अयोध्या के संतों का राहुल गांधी और पप्पू यादव पर प्रहार, वाराणसी एफआईआर पर मांगी कठोर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के प्रमुख संतों ने 2 अगस्त को वाराणसी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद अवधेश प्रसाद और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। संतों ने सनातन धर्म, भगवा और भगवान श्री राम के कथित अपमान को 'अक्षम्य और दंडनीय' करार देते हुए इन नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, 'पहली बार देखा गया कि संसद भवन परिसर के अंदर सनातन, भगवा और भगवान श्री राम का अपमान विपक्षी सांसदों ने किया। यह अक्षम्य और दंडनीय है।' उन्होंने कहा कि वाराणसी में साधु-संतों ने नामजद राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर पंजीकृत कराई है और इस कृत्य में सम्मिलित सभी लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
न्यायपालिका पर अविश्वास का आरोप
परमहंस आचार्य ने यह भी कहा, 'जब देश की सर्वोच्च अदालत ने एसआईटी का गठन किया है और जाँच चल रही है, उसी बीच में ऐसा कृत्य करना न्यायपालिका के प्रति अविश्वास प्रकट करना है।' उन्होंने विपक्षी सांसदों पर 'देश में अराजकता फैलाने' की मंशा का आरोप लगाया और कठोर कार्रवाई की माँग दोहराई।
अन्य संतों की प्रतिक्रिया
संत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि राहुल गांधी और पप्पू यादव समेत विपक्ष के सदस्य 'दोहरी नीति' अपनाते हैं और ऐसे लोगों को जेल में डालकर कठोर दंड दिया जाना चाहिए। संत कल्कि राम ने पप्पू यादव के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र की जनता ने उन्हें चुना है, उनके मुद्दे उठाना उनका दायित्व है, न कि जिस स्थान से उनका कोई संबंध नहीं, उसका अनादर करना।
संत कल्कि राम ने यह भी कहा, 'आप संसद में बैठकर भगवा रंग का अपमान कर रहे हैं। आपमें हरा रंग पहनकर और टोपी लगाकर ऐसा करने की हिम्मत नहीं होगी।' उन्होंने घोषणा की कि आने वाली अमावस्या को अयोध्या में ऐसा कृत्य करने वालों का प्रतीकात्मक पिंडदान किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
यह विवाद संसद परिसर में हुई कथित घटना के बाद उभरा है, जिसे लेकर वाराणसी के साधु-संतों ने तीनों नेताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी संबंधित मामले की जाँच कर रही है।
आगे क्या
संतों की माँग के बाद इस विवाद के राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ने की संभावना है। अयोध्या में अमावस्या को होने वाले प्रतीकात्मक आयोजन से इस मुद्दे को और हवा मिल सकती है।