर हमला बोलते हुए कहा, "यह 'गांधी कांग्रेस' है। वर्तमान में, 'गांधी कांग्रेस' में चापलूसी और चमचागिरी का चलन है। जो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सबसे ज्यादा चापलूसी करता है, वह सबसे तेज़ी से आगे बढ़ता है।"
उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी की भगवान श्रीराम से तुलना की जा रही है, जबकि वह तो हिंदू भी नहीं हैं। आज तक उन्होंने रामलला के दर्शन करने अयोध्या तक नहीं गए। वह हिंदू धर्म से नफरत करते हैं और शक्ति के खिलाफ लड़ते हैं। हम शक्ति के लिए लड़ रहे हैं। वे कहते हैं कि हिंदू हिंसक होते हैं, और फिर उन्हें भगवान श्रीराम के रूप में दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।"
अजय आलोक ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी पर वोट चोरी का आरोप लगाने पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "बिहार में एक कहावत, 'छलनी दोसे सूप के,' बहुत प्रचलित है। आज तक कांग्रेस से बड़ी वोट डकैती किसी ने नहीं की है। अधीर रंजन चौधरी, जो कांग्रेस के नेता हैं, राहुल गांधी से सवाल करने के बजाय ममता बनर्जी पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "सीएम ममता बनर्जी वोट चोरी नहीं कर रही हैं, बल्कि वह अपने घुसपैठियों के वोट बचाना चाहती हैं। घुसपैठिए उनके वोटर हैं। इस स्थिति में, एक बड़ा चोर दूसरे चोर पर सवाल उठा रहा है। सच्चाई तो यह है कि दोनों ही वोट चोर हैं। अधीर को राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि उनकी दादी के समय से आज तक यह चोरी कैसे हुई? बूथ कैसे लूटा गया, और अपने मन का चुनाव आयोग कैसे बनाया गया? अब वोट चोरी की कहानी खत्म हो चुकी है। उन्हें इस बात का एहसास है कि यह कहानी अब समाप्त हो गई है, जिससे उनके मन में निराशा है।